पालघर को सूखे की सूची से बाहर रखा गया, आदिवासी किसान सरकारी मदद से वंचित
राज्य सरकार ने बारिश के आंकड़ों के आधार पर पालघर जिले को सूखाग्रस्त तालुकों की सूची से बाहर रखा, जबकि भात की फसल पानी की कमी से करपने की कगार पर है।
राज्य सरकार ने महाराष्ट्र में सूखे जैसी स्थिति का जायजा लेने के बाद 265 तालुकों में सूखाग्रस्त हालात घोषित किए हैं। इन तालुकों में किसानों के लिए 12 अलग अलग राहत उपाय और सहूलियतें लागू की गई हैं। लेकिन यह फैसला लेते वक्त जून से सितंबर के बीच बारिश में 18 प्रतिशत से ज्यादा कमी होने का तकनीकी पैमाना लगाया गया, जिसकी वजह से पूरा पालघर जिला इस सूखे की सूची से बाहर हो गया। पालघर के आदिवासी किसानों की मांग है कि सिर्फ बारिश के आंकड़ों पर भरोसा करने की बजाय फसलों की असली हालत देखकर सूखा घोषित किया जाए।
सरकार ने जिन 265 तालुकों को इस सूची में शामिल किया है, वहां ट्रिगर 1 के तहत खेतों में जाकर पंचनामे, जियो टैगिंग और फोटो के साथ सर्वे किया जा रहा है। पालघर इस सूची में न होने की वजह से यहां के किसान सरकारी मदद से पूरी तरह वंचित रह जाएंगे। जिले में जुलाई महीने में अच्छी बारिश हुई थी, मगर भात की रोपाई देर से हुई। अभी भात की फसल गाभा अवस्था में यानी दाना भरने की स्टेज में है, और इस वक्त फसल को पानी की सख्त जरूरत है। मगर पिछले कुछ दिनों से बारिश ने पूरी तरह पीठ फेर ली है, जिससे भरपूर बढ़ रही भात की फसल के झुलसने का डर पैदा हो गया है।
पालघर में बाकी जिलों जैसी हालत नहीं है, न यहां बारहमासी सिंचाई की सुविधा है, न कुओं का जाल है और न रबी सीजन में चना गेहूं जैसी दूसरी फसल लेने की गुंजाइश। यहां के ज्यादातर आदिवासी किसान सिर्फ बारिश के पानी पर निर्भर भात की फसल के सहारे ही साल भर का गुजारा करते हैं। जुलाई की बारिश के आंकड़ों के आधार पर तालुकों को बाहर रखना यहां के गरीब किसानों की कमर तोड़ने जैसा है। इसीलिए मांग हो रही है कि जिला प्रशासन फसलों की मौजूदा हालत देखकर दोबारा सर्वे रिपोर्ट सरकार को सौंपे।
पूर्व सभापति और किसान प्रदीप वाघ ने साफ कहा कि राज्य के दूसरे हिस्सों के मुकाबले पालघर में खेती का ढांचा बिलकुल अलग है। उनके मुताबिक भात की फसल इस वक्त बेहद नाजुक स्टेज पर है और अगर बारिश नहीं हुई तो उत्पादन में भारी गिरावट आएगी। उन्होंने कहा कि जब हाथ में आई फसल के बर्बाद होने का खतरा मंडरा रहा है, ऐसे में पालघर को सूखे की सूची से बाहर रखना अन्याय है।