कोजागिरी पौर्णिमा 25 अक्टूबर को, चांदनी में खीर रखने की परंपरा क्या है
इस साल कोजागिरी पौर्णिमा रविवार, 25 अक्टूबर को है। इस रात चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने की परंपरा और उसके पीछे की मान्यताओं की जानकारी।
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इस साल कोजागिरी पौर्णिमा रविवार, 25 अक्टूबर को पड़ रही है। इसे शरद पौर्णिमा भी कहा जाता है। हिंदू धर्म में कोजागिरी पौर्णिमा को खास अहमियत दी गई है। धार्मिक श्रद्धा के मुताबिक इस दिन की रात बेहद पुण्यवान मानी जाती है।
कहा जाता है कि पौर्णिमा की रात चंद्रमा पूर्ण होता है। इसी वजह से इस दिन खुले आसमान के नीचे खीर रखने का खास महत्त्व बताया गया है। चंद्रमा को खीर का नैवेद्य दिखाने के पीछे क्या कारण और परंपराएं हैं, यह जानना दिलचस्प है।
ज्योतिषशास्त्रज्ञ पिनाकी मिश्रा के मुताबिक कोजागिरी पौर्णिमा की रात खीर को चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। लोकमान्यता है कि इस रात चंद्रमा की अमृत जैसी किरणें खीर को खास गुण दे देती हैं। इसलिए खीर को रात भर चांदनी में रखा जाए और अगले दिन सुबह स्नान करके प्रसाद के तौर पर खाई जाए।
पिनाकी मिश्रा के अनुसार भारतीय धार्मिक परंपरा में चंद्रमा को शीतलता, मन और अमृत का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं में चंद्रमा की किरणें अमृत जैसी होती हैं। कोजागिरी पौर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी सोलहों कलाओं में पारंगत होता है, और इसीलिए वह अपनी किरणों से अमृत की बारिश करता है।
धार्मिक श्रद्धा के मुताबिक भगवान कृष्ण ने कोजागिरी पौर्णिमा की रात वृंदावन में गोपिकाओं के साथ महारस किया था। इसी वजह से यह रात भक्ति और प्रेम की प्रतीक मानी जाती है। कई वैष्णव परंपराओं में यह दिन खास पूजा और भजनों के साथ मनाया जाता है।
दूसरी तरफ, चांदनी में खीर रखने को लेकर कोई ठोस वैज्ञानिक सबूत मौजूद नहीं है। चंद्रमा की रोशनी सूरज की रोशनी का ही एक रूप है, और उसमें खीर रखने से उसे कोई खास औषधीय गुण या अमृत मिल जाता है, इसका प्रमाण नहीं है। ठंडी रात में रखने से खीर का तापमान जरूर कम हो जाता है।
दूध की खीर को रात भर खुले में रखना सेहत के लिए खतरनाक भी हो सकता है, क्योंकि उसमें धूल, कीड़े और सूक्ष्म जंतु घुस सकते हैं। इसलिए खास सावधानी रखें और धूल या दूसरी गंदगी अंदर न जाए, इसके लिए खीर को हल्के कपड़े और छलनी से ढककर रखें।
धर्म, ज्योतिष, वास्तु और फेंगशुई जैसे विषयों की ऐसी जानकारी सिर्फ पाठकों की जानकारी के लिए है। इससे जुड़ा कोई भी प्रयोग करने से पहले जानकारों की सलाह जरूरी है।
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