एनबीएफसी का गोल्ड लोन सितंबर 2026 में 3.74 लाख करोड़ रुपये पर, एक साल में 66.1 प्रतिशत उछाल
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
रिज़र्व बैंक के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक सितंबर 2026 में एनबीएफसी के सोने के गहनों पर कर्ज और टिकाऊ उपभोक्ता सामान के कर्ज में 50 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त रही।
भारतीय रिज़र्व बैंक की ओर से जारी ताज़ा आंकड़ों में सामने आया है कि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के कर्ज बांटने में अच्छी बढ़त हुई है। सितंबर 2026 में सोने के गहनों और टिकाऊ उपभोक्ता सामान पर दिए गए कर्ज में पिछले साल के मुकाबले 50 प्रतिशत से ज्यादा का इजाफा दर्ज हुआ है। आंकड़ों से लगता है कि लोग अपनी आर्थिक जरूरतें पूरी करने के लिए वैकल्पिक और पारंपरिक, दोनों तरह के वित्तपोषण के रास्तों की ओर ज्यादा जा रहे हैं।
रिज़र्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक सितंबर 2026 में एनबीएफसी की ओर से सोने के गहनों पर दिया गया कुल कर्ज 66.1 प्रतिशत बढ़कर 3.74 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। एक साल पहले, यानी सितंबर 2025 में यही आंकड़ा 2.25 लाख करोड़ रुपये था। इस बढ़त से पता चलता है कि आम लोगों और छोटे कारोबारियों के लिए नकदी की जरूरत पूरी करने का गोल्ड लोन एक लोकप्रिय और आसान जरिया बनता जा रहा है।
टिकाऊ उपभोक्ता सामान के लिए एनबीएफसी के दिए कर्ज, जैसे टीवी, रेफ्रिजरेटर और वॉशिंग मशीन वगैरह, में भी 54.4 प्रतिशत की बढ़त हुई है। गए साल इसी अवधि में यह रकम 50,411 करोड़ रुपये थी, जो सितंबर 2026 में बढ़कर 77,896 करोड़ रुपये हो गई। त्योहारों के मौसम और बाजार में बढ़ती ग्राहक मांग के चलते लोगों ने आसान वित्तपोषण के विकल्पों का खूब इस्तेमाल किया है।
अलग-अलग क्षेत्रों को दिए कर्ज को मिलाकर देखें तो सितंबर 2026 में एनबीएफसी का कुल कर्ज 15.4 प्रतिशत बढ़कर 61.69 लाख करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले इसी अवधि में यह कुल कर्ज 53.46 लाख करोड़ रुपये था।
सोने और उपभोक्ता कर्ज में रिकॉर्ड बढ़त के बावजूद उद्योग और सेवा क्षेत्र को दिए जाने वाले कर्ज की बढ़त की रफ्तार कुछ धीमी पड़ी है। उद्योग को दिए कर्ज की बढ़त दर सितंबर 2026 में घटकर 7.4 प्रतिशत रह गई, जबकि पिछले साल इसी महीने में यह 10.2 प्रतिशत थी। इसके अलावा बुनियादी ढांचा क्षेत्र को दिए जाने वाले कर्ज की रफ्तार भी सुस्त हुई है।
सेवा क्षेत्र में कर्ज की बढ़त सितंबर 2026 में 17.3 प्रतिशत पर आ गई, जो पिछले साल 23 प्रतिशत के ऊंचे स्तर पर थी। कुल मिलाकर सितंबर 2026 के ये आंकड़े बताते हैं कि भारतीय वित्तीय बाजार में खुदरा कर्ज की, खासकर सोने और टिकाऊ उपभोक्ता सामान के वित्तपोषण की, मांग मजबूत बनी हुई है।


कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।