बुधवार, 7 अक्टूबर 2026

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17:57 IST

कैब बुक करते समय स्क्रीन की कीमत और असली बिल में फर्क क्यों, किन खर्चों पर रखें नजर

ऑनलाइन कार बुकिंग में स्क्रीन पर दिखने वाले किराये के अलावा नुकसान, इंधन और चालान जैसे खर्च भी जुड़ सकते हैं।

कैब बुक करते समय स्क्रीन की कीमत और असली बिल में फर्क क्यों, किन खर्चों पर रखें नजर तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

ऑनलाइन बुकिंग करते ही गाड़ी बुक हो जाती है और आपको लेने आ जाती है। कई लोग सामने दिखी पहली गाड़ी तुरंत बुक कर देते हैं। लेकिन अगर आप भी ऐसा करते हैं तो जरा रुकिए। स्क्रीन पर जो कीमत दिखती है और आखिर में जो रकम आप भरते हैं, वे दोनों बराबर हों, यह जरूरी नहीं। गाड़ी लौटाने के बाद नुकसान, ट्रैफिक चालान और इंधन जैसे खर्च आपका पूरा बजट बिगाड़ सकते हैं।

सेल्फ-ड्राइव कार बुक करते समय ग्राहक अक्सर सिर्फ रोज के किराये पर ध्यान देते हैं। जबकि बुकिंग की शर्तों में कई तरह के शुल्क होते हैं, जो खास हालात में लागू होते हैं। हम उन पर ध्यान ही नहीं देते। इसलिए बुकिंग से पहले नियम और शर्तें ध्यान से पढ़ना जरूरी है।

रेव के संस्थापक और सीईओ अनुपम अग्रवाल के मुताबिक ग्राहकों को सबसे पहले यह समझना चाहिए कि कार का बीमा और किराएदार की जिम्मेदारी, ये दो अलग बातें हैं। बुकिंग के समय जो डैमेज वेवर दिया जाता है, वही तय करता है कि नुकसान होने पर ग्राहक को कितनी रकम भरनी पड़ेगी।

अगर कार पर स्क्रैच या कोई और नुकसान हो जाए, तो रकम डैमेज वेवर और लायबिलिटी कैप पर निर्भर करती है। इसलिए बुकिंग से पहले अपनी अधिकतम जिम्मेदारी जरूर देख लें, और यह भी कि किन हालात में वेवर लागू नहीं होगा। मिसाल के तौर पर शराब पीकर गाड़ी चलाने जैसी स्थिति में नुकसान से सुरक्षा नहीं मिल सकती। रेव के मुताबिक मामूली खरोंचों के लिए आम तौर पर शुल्क नहीं लिया जाता।

किराये की अवधि खत्म होने के बाद भी जिम्मेदारी खत्म हो जाए, ऐसा जरूरी नहीं। सफर के दौरान बने ऑटोमैटिक ई-इनवॉइस ग्राहक तक देर से पहुंच सकते हैं। इसके अलावा कुछ कंपनियां इनवॉइस ट्रांसफर करने के लिए प्रशासनिक शुल्क भी ले सकती हैं।

इंधन का खर्च भी बिल बढ़ा सकता है। गाड़ी लौटाते समय टंकी में जरूरी मात्रा में इंधन न हो, तो कंपनी खुद इंधन भरवा सकती है और उसका खर्च ग्राहक से वसूल सकती है। कुछ किराया योजनाओं में इंधन के खर्च के अलावा इंधन भरने की सेवा का अलग शुल्क भी जुड़ा हो सकता है।

गाड़ी किराये पर लेने से पहले डैमेज वेवर, दायित्व की सीमा, अपवाद, रद्द करने का शुल्क, इंधन नीति और ट्रैफिक चालान के नियम जरूर पढ़ें। अगर आपका बुक किया हुआ मॉडल उपलब्ध न हो, तो कंपनी की बदली की नीति समझ लें। कुछ मामलों में उसी सेगमेंट की दूसरी गाड़ी या अपग्रेड वाली गाड़ी दी जा सकती है।

यानी किराये की गाड़ी की असली कीमत सिर्फ ऑनलाइन दिखा किराया नहीं होती। बुकिंग पक्की करने से पहले बारीक अक्षरों में लिखी बातें पढ़ लेंगे, तो बाद में आने वाले बड़े बिल से बच सकते हैं।

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