खाद्य सुरक्षा नियमों पर महाराष्ट्र सरकार ने FSSAI को हाईकोर्ट में घसीटा
महाराष्ट्र सरकार ने खाद्य सुरक्षा नियमों और उनके अमल को लेकर केंद्र सरकार और FSSAI के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। मामले की अगली सुनवाई 26 नवंबर को होगी।
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मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने खाद्य सुरक्षा के नियमों और उन्हें लागू करने के तरीके को लेकर केंद्र सरकार और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। राज्य का आरोप है कि केंद्रीय प्राधिकरण ने खाद्य सुरक्षा कानून में राज्य के अधिकारियों को जो ताकत दी गई थी, उसके बराबर एक अलग सिस्टम खड़ा कर दिया है। इससे राज्य की नियामक भूमिका पर असर पड़ रहा है।
यह याचिका राज्य के खाद्य सुरक्षा आयुक्त के जरिए दायर की गई है। इसमें खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत बने नियामकीय ढांचे में हुए बदलावों को चुनौती दी गई है। महाराष्ट्र सरकार ने मांग की है कि विवादित प्रावधान रद्द किए जाएं, कुछ निर्देशों पर रोक लगे और खाने के कारोबारियों के लाइसेंस से जुड़ा रिकॉर्ड राज्य के संबंधित अधिकारियों को सौंपा जाए।
राज्य सरकार का कहना है कि 2006 के कानून का मकसद ही यह था कि खाद्य सुरक्षा नियम लागू कराने की जिम्मेदारी विकेंद्रीकृत व्यवस्था में राज्य के खाद्य सुरक्षा आयुक्त और उनके अधिकारियों के पास रहे। इसमें खाने-पीने के प्रतिष्ठानों का निरीक्षण, लाइसेंस जारी करना और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई करना शामिल है।
याचिका के मुताबिक FSSAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने केंद्रीय लाइसेंसिंग प्राधिकरण और केंद्रीय खाद्य सुरक्षा अधिकारी जैसे पदों के सहारे एक समानांतर प्रशासनिक व्यवस्था तैयार कर ली। राज्य का तर्क है कि मूल कानून में इन पदों और उनकी शक्तियों के लिए काफी कानूनी आधार नहीं है।
राज्य ने यह भी दलील दी है कि केंद्रीय प्राधिकरण का काम खाद्य सुरक्षा के मानक तय करने और आयातित खाद्य पदार्थों से जुड़ी नियामक जिम्मेदारियों तक ही रहना चाहिए। उसके हिसाब से देश के भीतर के खाद्य कारोबारियों की नियमित जांच और स्थानीय स्तर पर कार्रवाई राज्य और स्थानीय अधिकारियों का काम है।
इस झगड़े में FSSAI का 12 मई 2023 का सर्कुलर भी बड़ा मुद्दा है। महाराष्ट्र सरकार के अनुसार, इस निर्देश के तहत केंद्रीय लाइसेंस वाले कारोबारी प्रतिष्ठानों की जांच और उन पर कार्रवाई करने से राज्य के FDA अधिकारियों को रोक दिया गया था। राज्य का कहना है कि इससे स्थानीय अधिकारियों की निगरानी रखने और कार्रवाई करने की ताकत कमजोर हुई। याचिका में इस सर्कुलर पर अंतरिम रोक की मांग की गई है।
राज्य सरकार ने खाद्य कारोबारियों के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस के लिए इस्तेमाल होने वाले फूड सेफ्टी कंप्लायंस सिस्टम (FoSCoS) पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पोर्टल की व्यवस्था की वजह से ज्यादा कारोबारी केंद्रीय लाइसेंसिंग ढांचे में आ गए और राज्य के अधिकारियों की भूमिका सिमट गई। सरकार ने हाईकोर्ट से कहा है कि कारोबारियों के रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस का रिकॉर्ड संबंधित राज्य अधिकारियों को सौंपने का निर्देश दिया जाए।
याचिका में 2011 के लाइसेंसिंग नियमों, 2018 के भर्ती नियमों और 2026 के संशोधित नियमों को चुनौती दी गई है। इसके अलावा, खाद्य कारोबारियों के लाइसेंस के लिए तय कारोबार की सीमा बदलने वाली 10 और 13 मार्च की अधिसूचनाओं पर भी एतराज जताया गया है। राज्य का आरोप है कि इन बदलावों से पहले जरूरी सार्वजनिक आपत्तियां और सुझाव मंगाए ही नहीं गए। संबंधित प्रावधानों की वैधानिकता पर सवाल उठाते हुए सरकार ने अदालत से दखल की मांग की है।
मामले की सुनवाई बॉम्बे हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की खंडपीठ के सामने 26 नवंबर को तय है। अदालत के सामने मुख्य सवाल यह होगा कि खाद्य सुरक्षा कानून के तहत केंद्रीय और राज्य प्राधिकरणों के अधिकारों की हद क्या है, और विवादित नियम व निर्देश मौजूदा कानूनी ढांचे के हिसाब से ठीक हैं या नहीं।
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