कंडला में एस्सार पोर्ट्स बनाएगी नया मल्टी-पर्पज कार्गो टर्मिनल, 61 रुपये प्रति टन रॉयल्टी
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दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी ने टूना टेकरा में ग्रीनफील्ड टर्मिनल के लिए एस्सार पोर्ट्स लिमिटेड को लेटर ऑफ अवॉर्ड दिया।
भारत के पश्चिमी समुद्र तट पर कंडला में स्थित प्रमुख मेगा पोर्ट दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी (डीपीए) ने एस्सार पोर्ट्स लिमिटेड को औपचारिक तौर पर लेटर ऑफ अवॉर्ड दे दिया है। यह लेटर 21 अक्टूबर 2026 को दिया गया। इसके तहत गुजरात के टूना टेकरा में अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड मल्टी-पर्पज कार्गो टर्मिनल बनाया जाएगा।
यह प्रोजेक्ट सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर के आधार पर चलेगा और कंसेशन की अवधि 30 साल की होगी। ग्लोबल प्रतिस्पर्धी बिडिंग में एस्सार पोर्ट्स लिमिटेड ने डीपीए को 61 रुपये प्रति टन रॉयल्टी देने की सबसे ऊंची बोली लगाई और इसी वजह से उसे यह ठेका मिला। टर्मिनल टूना टेकरा में डीपीए के मेगा कंटेनर टर्मिनल के पूर्व में बनेगा, जिसे डीपी वर्ल्ड पीपीपी मॉडल के तहत विकसित कर रही है।
इस मौके पर डीपीए के चेयरमैन सुशील कुमार सिंह (आईआरएसएमई) ने एस्सार पोर्ट्स के ऑपरेटिंग पार्टनर-इन्फ्रास्ट्रक्चर वर्टिकल वी. श्रीनिवासन और चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर आशीष राजगरहिया को लेटर ऑफ अवॉर्ड सौंपा। दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी और एस्सार पोर्ट्स लिमिटेड के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
प्रोजेक्ट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत' के विजन और पोर्ट-आधारित आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने के नजरिए से देखा जा रहा है। कहा गया है कि यह भारत के समुद्री इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, लॉजिस्टिक्स का खर्च घटाने और आयात-निर्यात कारोबार को रफ्तार देने में बेहद अहम साबित होगा।
प्रस्तावित मेगा ग्रीनफील्ड टर्मिनल की सालाना कार्गो हैंडलिंग क्षमता 18.33 मिलियन टन तय की गई है। प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 2,276.06 करोड़ रुपये है। इसमें कंसेशनेयर यानी एस्सार पोर्ट्स 1,552.57 करोड़ रुपये लगाएगी, जबकि डीपीए की तरफ से 723.49 करोड़ रुपये का निवेश होगा। डीपीए आम इस्तेमाल के लिए एक्सेस चैनल, बर्थ पॉकेट्स और टर्निंग सर्कल्स की ड्रेजिंग और एप्रोच रोड जैसी सुविधाएं मुहैया कराएगा।
टर्मिनल में 300-300 मीटर लंबाई के चार बर्थ बनेंगे, यानी कुल लंबाई 1,200 मीटर होगी। यहां 1,70,000 डीडब्ल्यूटी तक के कैप-साइज जहाज संभाले जा सकेंगे और 18 मीटर तक का गहरा ड्राफ्ट मिलेगा। टर्मिनल का कमर्शियल कामकाज 2031 तक शुरू होने की उम्मीद है।
टर्मिनल का विकास और संचालन भारत सरकार की 'ग्रीन पोर्ट पॉलिसी' के मुताबिक और लागू पर्यावरण नियमों का पालन करते हुए होगा। इसमें निर्माण और संचालन के दौरान टिकाऊ तकनीक का इस्तेमाल भी शामिल है।
बताया गया है कि डीपीए के मौजूदा ड्राई कार्गो बर्थ पर अभी 90 प्रतिशत से ज्यादा इस्तेमाल का बोझ है। इस प्रोजेक्ट से यह घटकर 70 प्रतिशत के आदर्श स्तर पर आएगा। बड़े जहाजों के इस्तेमाल से माल ढुलाई और ईंधन का खर्च घटेगा और भारतीय निर्यात की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। प्रोजेक्ट से सीधे और परोक्ष रोजगार के बड़े मौके बनने की बात है, और कच्छ तथा पूरे गुजरात में लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और उनसे जुड़ी सेवाओं को बड़ी राहत मिलेगी।
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