जियोफाइनेंस ऐप पर एक जगह देखें अलग-अलग फिक्स्ड डिपॉजिट की दरें
जियोफाइनेंस ऐप पर एफडी की दरें, अवधि और जारीकर्ता की जानकारी एक जगह देखी जा सकती है।
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बचत का पैसा कहां रखें, यह तय करते वक्त सुरक्षा और कमाई दोनों देखनी पड़ती है। सेविंग्स अकाउंट में पैसा जब चाहें निकाल सकते हैं, लेकिन फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी में चुनी हुई अवधि के लिए तय ब्याज दर मिल सकती है। दिक्कत यह है कि सही दर और अवधि वाली एफडी ढूंढने के लिए कई बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को अलग-अलग खंगालना पड़ता है।
ऐसा प्लेटफॉर्म जो अलग-अलग एफडी विकल्प एक जगह ले आए, यह काम आसान कर सकता है। ब्याज दरें, अवधि और जारीकर्ता की जानकारी एक ही जगह देखकर आप अपनी जरूरत के हिसाब से एफडी चुन सकते हैं।
पहले एफडी खुलवाने के लिए अक्सर ब्रांच जाना पड़ता था, फॉर्म भरने पड़ते थे और कागज की रसीदें संभालकर रखनी पड़ती थीं। ऑनलाइन एफडी में इनमें से कई काम ऐप से हो सकते हैं। पारंपरिक तरीके में अकाउंट खोलने के लिए ब्रांच जाना और कागजी फॉर्म भरना होता है, जबकि ऑनलाइन तरीके में आवेदन और वेरिफिकेशन ऑनलाइन होता है। दरों की तुलना के लिए पहले अलग-अलग बैंक देखने पड़ते थे, अब एक जगह देख सकते हैं। रसीदों का हिसाब रखने की जगह ऐप में जमा रकम देखी जा सकती है। अवधि के विकल्प पहले संस्था की पेशकश पर निर्भर थे, अब उपलब्ध विकल्पों में से चुन सकते हैं।
एफडी खुलवाने से पहले ब्याज दर, अवधि, जारीकर्ता और पेआउट का तरीका देखना चाहिए। स्मॉल फाइनेंस बैंक और NBFC की दरें और शर्तें अलग हो सकती हैं। कुछ स्मॉल फाइनेंस बैंक एफडी पर अच्छी ब्याज दर देते हैं। डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) लागू नियमों के तहत पात्र बैंक जमा पर हर जमाकर्ता के लिए हर बैंक में 5 लाख रुपये तक का बीमा देता है। कुछ NBFC अपनी एफडी दरों के साथ AAA और AA+ जैसी क्रेडिट रेटिंग भी बताती हैं। ये रेटिंग मान्यता प्राप्त क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां देती हैं और इनसे निवेशक जारीकर्ता की क्रेडिट स्थिति समझ सकते हैं।
पेआउट के भी दो तरीके हैं। क्यूमुलेटिव एफडी में ब्याज मैच्योरिटी तक दोबारा निवेश होता रहता है। नॉन-क्यूमुलेटिव एफडी में प्रोडक्ट के हिसाब से ब्याज हर महीने या हर तिमाही जैसे अंतराल पर मिल सकता है।
ऑनलाइन एफडी खोलने के चार आसान कदम हैं। पहले उपलब्ध एफडी की ब्याज दर, जारीकर्ता और अवधि देखें। फिर जरूरी जानकारी देकर ऑनलाइन वेरिफिकेशन पूरा करें। इसके बाद पेआउट चुनें: ब्याज मैच्योरिटी तक निवेश में रखना हो तो क्यूमुलेटिव, और बीच-बीच में ब्याज चाहिए तो नॉन-क्यूमुलेटिव, जहां यह उपलब्ध हो। आखिर में उपलब्ध तरीके से भुगतान करें और एफडी की पुष्टि डिजिटल रूप में पाएं।
एफडी की रणनीति सिर्फ ऊंची ब्याज दर ढूंढने तक सीमित नहीं है। निवेश आपकी नकदी, आमदनी और टैक्स प्लानिंग की जरूरत से भी मेल खाना चाहिए। पूरी रकम एक ही एफडी में लगाने के बजाय उसे अलग-अलग अवधि में बांटा जा सकता है, जैसे एक साल, दो साल और तीन साल की एफडी। इससे अलग-अलग समय पर पैसा हाथ में आ सकता है। सीनियर सिटीजन को पात्र एफडी पर अतिरिक्त ब्याज मिल सकता है, जो जारीकर्ता के हिसाब से बदलता है, इसलिए निवेश से पहले शर्तें देख लें। 5 साल की टैक्स-सेविंग एफडी लागू टैक्स नियमों और शर्तों के तहत टैक्स लाभ के लायक हो सकती है, लेकिन उसमें पांच साल का लॉक-इन रहता है। अवधि उस वक्त के हिसाब से चुनें जब पैसे की जरूरत पड़ सकती है, और छोटी अवधि के खर्चों के लिए जरूरी रकम फंसाकर न रखें।
निवेश से पहले न्यूनतम जमा रकम, मैच्योरिटी की अवधि, ब्याज पेआउट कितने अंतराल पर होगा और समय से पहले निकासी के नियम जरूर देखें। यह भी जांचें कि बताई गई दर पूरी अवधि पर लागू है या नहीं और सीनियर सिटीजन को लाभ मिलता है या नहीं। बैंक और NBFC की एफडी की तुलना करते हुए जारीकर्ता की जानकारी और शर्तें ध्यान से पढ़ें।
कुल मिलाकर एफडी चुनना सिर्फ सबसे ऊंची ब्याज दर देखने का मामला नहीं है। जारीकर्ता, अवधि, पेआउट का विकल्प और अपनी वित्तीय जरूरतें देखकर फैसला करें। जियोफाइनेंस सेवा एफडी के विकल्प एक जगह लाती है, जिससे निवेश तय करने से पहले दरें और शर्तें परखी जा सकती हैं।
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