पितृपक्ष में मराठवाड़ा की परंपरा से बनाएं साबुत गेहूं की खीर, ये टिप्स आएंगे काम
भाद्रपद के कृष्ण पक्ष में श्राद्ध के दिन खपली गेहूं की खीर नैवेद्य के लिए बनाई जाती है। यहां उसकी रेसिपी है।
भाद्रपद महीने में कृष्ण पक्ष शुरू होने के बाद पूर्वजों को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है। इस दौर को पूर्वजों के स्मरण के लिए बहुत पवित्र माना जाता है। श्राद्ध के दिन पूर्वजों की पसंद के सात्त्विक और पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं।
इन पकवानों में चावल की खीर, गेहूं की खीर, वड़े, मिक्स सब्जियां और दाल-चावल जैसी कई चीजें शामिल हैं। महाराष्ट्र और मराठवाड़ा के कई हिस्सों में नैवेद्य के लिए खपली गेहूं की खीर बनाई जाती है। पारंपरिक स्वाद की यह खीर शरीर के लिए भी फायदेमंद बताई गई है।
गेहूं को पकाकर उसमें दूध और गुड़ डालकर खीर तैयार की जाती है, जो खाने में बहुत बढ़िया लगती है। लेकिन दूध डालने के बाद खीर फट जाने का डर अक्सर मन में बना रहता है। यह खीर खासतौर पर मराठवाड़ा, खानदेश, पश्चिम महाराष्ट्र और कर्नाटक में बनाई जाती है। महाप्रसाद या श्राद्ध के भोजन में बनने वाले पकवानों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। अब जानते हैं रेसिपी।
साहित्य के तौर पर गेहूं, गुड़, दूध, इलायची पाउडर, काजू, खोपरे के टुकड़े, घी, खसखस, सौंफ पाउडर और सोंठ पाउडर लगते हैं।
सबसे पहले गेहूं को पानी से साफ धो लें। तीन बार धोने के बाद पानी निकाल दें और गेहूं को सूखने के लिए सूती कपड़े पर रख दें।
गेहूं सूख जाए तो उसे खलबत्ते में डालकर मोटा-मोटा कूट लें। इससे उसके ऊपर का छिलका निकल जाएगा।
अब कुकर के बर्तन में खपली गेहूं और जरूरत के हिसाब से पानी डालें। गेहूं नरम होने तक 5 से 6 सीटी आने दें, ताकि गेहूं अच्छी तरह गल जाए। गेहूं पक जाने के बाद उसमें अपनी पसंद के मुताबिक गुड़ डालकर अच्छे से मिला लें।
फिर कढ़ाई में घी गरम करें और उसमें काजू और खोपरे के टुकड़े हल्के लाल होने तक भून लें। भूनने से पकवान का स्वाद अच्छा आता है। भुना हुआ यह सामान खीर में डालकर मिला दें। उसके बाद सोंठ पाउडर, सौंफ पाउडर, इलायची पाउडर और जायफल पाउडर डालकर फिर मिलाएं।
खीर को धीमी आंच पर 10 मिनट तक उबाल आने दें, फिर गैस बंद कर परोसें। पारंपरिक तरीके से बनी खपली गेहूं की खीर तैयार है।