सोम‌वार, 19 अक्टूबर 2026

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09:14 IST

जीएसटी के 9 साल बाद नई रणनीति: डेटा और खुफिया जानकारी पर कार्रवाई, कारोबारियों से सीधी बात

जीएसटी लागू हुए 9 साल पूरे होने पर केंद्र सरकार टैक्स वसूली बढ़ाने का तरीका बदल रही है। नागपुर में सीबीआईसी के अध्यक्ष और सदस्य ने कारोबारियों से फीडबैक लिया।

जीएसटी के 9 साल बाद नई रणनीति: डेटा और खुफिया जानकारी पर कार्रवाई, कारोबारियों से सीधी बात तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

जीएसटी को लागू हुए 9 साल पूरे हो गए हैं और अब केंद्र सरकार ने टैक्स वसूली बढ़ाने के अपने तरीके में बदलाव के संकेत दिए हैं। टैक्स चोरी पकड़ने के लिए कारोबारियों पर सीधी कार्रवाई करने या बेवजह दबाव डालने के बजाय अब डेटा एनालिसिस और खुफिया जानकारी के आधार पर कदम उठाने के निर्देश केंद्र और राज्य के जीएसटी अधिकारियों को दिए गए हैं।

सरकार का कहना है कि टैक्स वसूली में अभी 14-15 फीसदी की बढ़ोतरी हो रही है और यह एक स्थिर स्तर पर पहुंच गई है। इसलिए सरकार की राय में राजस्व बढ़ाने का अगला रास्ता यही है कि ज्यादा से ज्यादा करदाताओं को टैक्स के दायरे में लाया जाए। कारोबार और उद्योग जगत की दिक्कतें, सुझाव और उम्मीदें जानने के लिए जीएसटी नागपुर जोन ने एक फीडबैक बैठक रखी थी।

बैठक में केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीआईसी) के अध्यक्ष विवेक चतुर्वेदी और सदस्य संजय मंगल ने कारोबारियों और उद्योगपतियों से सीधे बात की। शहर के प्रमुख उद्योगपति, व्यापारी और अलग-अलग संगठनों के पदाधिकारी इसमें शामिल हुए। नागपुर जोन के मुख्य आयुक्त संदीप पुरी और अपर आयुक्त मुकुल पाटील भी मौजूद थे। चतुर्वेदी ने कहा कि अब टैक्स व्यवस्था को और बढ़ावा देने की नीति है। कानून जितना आसान होगा, उतने ज्यादा लोग अपनी मर्जी से टैक्स व्यवस्था में शामिल होंगे।

संजय मंगल ने बताया कि आयकर विभाग की "प्रेम से नियम का पालन करने के लिए प्रेरित करना" वाली सोच के हिसाब से जीएसटी विभाग भी अब काम करेगा। अधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि वे कारोबारियों के रोजमर्रा के कामकाज में बेवजह दखल न दें। अधिकारी करदाताओं को रास्ता दिखाने और उनकी दिक्कतें सुलझाने वाले "मददगार" के तौर पर काम करेंगे। बैठक में प्रशांत मोहता, मालपानी निर्भय संचेती, अजय गुप्ता, दीपेन अग्रवाल, शशिकांत कोठारकर, किशोर मालवीय, जुल्फेश शाह, स्वप्निल अहिरकर और हेमंत सारडा मौजूद थे।

जीएसटी में प्रस्तावित बदलावों में गिरफ्तारी के प्रावधान को लेकर राहत की बात है। जीएसटी कानून के तहत गिरफ्तारी का प्रावधान रद्द करने की सिफारिश की गई है। मुकदमा चलाने की न्यूनतम सीमा 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये की गई है। जुर्माने की रकम घटाई गई है और न्यूनतम सजा को अनिवार्य करने वाला प्रावधान हटा दिया गया है।

जिन मामलों में कोई खास जुर्माना तय नहीं है, उनमें सामान्य जुर्माना 25,000 रुपये से सीधे 10,000 रुपये कर दिया गया है। रिफंड की प्रक्रिया भी तेज की जा रही है। रिफंड दावे की रसीद देने की मियाद 15 दिन से घटाकर 10 दिन कर दी गई है। जोखिम आधारित मूल्यांकन की प्रक्रिया में रसीद मिलने के बाद 3 कामकाजी दिन में 90 फीसदी पात्र रिफंड दावों को मंजूरी देकर रिफंड ऑर्डर जारी किया जाएगा।

अब चर्चा टैक्स की दरों पर नहीं, प्रक्रिया पर हो रही है। जीएसटी रजिस्ट्रेशन से लेकर रिफंड मिलने तक की प्रक्रिया को आसान बनाने पर जोर दिया जा रहा है। काउंसिल ने भी कारोबारियों की इन उम्मीदों को ध्यान में रखा है। देशभर के व्यापारियों और उद्योग क्षेत्र के प्रतिनिधियों से बात करके सुझाव लिए जा रहे हैं। मिले सुझावों का अध्ययन करके 3 महीने में रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसके बाद सुधार की प्रक्रिया को और रफ्तार दी जाएगी।

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