जूनागढ़ में 20 नवंबर से गिरनार लिली परिक्रमा, लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद
गुजरात के जूनागढ़ में गिरनार लिली परिक्रमा 20 नवंबर की आधी रात से शुरू होगी। कम बारिश से पानी की किल्लत है, इसलिए प्रशासन नए बोरवेल लगा रहा है और बच्चों और बुजुर्गों से सोच-समझकर आने को कहा गया है।
गुजरात के जूनागढ़ में मशहूर गिरनार लिली परिक्रमा इस बार 20 नवंबर से शुरू होगी। उम्मीद है कि इसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होंगे। शुरू होने से पहले गुरुवार को जिला प्रशासन, साधु-संतों और जनप्रतिनिधियों ने परिक्रमा के रास्ते का मुआयना किया। इस दौरान श्रद्धालुओं के लिए पीने के पानी, सुरक्षा और दूसरी सुविधाओं का जायजा लिया गया।
परिक्रमा 20 नवंबर की आधी रात को 12 बजे शुरू होगी और 24 नवंबर तक चलेगी। देश भर से आने वाले श्रद्धालुओं की तादाद को देखते हुए प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। अगले 15 दिनों में रास्ते की सुविधाओं को और मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
वन विभाग ने जो रास्ता तैयार किया है, उसे प्रशासन और साधु-संतों ने देखा। इस मौके पर रास्ते की व्यवस्था को लेकर संतोष जताया गया। पिछले साल भारी बारिश की वजह से परिक्रमा रद्द करनी पड़ी थी। इस बार बारिश कम हुई है, तो अब दूसरी तरह की चुनौतियां सामने आ गई हैं।
हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक गिरनार के जंगल में प्लास्टिक ले जाने पर रोक है। इसलिए श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि परिक्रमा के दौरान प्लास्टिक का इस्तेमाल न करें। जंगल में सूखे पत्ते बड़ी तादाद में हैं, इसलिए धूनी या चूल्हा जलाते समय खास सावधानी बरतने को भी कहा गया है।
संत इंद्रभारती बापू ने बताया कि प्रशासन, साधु-संत, सांसद, विधायक और दूसरे पदाधिकारियों ने मिलकर परिक्रमा के रास्ते का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि इस साल बारिश कम होने से कई बोरवेल सूख गए हैं और पानी की थोड़ी कमी महसूस हो रही है।
जिलाधिकारी योगेश चौधरी ने कहा कि इस साल बारिश पिछले सालों के मुकाबले कम रही है। इस वजह से इलाके में नदियां और जमीन के ऊपर के पानी के स्रोत उपलब्ध नहीं हैं। श्रद्धालुओं को पीने के पानी की दिक्कत न हो, इसके लिए प्रशासन नए बोरवेल की व्यवस्था कर रहा है।
प्रशासन ने परिक्रमा के लिए गुजरात के आसपास के जिलों के साथ दूसरे राज्यों के श्रद्धालुओं को भी न्योता दिया है। हालांकि पानी की कमी और बढ़ते तापमान को देखते हुए जिलाधिकारी ने अपील की है कि छोटे बच्चे और बुजुर्ग इस साल की परिक्रमा में आने से बचें या उसे आगे के लिए टाल दें।
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