बुधवार, 4 नवंबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट

महाड में बारिश ने दगा दिया, 188 गांवों में फसल नुकसान के पंचनामे आखिरी दौर में

महाड में बारिश ने दगा दिया, 188 गांवों में फसल नुकसान के पंचनामे आखिरी दौर में तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

महाड तहसील अब सूखे जैसे हालात वाली सूची में है। धान सूख जाने से किसान संकट में हैं और पिछले साल जैसी कम मदद नहीं, असली नुकसान के हिसाब से भरपाई मांग रहे हैं।

महाड तहसील के किसान इस वक्त बड़ी आर्थिक परेशानी में हैं। सीजन के बीचोंबीच बारिश ने पीठ फेर ली और धान की खेती सूखकर झुलस गई।

शुरू में महाड को सूखाग्रस्त सूची से बाहर रखा गया था। बाद में कृषि विभाग की रिपोर्ट आई तो तहसील को आखिरकार 'सूखे जैसी' सूची में शामिल कर लिया गया। इसी के तहत तहसील के 188 गांवों में खेती के नुकसान के सर्वे का काम अब आखिरी दौर में पहुंच गया है।

किसानों की मांग साफ है। उनका कहना है कि पिछले साल जैसी मामूली मदद न पकड़ाई जाए। जितना असली नुकसान हुआ है, उसी के हिसाब से भरपाई दी जाए।

पिछले दस साल में महाड में करीब 15 हजार हेक्टेयर पर धान की बुवाई होती थी। इस बार बारिश की अनियमितता, एमआईडीसी के जल प्रदूषण और बाढ़ की मार के चलते बुवाई सिर्फ 6 हजार हेक्टेयर पर आ गई। ऊपर से बारिश ने चकमा दे दिया, तो ऊंचाई की पथरीली जमीन का धान पूरी तरह सूख गया। कई जगह फसल काट भी ली जाए तो अनाज तो दूर, जानवरों के लिए पुआल तक नहीं मिल रहा। किसान गुस्से में कह रहे हैं कि फसल काटने के बजाय खेत में आग लगाने की नौबत आ गई है।

तहसील कृषि अधिकारी धीरज तोरणे ने बताया कि सरकारी आदेश के मुताबिक तहसीलदार कार्यालय के जरिए 188 गांवों में ग्राम राजस्व अधिकारी, ग्राम पंचायत अधिकारी और सहायक कृषि अधिकारी खेतों पर जाकर सर्वे कर रहे हैं। यह प्रक्रिया 3 नवंबर को आखिरी दौर में पहुंची। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र से अतिरिक्त मदद मिल सके, इसके लिए 38 गांवों में कृषि विभाग की तरफ से 'ग्राउंड टूथिंग' यानी प्रत्यक्ष सत्यता जांच का काम भी तेजी से चल रहा है।

नुकसान झेल रहे महाड के किसान सुरेश लाड ने कहा कि अगर फसल काटकर भी अनाज नहीं मिलना है, तो कटाई का खर्च कहां से निकलेगा। जानवरों के लिए पुआल मिलने की भी उम्मीद नहीं है। इसलिए पिछले साल के मापदंड पर मामूली मदद नहीं चाहिए। सरकार हमारे असली नुकसान को देखकर भरपाई दे।

सर्वे के लिए किसानों ने खसरा-खतौनी की नकल, फार्मर आईडी और बैंक पासबुक की जानकारी प्रशासन को दी है। सर्वे के आदेश मदद व पुनर्वास विभाग के 28 अक्टूबर 2026 के परिपत्र के मुताबिक दिए गए। ग्राउंड टूथिंग की रिपोर्ट से राज्य सरकार के साथ केंद्र सरकार से भी मदद मिलने का रास्ता आसान हो सकता है।

किसानों की मांगें तीन हैं। पहली, कम मदद के बजाय फसल के असली नुकसान का आकलन करके ठीक भरपाई दी जाए। दूसरी, अनाज के साथ जानवरों के चारे यानी पुआल का सवाल गंभीर हो गया है, इसलिए खास आर्थिक पैकेज घोषित किया जाए। तीसरी, खेत का पूरा नुकसान हो चुका है, इसलिए फसल कटाई का खर्च माफ किया जाए या सरकार उसे भर दे।

#नागपुर#शहर#PT24#Civic#Nagpur

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप 'आप' पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे