गोंडवाना यूनिवर्सिटी में आचार्य पदवी के लिए पेट परीक्षा की मांग, कुलगुरु को ज्ञापन
गोंडवाना विश्वविद्यालय यंग टीचर्स संगठन ने कुलगुरु डॉ. प्रशांत बोकारे को ज्ञापन देकर पेट परीक्षा का सर्कुलर जल्द निकालने की मांग की है।
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गोंडवाना यूनिवर्सिटी यंग टीचर्स संगठन ने आचार्य पदवी की पात्रता परीक्षा के तौर पर पेट (PET) परीक्षा लेने की मांग की है। इसे लेकर संगठन की तरफ से गोंडवाना यूनिवर्सिटी के कुलगुरु डॉ. प्रशांत बोकारे को ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन देते समय संगठन के अध्यक्ष डॉ. संजय गोरे, सचिव डॉ. विवेक गोर्लावार और उपाध्यक्ष डॉ. विजय वाढई मौजूद थे। इनके साथ संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी डॉ. रामदास कामडी, डॉ. अक्षय धोटे, डॉ. राहुल सावलीकर और दूसरे पदाधिकारी भी आए थे। कुलगुरु ने इस मौके पर भरोसा दिलाया कि पेट परीक्षा का सर्कुलर तुरंत निकाला जाएगा।
संगठन का कहना है कि वह इससे पहले भी आचार्य पदवी के शोध के लिए पेट परीक्षा लेने को लेकर कई बार ज्ञापन दे चुका है। लेकिन प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कार्रवाई होती नजर नहीं आई। इसी वजह से इस बार फिर ज्ञापन देकर कुलगुरु को पेट परीक्षा पर संगठन की भूमिका समझाई गई।
संगठन ने कुलगुरु के सामने यह बात रखी कि मुंबई यूनिवर्सिटी, सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी, रा.तु.म. नागपुर यूनिवर्सिटी और संत गाडगे महाराज अमरावती यूनिवर्सिटी जैसी कई नामी यूनिवर्सिटियां आचार्य पदवी की प्रवेश पात्रता परीक्षा के तौर पर पेट लेती हैं। इससे वहां के विद्यार्थियों को शोध करने का मौका मिलता है। जबकि गोंडवाना यूनिवर्सिटी ने सितंबर 2023 से पेट पात्रता परीक्षा लेना बंद कर रखा है। संगठन के मुताबिक इससे ग्रामीण और आदिवासी बहुल इलाके के गरीब, मेहनती विद्यार्थियों के लिए शोध के दरवाजे बंद हो गए हैं।
संगठन ने यह भी याद दिलाया कि गोंडवाना यूनिवर्सिटी की विद्या परिषद, सीनेट और प्रबंधन परिषद की बैठकों में पेट परीक्षा लेने पर विस्तार से चर्चा हो चुकी है और इसे मंजूरी भी दी जा चुकी है। इसके बावजूद कई महीने बीत गए, पर यूनिवर्सिटी ने पेट परीक्षा का सर्कुलर जारी नहीं किया।
इस वजह से समाज में यह धारणा बन रही है कि गोंडवाना यूनिवर्सिटी पेट परीक्षा को लेकर उदासीन है और ग्रामीण-आदिवासी बहुल इलाके के गरीब, मेहनती विद्यार्थियों को शोध से वंचित रख रही है। संगठन ने साफ कहा है कि अगर ऐसा चलता रहा तो संवैधानिक रास्ते से आंदोलन करके न्याय मांगने के सिवा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
संगठन की मांग है कि आचार्य पदवी की प्रवेश पात्रता परीक्षा के तौर पर पेट परीक्षा लेने के लिए फौरन कार्रवाई की जाए। साथ ही इसका सर्कुलर जल्द से जल्द निकालकर विद्यार्थियों को आचार्य पदवी हासिल करने का मौका दिया जाए।