अस्विनी की मौत ने तोड़ी मनपा की नींद, आधी रात को गरजा बुलडोजर
जनता के गुस्से के आगे झुका मनपा प्रशासन, 25 से ज्यादा अतिक्रमण जमींदोज, हादसे के बाद जागे अधिकारी
नागपुर.
एक महिला की मौत और हजारों नागरिकों के उग्र आंदोलन के बाद आखिरकार मनपा प्रशासन की नींद टूट गई. गोधनी-झिंगाबाई टाकली मार्ग पर सालों से जमे अतिक्रमण पर सोमवार रात बुलडोजर चलाया गया. रात 9 बजे शुरू हुई कार्रवाई में देर रात तक 25 से अधिक अवैध टिन शेड ध्वस्त कर दिए गए. जिस कार्रवाई के लिए नागरिक लंबे समय से गुहार लगा रहे थे, वह एक महिला की जान जाने के बाद ही क्यों हुई, इसे लेकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं.
दरअसल, मंगलवार दोपहर 30 वर्षीय अस्विनी पंकज फलके अपने पति और बेटे के साथ बाइक से जा रही थीं. इसी दौरान तेज रफ्तार टिपर ने उन्हें कुचल दिया. हादसे में उनकी मौत हो गई. घटना के बाद गोधनी परिसर में आक्रोश भड़क उठा. हजारों नागरिक सड़कों पर उतर आए और पुलिस, मनपा तथा एनआईटी प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. गुस्साए लोगों ने घटनास्थल के पास स्थित गारवा बिरयानी पर पथराव भी किया. नागरिकों का आरोप था कि मार्ग पर दुकानदारों ने सड़क और फुटपाथ तक कब्जा कर रखा है. कई दुकानों के सामने छह से सात फीट तक टिन शेड खड़े कर दिए गए हैं. इससे सड़क की चौड़ाई घट गई है और दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है. बार-बार शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की.
आंदोलन के बाद हरकत में आया प्रशासन
आक्रोशित नागरिकों ने रास्ता रोको आंदोलन शुरू कर मनपा आयुक्त और एनआईटी चेयरमैन को मौके पर बुलाने की मांग की थी.अधिकारियों के तत्काल अतिक्रमण हटाने के आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त हुआ था. इसके तुरंत बाद रात 9 बजे बुलडोजर मौके पर पहुंचा और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई। देर रात तक 25 से अधिक टिन शेड जमींदोज कर दिए गए.
एक मौत के बाद दिखी कार्रवाई की ताकत!
इस कार्रवाई ने मनपा प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. नागरिकों का सवाल है कि जब कुछ घंटों में 25 से अधिक अतिक्रमण हटाए जा सकते थे, तो शिकायतों के बावजूद पहले कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा था?
अस्विनी की मौत के बाद बुलडोजर तो चल गया, लेकिन अब असली परीक्षा प्रशासन की है। क्या पूरा मार्ग स्थायी रूप से अतिक्रमण मुक्त रहेगा या कुछ दिनों बाद फिर सड़क पर कब्जे शुरू हो जाएंगे? सवाल सिर्फ अतिक्रमण हटाने का नहीं, बल्कि उस लापरवाही की जवाबदेही तय करने का भी है, जिसके बीच एक परिवार ने अपना सदस्य खो दिया.
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