जीई एरोस्पेस 2030 तक भारत में सप्लायर खर्च लगभग दोगुना करेगी
जीई एरोस्पेस ने 2025 से 2030 के बीच भारत में देशी आपूर्तिकर्ताओं पर होने वाला खर्च लगभग दोगुना करने की योजना घोषित की है।
जीई एरोस्पेस (NYSE:GE) ने भारत में बढ़ती हवाई यात्रा की मांग और विमानन उद्योग में अपनी अगुवाई को सहारा देने के लिए बड़ा ऐलान किया है। कंपनी 2025 से 2030 के बीच देश के अंदर अपने सप्लायर स्पेंड यानी देशी सप्लायरों पर होने वाले खर्च को लगभग दोगुना करेगी।
यह घोषणा अर्न्स्ट एंड यंग (ईवाय) की तैयार की हुई नई रिपोर्ट 'पॉवरिंग प्रोग्रेस: जीई एरोस्पेस इकॉनॉमिक इम्पैक्ट इन इंडिया' के जारी होने के साथ की गई। रिपोर्ट जीई एरोस्पेस के आयोजित उद्योग जगत के प्रमुखों के जमावड़े 'इंडिया टेकिंग फ्लाइट - एविएशन, इनोवेशन एंड द रोड टू विकसित भारत 2047' में पेश की गई। कमर्शियल एविएशन, डिफेंस, मैन्युफैक्चरिंग और इंजीनियरिंग क्षेत्रों पर भारत में जीई एरोस्पेस के चार दशक के असर का यह पहला व्यापक आकलन है।
रिपोर्ट के मुताबिक भारत की घरेलू कमर्शियल एयरलाइंस ने वित्त वर्ष 2026 में करीब 19 अरब अमेरिकी डॉलर का राजस्व कमाया। जीई एरोस्पेस एडवांस्ड इंजन टेक्नोलॉजी और ऊंचे दर्जे की भरोसेमंदी व ऑपरेशनल परफॉर्मेंस के जरिए उस विमानन इकोसिस्टम को जरूरी कनेक्टिविटी और कार्यक्षमता देने में मदद करती है, जो करीब 3,70,000 सीधे रोजगारों को सहारा देता है।
रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर 2025 तक 1,400 से ज्यादा इंजनों के बेड़े के साथ जीई एरोस्पेस और कंपनी के साझेदारों* के बनाए कमर्शियल इंजन भारत की ज्यादातर कमर्शियल एयरलाइंस के ऑपरेशन्स को ताकत देते हैं। इन इंजनों ने भारतीय एयरलाइनों को दुनिया में सबसे ऊंचा 88.2 प्रतिशत पैसेंजर लोड फैक्टर और रोजाना 12 से 14 घंटे विमान इस्तेमाल का रेट दर्ज करने में मदद की, जो वैश्विक आंकड़ों से काफी आगे है।
जीई एरोस्पेस के दक्षिण एशिया के सीईओ विक्रम राय ने कहा, "भारत की कमर्शियल एविएशन ग्रोथ दुनिया में सबसे तेज रफ्तार वाली बढ़तों में से एक है, और आज की यह रिपोर्ट दिखाती है कि यहां हमारी प्रतिबद्धता सिर्फ इंजन बेचने तक सीमित नहीं है।" उन्होंने कहा, "यह प्रतिबद्धता पुणे में मशीनिंग होने वाले पुर्जों में, बेंगलुरु के इनोवेशन में और भारत के एयरोस्पेस उद्योग की अगली पीढ़ी गढ़ने वाले हमारे भरोसेमंद ग्राहकों में बसी है। भारत जब अपनी 'विकसित भारत' की महत्वाकांक्षाओं की ओर बढ़ रहा है, तब सप्लाई चेन इकोसिस्टम की बढ़त के लिए हमारा खर्च दोगुना करना बढ़ती मांग पूरी करने में मदद करेगा।"
भारत सरकार के अनुमान के मुताबिक सालाना घरेलू यात्री ट्रैफिक वित्त वर्ष 2026 के 340 मिलियन से बढ़कर 2040 तक 1.1 अरब पर पहुंचने का अंदाजा है। वहीं 2047 तक हवाई अड्डों की संख्या 163 से बढ़कर 350 से ज्यादा होनी है। इस मांग को पूरा करने के लिए भारत और दक्षिण एशिया को 2044 तक 3,300 अतिरिक्त विमान या 6,600 अतिरिक्त इंजन चाहिए होंगे।
जुलाई 2026 में इंडिगो ने 510 एयरबस ए320नियो फैमिली विमानों को ताकत देने के लिए 1,000 से ज्यादा एलईएपी-1ए इंजनों के ऑर्डर को लेकर सीएफएम इंटरनेशनल के साथ समझौता ज्ञापन का ऐलान किया। यह एलईएपी इंजनों के लिए अब तक का सबसे बड़ा एकल ऑर्डर और सीएफएम इंटरनेशनल के लिए रिकॉर्ड है। इसमें इंडिगो की आने वाली इंजन एमआरओ सुविधा बनाने में सहयोग भी शामिल है। भारतीय एयरलाइनों के पहले से ऑर्डर किए करीब 1,500 नए विमानों में से ज्यादातर को जीई एरोस्पेस और उसके साझेदारों के इंजन ताकत देंगे, ऐसी उम्मीद है। रिपोर्ट के अनुसार भारत के मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल उद्योग के लिए यह मौका 5.5 अरब अमेरिकी डॉलर से ज्यादा का है।
