सोम‌वार, 26 अक्टूबर 2026

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एडमिशन रद्द कराने पर फीस लौटाना जरूरी, UGC ने कॉलेजों को दी कार्रवाई की चेतावनी

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने उन कॉलेजों पर सख्ती दिखाई है जो एडमिशन रद्द कराने वाले छात्रों की फीस वापस नहीं करते।

एडमिशन रद्द कराने पर फीस लौटाना जरूरी, UGC ने कॉलेजों को दी कार्रवाई की चेतावनी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

नागपुर: कई छात्र अलग-अलग वजहों से कॉलेज में अपना एडमिशन रद्द करा देते हैं, लेकिन उन्हें फीस वापस नहीं मिलती। ऐसी शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने कड़ा रुख अपनाया है।

आयोग ने कॉलेजों से कहा है कि वे फीस रिफंड के तय नियमों का पालन करें। जो संस्थान इन नियमों की अनदेखी करेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

फीस वापस न मिलने के मामलों में UGC के पास शिकायतें पहुंच रही हैं। इसके साथ ही सूचना का अधिकार (RTI) के तहत लगने वाले आवेदनों और अदालतों में पहुंचने वाले मामलों की संख्या भी बढ़ी है। कुछ संस्थानों के बारे में यह शिकायत भी आ रही है कि वे फीस लौटाने में आनाकानी करते हैं।

फीस रिफंड के नियमों के पालन के लिए UGC ने 17 दिसंबर 2020, जुलाई 2021, 2 अगस्त 2022, 3 जुलाई 2023, 9 फरवरी 2024 और 12 जून 2024 को अलग-अलग परिपत्र और दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसके बाद भी नियम टूटने पर आयोग ने संस्थानों को तय प्रावधानों के हिसाब से कार्रवाई की चेतावनी दी है।

UGC के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, जो छात्र एडमिशन रद्द कराते हैं, उन्हें तय समयसीमा के अंदर नियम के अनुसार फीस वापस मिलनी चाहिए। कितनी रकम लौटेगी, यह इस पर निर्भर करता है कि छात्र ने किस तारीख तक एडमिशन रद्द कराया।

जारी दिशा-निर्देशों में प्रावधान था कि 30 नवंबर 2020 तक एडमिशन रद्द कराने पर बिना कोई कटौती किए पूरी फीस लौटाई जाएगी। उसके बाद 31 दिसंबर 2020 तक एडमिशन वापस लेने पर अधिकतम 1,000 रुपये प्रोसेसिंग फीस काटकर बाकी रकम लौटाने की व्यवस्था की गई थी।

शैक्षणिक सत्र 2024-25 के लिए भी समयसीमाएं तय की गई थीं। इनके अनुसार 30 सितंबर 2024 तक एडमिशन रद्द कराने पर पूरी फीस वापस होनी थी। 31 अक्टूबर 2024 तक रद्द कराने पर अधिकतम 1,000 रुपये प्रोसेसिंग फीस काटकर बाकी रकम लौटाने का नियम था।

आयोग ने साफ किया है कि तय अवधि के अंदर एडमिशन रद्द कराने वाले छात्रों को लागू नियमों के हिसाब से फीस वापस मिलना जरूरी है। इसके बावजूद कई कॉलेजों के नियमों की अनदेखी करने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में फीस रिफंड नीति तोड़ने वाले संस्थानों पर नियम के मुताबिक कार्रवाई हो सकती है।

छात्रों के लिए जरूरी है कि वे फीस वापसी से जुड़े कागजात, भुगतान की रसीद और एडमिशन रद्द कराने का सबूत संभालकर रखें, ताकि शिकायत करने की नौबत आए तो ये काम आ सकें।

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