गोंदिया के कालिमाटी के डॉ. अविनाश मेंढे दुनिया के टॉप 2% वैज्ञानिकों की सूची में
कोरिया यूनिवर्सिटी में रिसर्च प्रोफेसर डॉ. अविनाश मेंढे का नाम स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और एल्सेवियर की 2026 की सूची में आया है।
गोंदिया, 16 अक्टूबर 2026: गोंदिया जिले के कालिमाटी गांव के रहने वाले डॉ. अविनाश चंद्रशेखर मेंढे का नाम 2026 की 'World's Top 2% Scientists' सूची में आया है। यह सूची स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और एल्सेवियर (Elsevier) ने जारी की है। डॉ. मेंढे दक्षिण कोरिया की नामी कोरिया यूनिवर्सिटी (Korea University) में रिसर्च प्रोफेसर के तौर पर काम करते हैं।
इस सूची में जगह मिलने से सिर्फ गोंदिया जिले का ही नहीं, पूरे महाराष्ट्र का नाम ऊंचा हुआ है। गांव के लोग और जिले के लोग इसे बड़े गर्व की बात मान रहे हैं।
डॉ. मेंढे का जन्म कालिमाटी जैसे बहुत छोटे गांव में हुआ। उनकी स्कूली पढ़ाई नगरपालिका के स्कूल में हुई। हालात आसान नहीं थे, फिर भी उन्होंने मेहनत करके अपनी जिंदगी को शक्ल दी। पढ़ाई के दिनों में वे अपने काका भोजराज मेंढे के पास रहे और वहीं रहकर शिक्षा के पाठ पढ़े। उन्होंने अपने काम से यह दिखा दिया कि गरीबी इंसान के हालात तय कर सकती है, लेकिन उसके सपने कितने बड़े हों, यह तय नहीं कर सकती।
किसी कामयाब आदमी के नाम के पीछे कई डिग्रियां दिखती हैं, पर उनके पीछे बड़ा संघर्ष छिपा होता है। डॉ. मेंढे ने अपनी रिसर्च के जरिए दुनिया भर में अपनी पहचान बनाई है।
इस कामयाबी में कई लोगों का हाथ है। काका-काकी का प्यार, त्याग और मार्गदर्शन, माता-पिता का आशीर्वाद, पत्नी का साथ और परिवार का भरोसा इसमें शामिल है। इसके अलावा VNIT नागपुर में उनके पीएच.डी. गाइड बाबासाहेब संकपाळ, बाकी सभी गुरुजन और साथियों का भी बड़ा योगदान रहा है।
डॉ. मेंढे को मिली यह वैश्विक पहचान कालिमाटी गांव और गोंदिया जिले के लिए बहुत फख्र की बात है। उनकी इस कामयाबी को देखकर गांव-देहात के अनगिनत स्टूडेंट्स की आंखों में बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने की हिम्मत आएगी। दुनिया जीतने के लिए बड़े शहर में पैदा होना जरूरी नहीं है। जिसके पास बड़े सपने देखने वाला मन हो, मुश्किलों से लड़ने की जिद हो और पढ़ाई पर पक्का भरोसा हो, वह कोई भी मंजिल पा सकता है। डॉ. मेंढे ने यही करके दिखाया है।
कालिमाटी का यह बेटा आज दुनिया के वैज्ञानिक मंच पर चमक रहा है और उनकी इस खास कामयाबी पर हर तरफ से उन्हें दिल से बधाइयां मिल रही हैं। सदिच्छा यही है कि उनकी आगे की रिसर्च से इंसानियत की तरक्की में ऐसा ही कीमती योगदान होता रहे।