पुणे में जीई एरोस्पेस का मुख्य प्लांट शुरुआती 200 मिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश से बनाया गया था। 2024 से कंपनी ने ऑटोमेशन बढ़ाने, प्रिसीजन मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने और मैनपावर डेवलपमेंट के लिए करीब 55 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश किया है। इस निवेश से भारत में कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता मजबूत हुई है। उसे छोटे और मध्यम उद्योगों समेत 17 प्रमुख घरेलू साझेदारों और पुणे प्रोजेक्ट वाले व्यापक सप्लायर नेटवर्क का सहारा मिला है।
जीई एरोस्पेस ने 2025 में इस घरेलू सप्लाई चेन पर करीब 200 मिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च किए। कंपनी की बढ़ती मांग पूरी करने के लिए 2030 तक यह निवेश दोगुना करने की योजना है। 2015 से पुणे प्लांट के अप्रेंटिसशिप कार्यक्रम से करीब 5,000 प्रोडक्शन सहयोगी ग्रेजुएट हुए हैं, और हर साल 400 से 500 नए अप्रेंटिस भर्ती किए जाते हैं। बेंगलुरु में इंजीनियरिंग टैलेंट डेवलपमेंट प्रोग्राम और अकादमिक रिसर्च साझेदारियां चल रही हैं, जिनमें आईआईटी मद्रास के साथ स्थानीय स्तर पर डिजाइन और तैयार किया गया माइक्रो टर्बोमशीन विकसित करने वाला प्रमुख संयुक्त इनोवेशन प्रोजेक्ट भी शामिल है।
रक्षा क्षेत्र में 1986 से कंपनी ने एलएम2500 नौसैनिक इंजनों और भारत के तेजस एमके1 हल्के लड़ाकू विमान को ताकत देने वाले एफ404-आईएन20 इंजनों के लिए हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के साथ सहयोग किया है। इस प्लेटफॉर्म के 4,000 से ज्यादा इंजन 16 देशों में चल रहे हैं। अंतिम करार और मंजूरियों के अधीन, 2023 का समझौता ज्ञापन तेजस एमके2 प्रोग्राम के लिए एफ414 इंजनों के संभावित घरेलू उत्पादन को शामिल करता है। जीई एरोस्पेस ने अपाचे हेलीकॉप्टर इंजनों के लिए भारतीय वायुसेना के साथ पांच साल का परफॉर्मेंस बेस्ड लॉजिस्टिक्स करार किया है, और एफ404-आईएन20 इंजनों के लिए देश में डेपो सुविधा बनाने का अलग करार भी किया है।
बेंगलुरु टेक्नोलॉजी सेंटर साल 2000 में 200 मिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश से बना था और अमेरिका के बाहर इस तरह का पहला रिसर्च और इंजीनियरिंग सेंटर था। तब से इसने 1,000 से ज्यादा एविएशन पेटेंट हासिल किए हैं और दुनिया के सबसे ताकतवर जेट इंजन जीई9एक्स के डिजाइन, विकास और सर्टिफिकेशन में अहम योगदान दिया है। यहां के इंजीनियरों पर जीई90, जीपी7200, जीईएनएक्स और जीई9एक्स इंजनों के प्रमुख डिजाइन की जिम्मेदारी है। वे सीएफएम राइज** प्रोग्राम में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं, जिसका लक्ष्य टिकाऊपन की ग्राहक अपेक्षाओं को पूरा करते हुए ईंधन कार्यक्षमता में 20 प्रतिशत सुधार करना है। सेंटर की डिजिटल टेक्नोलॉजी टीम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस्तेमाल से जीई एरोस्पेस की ग्लोबल सप्लाई चेन, एमआरओ और सेल्स ऑपरेशन्स को सहारा देती है।