रणबीर कपूर की 'रामायण' में रावण की महादेव भक्ति गायब, कुंभकर्ण और शूर्पणखा के लुक पर सवाल
थिएटरों में भीड़ और अच्छी कमाई के बावजूद फिल्म की पांच बातों पर सवाल उठे हैं: रावण की महादेव भक्ति, कुंभकर्ण का लुक, जंगल की लड़ाई, रानियों के किरदार और शूर्पणखा का रूप।
रणबीर कपूर की 'रामायण' फिल्म सिनेमाघरों में आ चुकी है। थिएटरों में भारी भीड़ है और फिल्म ने अच्छी कमाई भी की है। लेकिन 'रामायण' जैसे बड़े विषय को सिर्फ तीन घंटे में समेटना आसान नहीं है। भावनाओं, किरदारों की गरिमा और पौराणिक दौर को बड़े पर्दे पर उतारना बहुत मुश्किल काम है।
कुछ जगहों पर निर्माता और निर्देशक इसमें कामयाब रहे हैं, लेकिन कुछ जगह उन्होंने गंभीर गलतियां की हैं। ये गलतियां ऐसी हैं कि मूल कथा की आत्मा से जुड़ी जो बातें थीं, वही फिल्म से गायब हो गई हैं।
फिल्म में रणबीर कपूर और साई पल्लवी मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म देखते हुए कई जगह लगता है कि CGI और विजुअल्स के चक्कर में कहानी की अहम बातें छोड़ दी गईं। कई किरदारों के चेहरे और लुक देखकर लगता है कि टेक्नोलॉजी ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल हुई है। कुछ किरदार कार्टून जैसे लगते हैं, तो कुछ के हावभाव और संवादों का मेल नहीं बैठता।
पहली चूक रावण को लेकर है। रामायण में रावण सिर्फ एक ताकतवर राजा और खलनायक नहीं है, वह महादेव का अनन्य भक्त है। उसे महादेव की कठोर तपस्या करने वाले और पूरे समर्पण से पूजा करने वाले राजा के रूप में देखा जाता है। फिल्म में रावण का यह पहलू आया ही नहीं। इसमें ब्रह्मा और विष्णु के दर्शन होते हैं, लेकिन रावण और महादेव का रिश्ता उतने असरदार ढंग से नहीं दिखाया गया। महादेव की भक्ति रावण के जीवन की सबसे बड़ी बात थी और वही फिल्म से गायब है। इसे बड़ी चूक माना गया है।
दूसरी चूक कुंभकर्ण का लुक है। ऐतिहासिक या पौराणिक फिल्म बनाते समय किरदार जीते-जागते लगने चाहिए और छोटी भूमिका को भी पूरा न्याय मिलना चाहिए। 'रामायण' में कुंभकर्ण को बहुत अजीब ढंग से दिखाया गया है। यह भूमिका फैजल मलिक ने निभाई है, लेकिन उनका लुक गंभीर दिखने की जगह कॉमेडी वाला लगता है। ऐसा लगता है मानो कुंभकर्ण के रूप में कोई कार्टून देख रहे हों। रामायण में कुंभकर्ण विशाल और प्रभावशाली शख्सियत था, पर वह छाप फिल्म में नहीं दिखती।
तीसरी चूक जंगल की लड़ाई है। फिल्म में राम, सीता और लक्ष्मण जंगल में राक्षसों से लड़ते दिखाए गए हैं, लेकिन यह दृश्य बिल्कुल असर नहीं छोड़ता। तीनों किरदार जंगल में भागते दिखते हैं और उनके पीछे राक्षसों की फौज है। पूरे एक्शन सीन में असलियत नज़र नहीं आती। राक्षसों का लुक और उनसे होने वाली लड़ाई नकली लगती है और दृश्य हास्यास्पद हो गया है। युद्ध के दृश्य में डर और रोमांच पैदा होना चाहिए, पर यहां CGI की बनावट दिखती है।
चौथी चूक रानियों को लेकर है। कैकयी को छोड़कर दशरथ की बाकी सभी रानियों की अनदेखी की गई है। उनके हिस्से में कोई अहम संवाद नहीं है और कोई अहम भूमिका भी नहीं। वे बस स्क्रीन पर हंसती दिखती हैं। लगता है जैसे इन रानियों को सिर्फ राजमहल की भव्यता दिखाने के लिए रखा गया हो। फिल्म में इनका व्यक्तित्व और इनकी भावनाएं दिखाई जानी चाहिए थीं, पर उस तरफ ध्यान नहीं दिया गया।
पांचवीं चूक शूर्पणखा का रूप है। इस फिल्म में रकुल प्रीत ने शूर्पणखा की भूमिका निभाई है और उनका लुक और मौजूदगी खटकती है। शूर्पणखा को राक्षसी दिखाने की जगह ज़्यादातर ग्लैमरस अंदाज़ में दिखाया गया है। पूरी फिल्म में उनका राक्षसी अवतार नज़र नहीं आता और वे ग्लैम डॉल जैसी लगती हैं। रामायण में जो कुछ घटा, उसकी वजह शूर्पणखा है, इसलिए उनका किरदार बेहद अहम है। फिर भी उसे उतने असरदार ढंग से नहीं दिखाया गया।
कुल मिलाकर फिल्म कमाई कर रही है, लेकिन कई दर्शकों को लगता है कि मूल रामायण की भावना उसमें खो गई है।
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