'डीके' की धुनाई से जेल में मचा है घमासान
हत्या करने में जूटे है अपराधी, 'वामन कृपा' से चल रहा है जेल प्रशाषण
नागपुर.
अपराधियों के ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के तौर पर चर्चित नागपुर जेल में कुख्यात 'डी.के.' की दहशत मची हुई है. उसने जेल में बंद कई खूंखार अपराधियों की बीते दिनों धुनाई की है. इससे संतप्त गुंडें डीके का 'खेल' करने में जूटे है. इसी साजिश के तहत ढ़ाई माह पहले जेल कर्मी के माध्यम से चरस और सर्जिकल ब्लेड भेजी जा रही थी. इस साजिश के नाकाम होने के बाद कुछ दिनों तक सख्ती बरती गई लेकिन अब सबकुछ जस का तस हो गया है. जिसके परिणामस्वरूप जेल में किसी भी वक्त बड़ा हादसा हो सकता है.
जेल में आतंक का पर्याय बना डीके करीब छह साल से बंद है. उसने पत्नी और साथियों की मदद से एक युवक की गोली मारकर हत्या की थी. उसके साथियों को जमानत मिल गई है. मृतक के पिता द्वारा जमानत का पुरजोर विरोध करने से डीके और उसके पत्नी की रिहाई नहीं हुई है. डीके आरंभ से ही हिंसक प्रवृत्ति का रहा है. उसकी जेल में बंद कई अपराधियों से पुरानी रंजिश है. इन अपराधियों की जेल कर्मियों और अपराधियों में गहरी पैंठ है जिसकी बदौलत उन्हें मादक पदार्थ सहित सभी सुविधाएं आसानी से मिल जाती है. यह बातें डीके को खटकी रही थी. मजबूत कद काठी का होने से किसी से भी भीड़ जाना डीके की आदत में शुमार है. लंबा वक्त से जेल में बिताने से उसका मानसिक संतुलन खराब हो गया है. जिसके चलते उसने हाल में कई अपराधियों की जमकर धुनाई कर दी. इनमें कुछ अपराधी तो ऐसे है जिनके नाम का शहर में खौफ है. शहर के चर्चित हत्याकांड को अंजाम दिए जाने से वह जेल पहुंचे है. चिल्लर अपराधियों के सामने धुनाई होने से वह शर्मिंदा है. इसीलिए उन्होंने डीके को सबक सिखाने का तय किया है. इसी योजना के तहत जेल कर्मी विकास सहारे के माध्यम से सर्जिकल ब्लेड बुलाई थी. 23 जुलाई की सुबह सहारे से 5 सर्जिकल ब्लेड, 39 ग्राम चरस और नशे के लिए इस्तेमाल गोलियां मिली थी. धंतोली पुलिस ने एनडीपीएस तथा आम्स एक्ट के तहत मामला भी दर्ज किया था. इस घटना के बाद खून खराबे की आशंका से चिंतित होकर जेल प्रशाषण ने डीके को अंडा सेल में डाल दिया.
सूत्रों के अनुसार करीब तीन चार से जेल में डीके को लकेर माहौल बना हुआ है. विकास सहारे के पकड़े जाने से भले ही प्लान विफल हो गया लेकिन, जेल के भितर चले ही अपराधियों के साम्राज्य की सच्चाई सामने आ गई. सूत्रों के अनुसार 'जेब' हल्की करके जेल में सुविधाएं हासिल की जा सकती है. हर सुविधा की कीमत तय है. इसका संचालन 'वामन कृपा' के माध्यम से होता है. पेशेवर अपराधी और सजायाफ्ता कैदी बैरक में रहते है. नए आरोपी को आरंभ के दिनों में आदान में रखा जाता है. दूसरे अपराधियों से दूरी और कैंटिन का मनपसंद फूड उपलब्ध होने से जेल पहुंचनेवाले हर अपराधी की पहली पसंद आदान होती है. मालदार आरोपी के आने का पहले ही पता चल जाता है. जेल 'सिस्टम' से संपर्क करने पर ही उसे आदान में रखा जाता. वर्ना बैरक अथवा अंडा सेल में भेजने की चेतावनी दी जाती है. अंडा सेल में भेजने और वहां से बाहर निकालने का 'रेट' अपराधी की हैसियत के अनुसार तय किया जाता है. इसमें भी 'वामन कृपा' का महत्वपूर्ण रोल होता है. जेल में गैंगवार और अराजकता की सच्चाई समय-समय पर सामने आती है. इसके बावजूद जेल प्रशाषण अथवा सरकार सख्त कार्रवाई नहीं करती है.
नागपुर
साढ़े पांच साल में 81 मामले दर्ज
जेल में कोई भी वारदात होने पर धंतोली थाने में मामला दर्ज होता है. धंतोली थाने में जनवरी 2021 से अबतक नागपुर जेल के संदर्भ में 50 मामले दर्ज हुए है. मादक पदार्थ तस्करी की 11 घटनाएं हुई है. हत्या और मारपीट की दूसरी घटनाओं की संख्या 15 है. इसी अवधि के दौरान जेल अधिकारी और कर्मियों के खिलाफ 5 मामले दर्ज किए गए है. इस लिहाज से करीब साढ़े पांच साल में नागपुर जेल के संदर्भ में 81 मामले दर्ज हुए है. इससे जेल में कानून-व्यवस्था की सच्चाई का पता चलता है.
जमकर मचाया उत्पात, कैदी पर हमला-कर्मियों से भी विवाद
नागपुर:
नागपुर सेंट्रल जेल में कैदियों ने जमकर उत्पात मचाया. प्रतिद्वंदी कैदी पर हमला करके जेल कर्मियों से भी मारपीट की. यह वारदात 6 अक्तूबर की सुबह 9.45 बजे जेल के 'छोटीगोल' सेक्शन में बैरक 7 और 8 के बीच हुई. जख्मी न्यायिक कैदी विजय नंदलाल रहांगडाले है. रहांगडाले सुबह के वक्त जेल परिसर के हनुमान मंदिर में गया था. वहां से पूजा-अर्चना करके अपनी बैरक लौट रहा था. इसी दौरान दुर्गेश उर्फ लिटिल प्रमोद गुप्ता और अश्विन उर्फ अच्ची मुकुंद इंदुरकर ने रहांगडाले को रोका. दोनों रहांगडाले से विवाद करने लगे. उन्होंने लात-घूंसों से रहांगडाले पर हमला कर दिया. प्लास्टिक की बकेट से पिटने लगे. सिर पर चोट लगने से रहांगडाले जख्मी हो गया. हमला होते देखकर जेल अधिकारी और कर्मचारी वहां पहुंचे. वह रहांगडाले को आरोपियों के चंगुल से छुड़ाकर कार्यालय में ले आए. इसी दौरान सुरेंद्र उर्फ मोनू समुंद्रे नामक कैदी वहां आया. वह निमजे नामक सुरक्षा रक्षक से उलझ गया. मोनू जेल कर्मी राम उर्फनवार को भी विवाद करके धमकाने लगा. इस वारदात से जेल में तनाव निर्माण हो गया. धंतोली पुलिस ने तीनों कैदियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 118(1), 132, 115(2), 351(3) और 3(5) के तहत दर्ज किया गया.