दिल्ली हाईकोर्ट में सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका, जज ने जमानत बॉन्ड पर पूछे सवाल
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने जमानत बॉन्ड की शर्तों और प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
दिल्ली हाईकोर्ट में आज कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर सुनवाई हुई। दोनों पिछले छह से आठ दिन से न्यायिक हिरासत में हैं। एसईएम कोर्ट ने उनकी हिरासत बढ़ा दी थी, और इसी आदेश को उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने दोनों के बर्ताव पर सख्त टिप्पणी की।
सीजेपी के इन दोनों नेताओं को दोपहर 2 बजे मंदिर मार्ग स्थित एसईएम कोर्ट में पेश किया गया था। हाईकोर्ट के जज ने दोनों की उम्र पूछी। वकील ने बताया कि सौरव दास 27 साल के हैं और आशुतोष रांका 31 साल के। इस पर जज ने कहा कि आप लोग "जनरेशन जेड" (Gen Z) में नहीं आते। जज ने मिलेनियल्स और जनरेशन जेड की उम्र के बारे में भी पूछा।
हाईकोर्ट ने जमानत बॉन्ड रद्द करके उसे दोबारा जमा करने की शर्तों पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने बताया कि बॉन्ड 11 अक्टूबर को जमा किया गया था। आरोप है कि बाद में बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन हुआ। कोर्ट ने कहा कि बीएनएसएस (BNSS) के तहत बॉन्ड तोड़ने वालों पर कार्रवाई की एक तय प्रक्रिया है। इसमें जमानती की रकम जब्त करना और यह सफाई देने का मौका देना शामिल हो सकता है कि कार्रवाई क्यों न की जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि अधिकारियों को दूसरा नोटिस जारी करके याचिकाकर्ताओं के साथ कुछ नरमी दिखानी चाहिए थी।
हाईकोर्ट ने पूछा कि अगर कोई व्यक्ति दूसरी बार जमानत बॉन्ड तोड़ता है, तो क्या अधिकारियों को और सख्त शर्तें लगाने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने वकीलों से मौजूदा स्थिति की जानकारी भी मांगी। रांका और दास के वकीलों ने कहा कि याचिका वापस ले ली जाए और आज की सुनवाई का इंतजार किया जाए।
कोर्ट ने कहा कि जहां शांति भंग होने की आशंका हो, वहां ये सवाल ज्यादा अहम हो जाते हैं। विरोध करने के अधिकार पर कोई शक नहीं है। लेकिन जब जज के सामने शांति भंग होने की संभावना का सवाल आता है, तो प्रदर्शनकारियों, उनके इरादों और उनकी हरकतों की जांच जरूरी हो जाती है। कोर्ट के मुताबिक अगर आंदोलन का मकसद सत्ता पलटना है, तो लोकतंत्र में यह बदलाव चुनाव से होता है। इसलिए प्रदर्शनकारियों की पहचान, इरादे और हरकतें जैसे सवाल निर्णायक हो जाते हैं।
दास और रांका के वकील ने कोर्ट को बताया कि पुलिस ने आज उनकी हिरासत बढ़ाने की मांग वाली अर्जी दाखिल की है। हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस के वकील से पूछा कि पुलिस आज क्या मांग करने वाली है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि न्यायिक हिरासत पूरी होने के बाद दोनों को आज कोर्ट में पेश किया जाएगा। उन्हें जमानत के लिए जमानती पेश करने को कहा गया था।
हाईकोर्ट ने पूछा कि जमानत के लिए दिए गए जमानती को नामंजूर करने के आदेश के खिलाफ अपील हो सकती है या नहीं। वकील ने कहा, जी, यानी हां। इस पर हाईकोर्ट ने पूछा कि फिर संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत याचिका क्यों दाखिल की गई, और क्या आप दो जमानती नहीं दे सकते।
दोनों नेताओं ने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनकी न्यायिक हिरासत बढ़ाई गई। राहत के लिए उन्होंने हाईकोर्ट में अपील की है। जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद की बेंच ने आज दो मामलों की सुनवाई की। पहला मामला सौरव दास और आशुतोष की न्यायिक हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका का है। दूसरा मामला नेहा बोरा का है, जिन्होंने शांति बनाए रखने के लिए 10,000 रुपये का जमानत और बॉन्ड मांगने वाले एसईएम कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है।
कॉकरोच जनता पार्टी ने आरोप लगाया था कि सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई रोकने के लिए जमानत प्रक्रिया में जानबूझकर देरी की जा रही है। अपनी याचिका में दास और रांका ने विशेष मजिस्ट्रेट के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें उन्हें दो दिन की न्यायिक हिरासत सुनाई गई थी। उनकी दलील है कि यह आदेश कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन है और संविधान के अनुच्छेद 21 में मिले उनके "स्वतंत्रता के अधिकार" का हनन करता है।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।