कोर्ट की सख्ती के बाद नागपुर मनपा ने 231 स्वास्थ्य कर्मियों को पक्का करने का प्रस्ताव भेजा
बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच में अवमानना कार्रवाई की चेतावनी के बाद मनपा प्रशासन हरकत में आया और 231 पात्र स्वास्थ्य कर्मियों के नियमितीकरण का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजने का आश्वासन दिया।
नागपुर मनपा में लंबे समय से नर्स यानी स्वास्थ्य कर्मचारी के तौर पर काम कर रहे धरती मोरे और अन्य कर्मचारियों को नियमित नहीं किया गया था। इसी को लेकर इन कर्मचारियों की ओर से बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच में याचिका दायर की गई थी। इस याचिका पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने मनपा को अवमानना कार्रवाई की चेतावनी दे दी, जिसके बाद महानगरपालिका प्रशासन एकदम हरकत में आ गया।
इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सोमवार को हुई सुनवाई में मनपा की तरफ से पैरवी कर रहे अधि. जेमीनी कासट ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि 24 घंटे के भीतर ही 231 पात्र कर्मचारियों के नियमितीकरण का प्रस्ताव राज्य सरकार के पास भेज दिया जाएगा।
सुनवाई के दौरान अधि. कासट ने अदालत के सामने कहा कि नियमितीकरण के फैसले को लागू करने पर अंतिम निर्णय जल्द ही लिया जाएगा। इस जवाब पर हाई कोर्ट ने कड़ा सवाल खड़ा किया और पूछा कि आखिर 'जल्द ही' से मनपा प्रशासन का मतलब क्या है और इसमें अभी कितना समय और लगेगा।
इसके बाद मनपा के वकील ने महानगरपालिका के सामान्य प्रशासन विभाग के सहायक आयुक्त श्याम कापसे से निर्देश लिए। कापसे ने कोर्ट को बताया कि इससे जुड़ा डेटा तैयार करने और पूरी प्रक्रिया निपटाने के लिए नागपुर मनपा को 7 दिन का वक्त चाहिए होगा।
जब अदालत ने समयसीमा को लेकर और सवाल पूछे, तो स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सा अधिकारी डॉ. दीपक सेलोकर से भी निर्देश लिए गए। डॉ. सेलोकर उस दिन खुद कोर्ट में मौजूद थे। उन्होंने अदालत को साफ-साफ बताया कि फैसले की शर्तों के मुताबिक कुल 231 कर्मचारी नियमितीकरण पर विचार के लिए पात्र पाए गए हैं।
डॉ. सेलोकर ने अदालत को यह भरोसा भी दिलाया कि इन 231 पात्र कर्मचारियों का प्रस्ताव उसी दिन यानी सोमवार को ही राज्य सरकार को भेज दिया जाएगा। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने इस बात पर खास जोर दिया कि मनपा अधिकारियों की इस देरी और ढिलाई को न्यायालय की अवमानना अधिनियम, 1971 के प्रावधानों के तहत देखा जा रहा है। हाई कोर्ट की तरफ से अवमानना कानून के तहत कार्रवाई का साफ इशारा मिलने के बाद ही अधिकारियों को इस मामले की गंभीरता का अहसास हुआ।