दिवाली की शुरुआत वसुबारस से, इस दिन होती है गाय और बछड़े की पूजा
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वसुबारस को दिवाली का पहला दिन माना जाता है। इस दिन गाय और बछड़े की पूजा की परंपरा है। जानिए पूजा का तरीका और इस दिन का महत्व।
दिवाली के त्योहार की शुरुआत वसुबारस से होती है। यह त्योहार खुशी, उत्साह और मंगल का प्रतीक है। वसुबारस के दिन गाय और उसके बछड़े की पूजा करने की परंपरा है। हिंदू धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया जाता है। इसी वजह से वसुबारस का दिन कृतज्ञता, समृद्धि और गोमाता के पूजन का प्रतीक माना जाता है।
वसुबारस को दिवाली का पहला दिन माना जाता है। यह त्योहार आश्विन महीने के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन को गोवत्स द्वादशी भी कहा जाता है। "गो" का मतलब गाय और "वत्स" का मतलब बछड़ा है। इस दिन गाय और बछड़े की पूजा करके उनके प्रति कृतज्ञता जताई जाती है।
हिंदू धर्म में गाय को पवित्र और पूजनीय माना गया है। धार्मिक श्रद्धा है कि गाय में कई देवी-देवताओं का वास होता है। गाय के दूध, दही, घी और गोबर का इस्तेमाल धार्मिक कामों में किया जाता है। इसलिए वसुबारस के दिन गोमाता की पूजा करके सुख, समृद्धि और परिवार की भलाई के लिए प्रार्थना की जाती है।
पूजा का तरीका यह बताया गया है कि वसुबारस के दिन सुबह जल्दी उठकर घर की सफाई करें। गाय और बछड़े को साफ पानी से धोकर सजाएं। गाय के माथे पर हल्दी-कुमकुम लगाएं और फूलों की माला पहनाएं। इसके बाद गाय और बछड़े को मीठा पकवान, हरा चारा या उनका पसंदीदा खाना अर्पित करें। फिर उनकी आरती उतारें और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें। हो सके तो गोमाता की सेवा करें और जरूरतमंद जानवरों को खाना खिलाएं।
पौराणिक परंपरा की बात करें तो वसुबारस पर गाय और बछड़े की पूजा के पीछे धार्मिक श्रद्धा और पौराणिक परंपराएं जुड़ी हैं। हिंदू मान्यता के मुताबिक गाय सिर्फ रोजी-रोटी का जरिया नहीं है, वह माता की तरह पालन-पोषण करने वाली है। उसके दूध से इंसान को पोषण मिलता है, और खेती तथा गांव की जिंदगी में भी गाय की अहमियत बड़ी है।
कुछ प्रचलित कथाओं में गोमाता की भक्ति और उसकी सेवा से मिलने वाले पुण्य का महत्व बताया गया है। इसी वजह से वसुबारस के दिन गाय और बछड़े की पूजा करके उनके प्रति आदर और कृतज्ञता जताने की परंपरा चली आ रही है।
इस दिन गोमाता की पूजा करना, उसे चारा और खाना देना और उसकी सेवा करना शुभ माना जाता है। अगर गाय की पूजा मुमकिन न हो, तो उसे याद करके गोशाला में चारा या दूसरी जरूरी चीजें दान की जा सकती हैं। इस दिन जानवरों के साथ प्यार से पेश आने का संकल्प भी लिया जा सकता है।
वसुबारस सिर्फ धार्मिक विधियों का दिन नहीं है। यह प्रकृति, जानवरों और हमारी जिंदगी को सहारा देने वाली चीजों के प्रति कृतज्ञता जताने का त्योहार है। गोमाता की पूजा के साथ दिवाली के मंगलमय पर्व की शुरुआत होती है।
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