मिठाई खाने के बाद नींद क्यों आने लगती है, जानिए इसके पीछे की वजह
त्योहारों में मिठाई खाने के बाद अक्सर सुस्ती और नींद महसूस होती है, इसकी वजह ब्लड शुगर और हार्मोन के उतार-चढ़ाव में छिपी है।
त्योहार हो या कोई खास मौका, मिठाई या चॉकलेट खाना हम सबको पसंद है। लेकिन क्या कभी आपने गौर किया कि मिठाई खाने के फौरन बाद नींद या सुस्ती सी क्यों छाने लगती है। इसके पीछे शरीर में होने वाली एक पूरी वैज्ञानिक प्रक्रिया काम करती है, जिसे मेडिकल भाषा में फूड क्रोमा कहा जाता है। इसमें शरीर के इन्सुलिन और ब्लड शुगर की लेवल एक साथ बदलती है, और यही दोनों बदलाव मिलकर सुस्ती और नींद का कारण बनते हैं।
दरअसल जब भी हम कोई मीठी चीज खाते हैं, तो ब्लड में ग्लूकोज यानी शुगर की मात्रा अचानक बढ़ जाती है। शरीर इस बढ़ी हुई शुगर को कंट्रोल करने के लिए पैंक्रियास से भारी मात्रा में इन्सुलिन हार्मोन छोड़ता है। यह इन्सुलिन ब्लड शुगर को तेजी से नीचे लाने का काम करता है। शुगर लेवल के इस अचानक गिरने से शरीर की एनर्जी भी कम हो जाती है, जिसकी वजह से थकान और नींद का एहसास होने लगता है।
इसके अलावा एक और वजह है, जो सीधे दिमाग से जुड़ी है। मिठाई खाने पर इन्सुलिन के असर से ब्लड में मौजूद अमिनो एसिड मांसपेशियों में सोख लिए जाते हैं, लेकिन ट्रायप्टोफैन नाम का अमिनो एसिड दिमाग तक पहुंच जाता है। दिमाग में जाकर ट्रायप्टोफैन सेरोटोनिन और मेलाटोनिन नाम के हार्मोन में बदल जाता है। ये दोनों हार्मोन शरीर को शांत करने और नींद लाने में मदद करते हैं।
दिमाग में ओरेक्सिन नाम की कोशिकाएं भी होती हैं, जो शरीर को जगाए और अलर्ट रखने का काम करती हैं। जब शरीर में शुगर की मात्रा बढ़ती है, तो इन ओरेक्सिन कोशिकाओं का काम धीमा पड़ जाता है, जिससे इंसान को सुस्ती महसूस होने लगती है। इसके अलावा मीठा या भारी खाना खाने पर उसे पचाने के लिए पाचन तंत्र को ज्यादा एनर्जी की जरूरत पड़ती है। इस वजह से शरीर का ब्लड फ्लो का बड़ा हिस्सा पेट और आंतों की तरफ मुड़ जाता है, जिससे दिमाग और बाकी अंगों तक जाने वाला ब्लड फ्लो कुछ देर के लिए कम हो जाता है, और यही सुस्ती की वजह बनता है।
हालांकि मीठा पूरी तरह बंद करने की जरूरत नहीं है, लेकिन इसकी मात्रा पर कंट्रोल रखना जरूरी बताया गया है। खाने में प्रोटीन, फाइबर और पौष्टिक चीजों को शामिल करने से खाना ज्यादा बैलेंस्ड रहता है। मिठाई खाने के कुछ देर बाद हल्का टहलना भी फायदेमंद हो सकता है। शरीर की ग्रोथ पर कंट्रोल रखना, पाचन क्रिया पर ध्यान देना, भावनात्मक संतुलन और तनाव को कंट्रोल में रखना, इन सबका भी शरीर के इस पूरे सिस्टम पर असर पड़ता है।