दीनानाथ हाई स्कूल में वाचन दिवस पर बच्चों को रोज़ पढ़ने की सीख
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पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की जयंती पर स्कूल में कार्यक्रम हुआ। विद्यार्थियों ने पढ़ने की शपथ ली।
दीनानाथ हाई स्कूल एंड जूनियर कॉलेज में हाल ही में वाचन दिवस मनाया गया। यह कार्यक्रम पूर्व राष्ट्रपति और जाने-माने वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की जयंती के मौके पर रखा गया था। इसका मकसद विद्यार्थियों में पढ़ने का शौक जगाना था और यह बताना कि किताबें ज्ञान, चरित्र और व्यक्तित्व को गढ़ने में कितनी अहम हैं।
कार्यक्रम में डॉ. तेजिंदर सिंह रावल मुख्य वक्ता के तौर पर मौजूद थे। उन्होंने बच्चों से सवाल पूछकर बात शुरू की: इंसान का सबसे बड़ा आविष्कार क्या है? पहिया, बिजली, कंप्यूटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर बात करने के बाद उन्होंने लिखित शब्द को सबसे बड़ा आविष्कार बताया। उनके मुताबिक लिखने की वजह से ज्ञान, समझदारी और इंसानी तजुर्बा एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचा, इसलिए किताब इंसान की सबसे सरल टाइम मशीनों में से एक है।
डॉ. रावल ने डॉ. कलाम की किताबों Wings of Fire और Ignited Minds का ज़िक्र करते हुए बच्चों को बताया कि पहली किताब दिखाती है कि जिज्ञासा, पढ़ाई और लगन से किसी की ज़िंदगी कैसे बदल सकती है। दूसरी किताब देश के नौजवानों से कहती है कि वे अपनी क्षमता पहचानें और देश को बदलने में हाथ बंटाएं। उन्होंने कहा कि एक किताब बताती है कि डॉ. कलाम ने क्या हासिल किया, तो दूसरी पूछती है कि पाठक खुद क्या हासिल कर सकते हैं।
स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में पढ़ने पर भी उन्होंने बात की। उनका कहना था कि टेक्नोलॉजी से जानकारी जल्दी मिल जाती है, लेकिन लगातार पढ़ने से एकाग्रता, कल्पनाशक्ति, दूसरों की भावना समझने की क्षमता, आलोचनात्मक सोच और अपना फैसला खुद लेने की ताकत बढ़ती है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सोचने में मदद कर सकता है, पर सोच की जगह नहीं ले सकता। बच्चों से उन्होंने कहा कि वे ऐसी किताबें चुनें जो उन्हें सचमुच पसंद हों, छोटे लक्ष्य से शुरुआत करें और नियमित रहें, ताकि पढ़ना सिर्फ पढ़ाई की मजबूरी न रहे, बल्कि उम्र भर का मज़ेदार शौक बन जाए।
कार्यक्रम का एक खास हिस्सा 30-Day Reading Challenge रहा। डॉ. रावल ने हर विद्यार्थी से कहा कि वह रोज़ 10 से 15 मिनट पढ़े और छोटे-छोटे लेकिन लगातार कदमों से पक्की आदत बनाए। उन्होंने याद दिलाया कि रोज़ थोड़ी देर पढ़ने से भी नए विचार मिलते हैं, शब्दभंडार और समझ मजबूत होती है और नज़रिया बड़ा होता है।
इसके बाद विद्यार्थियों ने दायां हाथ उठाकर Reading Pledge ली। उन्होंने वादा किया कि वे नियमित पढ़ेंगे, जिज्ञासु रहेंगे, सवाल पूछेंगे, खुद सोचेंगे, टेक्नोलॉजी का समझदारी से इस्तेमाल करेंगे, रोज़ कुछ नया सीखेंगे और दूसरों को भी पढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे। यह पल इसलिए भी खास रहा कि कार्यक्रम स्कूल के दुर्गा पूजा समारोह के दौरान हुआ और पीछे देवी दुर्गा की प्रतिमा थी। डॉ. रावल ने देवी के साहस और शक्ति को ज्ञान, समझदारी और प्रबुद्ध सोच से मिलने वाली बौद्धिक ताकत से जोड़ा।
कार्यक्रम पढ़ने के नए जोश और एक मजबूत संदेश के साथ खत्म हुआ: रोज़ पढ़ो, रोज़ सीखो और रोज़ आगे बढ़ो। डॉ. रावल ने बच्चों को तीन बातें दीं: दुनिया को जानने के लिए पढ़ो, दूसरों को समझने के लिए पढ़ो और खुद को खोजने के लिए पढ़ो। यह पहल नन्हे पाठकों को तैयार करने की दिशा में सार्थक कदम रही और इससे वाचन दिवस की भावना साल भर ज़िंदा रहेगी।
बंगाली एजुकेशन सोसायटी के प्रबंधन से जुड़ीं AHM रुना घोष, सुपरवाइज़र वैशाली गुणशेखरन और एडमिनिस्ट्रेटर अंजू सेठ ने प्रभारी शिक्षिका डॉ. ज्योतिमणि रॉक और लाइब्रेरियन सोनाली नाचनकर को इतना समझदारी भरा कार्यक्रम करने के लिए बधाई दी।
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