दिवाली से पहले महाबळेश्वर में पालिका ने हटाईं मुख्य बाजार रोड की टपरियां और ठेले
दिवाली की छुट्टियों में सैलानियों की भीड़ बढ़ने से पहले महाबळेश्वर नगरपालिका ने अवैध टपरियों, ठेलों और दुकानदारों के अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है।
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महाबळेश्वर नगरपालिका प्रशासन ने दिवाली की छुट्टियों में सैलानियों की बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए शहर में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। निशाने पर अवैध टपरियां, ठेले और दुकानदारों का रास्ते पर किया गया कब्जा है।
मुख्य बाजार की तरफ जाने वाले महात्मा गांधी मार्ग पर लगी टपरियां और ठेले हटाने की मुहिम पुलिस बंदोबस्त में चलाई गई। इससे यह रोड अतिक्रमण के जाल से खुल गया है। इस कार्रवाई से शहर में अतिक्रमण के सवाल पर फिर बहस छिड़ गई है। अब लोगों की नजर इस पर है कि क्या पालिका का यह हथौड़ा बाजार के अंदर के अतिक्रमण पर भी चलेगा।
महाबळेश्वर राज्य के बड़े पर्यटन स्थलों में गिना जाता है और दिवाली के सीजन में यहां सैलानियों की काफी भीड़ रहती है। ऐसे में रोड खाली रखना, पैदल चलने वालों को सुरक्षित जगह देना और ट्रैफिक की रुकावटें दूर करना जरूरी है। लेकिन मुख्य बाजार की तरफ जाने वाली सड़क के दोनों ओर टपरियां, ठेले और दुकानों के सामने रोड पर हुए कब्जे की वजह से स्थानीय लोगों और सैलानियों को परेशानी झेलनी पड़ रही थी। आखिरकार पालिका ने इन अतिक्रमणों पर सख्ती दिखाई।
शहर में करीब 45 करोड़ रुपये के सौंदर्यीकरण के काम होने की बात कही जाती है। इसके बावजूद बाजार के अतिक्रमण, रास्तों की रुकावटों और गंदगी की वजह से शहर की खूबसूरती पर असर पड़ता कई जगह दिख रहा था। बाजार के सौंदर्यीकरण का काम चल ही रहा था कि कुछ व्यापारियों ने दुकानों के सामने की जगह में रोड पर कब्जा कर लिया। कुछ जगह नालियों पर टाइलें रखकर पैदल चलने वालों और पानी की निकासी में रुकावट खड़ी करने की शिकायतें भी थीं।
शहर के सौंदर्यीकरण पर इतना खर्च हो रहा है, तो दूसरी तरफ व्यापारी वर्ग बाजार की बदसूरती बढ़ा रहा है, ऐसी भावना लोगों में बन गई थी। उम्मीद जताई जा रही थी कि पर्यटन स्थल की पहचान बचाने के लिए सिर्फ सौंदर्यीकरण के काम काफी नहीं हैं। उसके बाद सार्वजनिक जगहों को अतिक्रमण से मुक्त रखने की जिम्मेदारी भी प्रशासन निभाए।
बाजार के अतिक्रमण का मसला गंभीर हुआ, तब तत्कालीन प्रशासक पल्लवी पाटील ने अतिक्रमण हटाओ मुहिम हाथ में ली थी और बाजार समेत पूरे शहर को अतिक्रमण से मुक्त करने की कोशिश की थी। उन्होंने साहसी कार्रवाई चलाकर शहर को अतिक्रमण मुक्त कर दिया था। मगर उसके बाद प्रशासन ने इस तरफ पूरी तरह ध्यान देना छोड़ दिया। नतीजा यह हुआ कि शहर के सभी रोड पर जगह-जगह फिर नई टपरियां खड़ी होने लगीं। अतिक्रमण हटाओ मुहिम ठंडी पड़ गई और यह शंका जताई जाने लगी कि कहीं पालिका ने वह विभाग ही बंद तो नहीं कर दिया। आगे शहर का क्या होगा और प्रशासन कार्रवाई करेगा या नहीं, इस पर शहर में तरह-तरह की चर्चा चल रही थी।
इसी पृष्ठभूमि में पालिका ने मुख्य बाजार की तरफ जाने वाले महात्मा गांधी रोड पर ठेले और टपरियां पुलिस बंदोबस्त में हटाईं। इससे उन चर्चाओं पर कुछ हद तक विराम लगा है। फिर भी एक दिन की कार्रवाई से मसला हल नहीं होगा। अतिक्रमण मुक्ति की यह मुहिम पूरे शहर में लगातार चलाते रहना प्रशासन के सामने चुनौती है।
मुख्य रोड की टपरियों पर कार्रवाई के बाद अब लोग चाहते हैं कि पालिका शहर के बीच के बाजार के अतिक्रमण पर भी ध्यान दे। दुकानों के सामने की सार्वजनिक जगह का अवैध इस्तेमाल, रोड पर रखा जाने वाला सामान, नालियों पर रुकावटें और पैदल रास्ते में आने वाली चीजों की वजह से बाजार में आने-जाने में दिक्कत होने की शिकायतें हैं।
शहर में 'नो हॉकर्स, नो व्हेईकल झोन' को असरदार ढंग से लागू करना है, तो सब पर एक जैसे नियम लगाना जरूरी है। मांग हो रही है कि सड़क के सिर्फ एक हिस्से की टपरियां हटाकर रुकने के बजाय बाजार समेत शहर के सभी प्रमुख रोड और सार्वजनिक जगहों का जायजा लेकर नियम के मुताबिक कार्रवाई की जाए।
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