महापालिका अस्पतालों में अब सर्जरी के दौरान नसों पर नजर रखेगी खास मशीन
मुंबई महापालिका के अस्पतालों में मज्जातंतु (नर्व) से जुड़ी संवेदनशील सर्जरी के दौरान मरीज को बचाने के लिए नई नर्व मॉनिटरिंग प्रणाली लगाई जा रही है।
मुंबई महापालिका के अस्पतालों में अब उन मरीजों के लिए खास तकनीक आने वाली है, जिनकी सर्जरी में नसों को चोट लगने का खतरा रहता है। ऑपरेशन के दौरान नसों के काम पर लगातार नजर रखने वाली और उसमें कोई गड़बड़ी होते ही तुरंत डॉक्टरों को अलर्ट करने वाली आयओएनएम यानी इंट्रा ऑपरेटिव नर्व मॉनिटरिंग प्रणाली को महापालिका अस्पतालों में लगाने का काम शुरू कर दिया गया है।
इस प्रणाली की खासियत यह है कि अभी तक सर्जरी के बाद पता चलने वाली नस की गड़बड़ी अब ऑपरेशन चलते वक्त ही डॉक्टरों के सामने आ जाएगी। इससे डॉक्टर तुरंत जरूरी कदम उठा सकेंगे।
दरअसल दिमाग, रीढ़ की हड्डी, थायरॉईड और कान-नाक-गले से जुड़ी न्यूरोसर्जरी जैसी कुछ जटिल सर्जरी में डॉक्टरों को नसों के बिल्कुल करीब से ऑपरेशन करना पड़ता है। ऐसे में नस पर दबाव आने या उसे चोट लगने का खतरा बना रहता है। अगर सर्जरी के दौरान ही नस के काम करने के तरीके पर लगातार नजर रखी जाए, तो समय रहते खतरे को पहचाना जा सकता है।
मुंबई महापालिका के अस्पतालों में हर साल बड़ी संख्या में सर्जरी होती हैं, जिनमें से कुछ नसों के बेहद करीब की जाती हैं। ऐसी ही सर्जरी में खतरा कम करने के लिए आयओएनएम प्रणाली लाने का फैसला लिया गया है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और प्रशासन यह सिस्टम उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहा है।
यह प्रणाली सर्जरी के दौरान नसों से निकलने वाले बिजली के संकेतों पर लगातार नजर रखती है। इन संकेतों में कोई बदलाव होते ही सर्जन को तुरंत सूचना मिल जाती है, जिसके आधार पर वे सर्जरी का तरीका बदल सकते हैं या नस पर पड़ रहे दबाव को कम करने के लिए जरूरी सावधानी बरत सकते हैं।
जैसे थायरॉईड की सर्जरी में स्वरयंत्र से जुड़ी नस को चोट लगने पर मरीज की आवाज में बदलाव आ सकता है। इसी तरह दिमाग और रीढ़ की हड्डी की कुछ सर्जरी में नसों के काम पर असर पड़ने से मरीज की हरकतों या शरीर के अन्य कामकाज पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है। इसीलिए ऐसी संवेदनशील सर्जरी में नसों पर लगातार नजर रखने वाली यह प्रणाली अहम मानी जा रही है।