इथेनॉल खरीद पर रोक से चीनी उद्योग परेशान, हर्षवर्धन पाटील ने केंद्र से रोक हटाने को कहा
केंद्र सरकार ने गन्ने के रस, शुगर सिरप और बी-हेवी मोलासेस से बनने वाले इथेनॉल की खरीद पर आपूर्ति वर्ष 2026-27 के लिए रोक लगाई है।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
बावडा: केंद्र सरकार ने चीनी कारखानों में गन्ने के रस, शुगर सिरप और बी-हेवी मोलासेस से बनने वाले इथेनॉल की खरीद पर आपूर्ति वर्ष 2026-27 के लिए रोक लगा दी है। इससे कारखानों को इथेनॉल से मिलने वाली कमाई घटेगी, और इसी वजह से चीनी उद्योग के मुश्किल में आने का डर है। यह चिंता राष्ट्रीय सहकारी साखर कारखाना महासंघ, नई दिल्ली के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री हर्षवर्धन पाटील ने जताई है।
पाटील ने कहा कि इस फैसले के पीछे का मकसद देश के अंदर चीनी की उपलब्धता बढ़ाना बताया जा रहा है। इसी वजह से तेल कंपनियों की तरफ से कारखानों के गन्ने के रस, शुगर सिरप और बी-हेवी मोलासेस से बने इथेनॉल की खरीद बंद कर दी गई है। फैसले में यह भी लिखा गया है कि कारखानों में बनने वाले सी-हेवी मोलासेस से तैयार इथेनॉल की खरीद चालू रहेगी।
लेकिन पाटील के मुताबिक सी-हेवी मोलासेस का रेट बहुत कम है, सिर्फ 57.97 रुपये प्रति लीटर। इसी वजह से चीनी कारखाने मुश्किल में फंस गए हैं।
पाटील ने बताया कि केंद्र के इस फैसले का असर कारखानों की आर्थिक योजना पर पड़ेगा। कारखानों के डिस्टिलरी विभाग और उनकी कमाई पर भी असर होगा। महाराष्ट्र में इथेनॉल बनाने में 40 हजार करोड़ रुपये और पूरे देश में 1 लाख करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। फैसले का बुरा असर इथेनॉल उत्पादन पर भी पड़ेगा। पाटील ने कहा कि जिन्होंने इथेनॉल प्रोजेक्ट के लिए कर्ज दिया है, उनकी कर्ज वसूली पर भी इसका असर होगा।
पाटील का कहना है कि इथेनॉल देश की अर्थव्यवस्था को बदलने वाला मुद्दा है, इसलिए इस फैसले से चीनी कारखानों का पूरा आर्थिक गणित बिगड़ जाएगा। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि इथेनॉल खरीद बंद करने का फैसला वापस लिया जाए। साथ ही सी-हेवी मोलासेस का रेट बढ़ाकर 70 रुपये प्रति लीटर किया जाए। यह मांग अध्यक्ष के तौर पर हर्षवर्धन पाटील ने केंद्र सरकार के सामने रखी है।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।