ढाका में नाहिद इस्लाम की रैली, गृह और ऊर्जा मंत्री के इस्तीफे की मांग, भारत को भी चेतावनी
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राजधानी ढाका के राष्ट्रीय संग्रहालय के सामने हजारों लोग जुटे। महंगाई, बिजली और गैस की किल्लत पर सरकार को घेरा गया और गंगा जल बंटवारा संधि का मुद्दा भी उठा।
बांग्लादेश में महंगाई, बिजली संकट और ईंधन-गैस की भारी कमी से आम लोगों का सब्र टूटता जा रहा है। इसी माहौल में राजधानी ढाका के राष्ट्रीय संग्रहालय के सामने हजारों प्रदर्शनकारी जमा हुए और सरकार के खिलाफ आवाज उठाई। इस रैली की अगुवाई नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के प्रमुख नेता नाहिद इस्लाम ने की।
रैली देश के अंदरूनी मुद्दों पर थी, लेकिन सभा में "दिल्ली नहीं, ढाका" जैसे नारे भी लगे, जिससे दक्षिण एशिया के राजनयिक हलकों में हलचल मच गई है। प्रदर्शनकारियों ने मौजूदा प्रशासन की जमकर आलोचना की।
नाहिद इस्लाम जुलाई 2024 के जन आंदोलन का बड़ा चेहरा रहे हैं, जिसने शेख हसीना की सत्ता पलट दी थी। उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री तारिक रहमान को निशाने पर लिया। रैली में कहा गया कि देश में महंगाई 8.5 प्रतिशत से ऊपर चली गई है और बिजली व गैस की किल्लत से उद्योग-धंधे ठप पड़ गए हैं।
इस नाकामी का जिम्मा तय करते हुए प्रदर्शनकारियों ने गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद और ऊर्जा मंत्री इकबाल हसन महमूद टुकू से फौरन इस्तीफा देने की मांग की। चेतावनी दी गई कि अगर दोनों मंत्री इस्तीफा नहीं देते, तो पूरे देश में आंदोलन होगा और प्रधानमंत्री के निवास को घेरा जाएगा। नाहिद इस्लाम ने 30 अक्टूबर 2026 की अपनी एक पोस्ट में भी लिखा कि गृह मंत्री के इस्तीफे समेत चारों मांगें पूरी होने तक लड़ाई जारी रहेगी।
भाषण में नाहिद इस्लाम ने कहा, "हमने हजारों लोगों की कुर्बानी के बाद एक तानाशाह को देश से भगाया था। लेकिन अब लंदन से लौटे तारिक रहमान भ्रष्टाचार, लूटमार और वसूली का नया एजेंडा लेकर आए हैं। देश में एक नए तानाशाह का उदय हो रहा है। पर जैसे हमने पुराने तानाशाह को हराया, वैसे ही इस नए तानाशाह को भी हराएंगे।" इस बयान से सत्ताधारी पार्टी और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ने की आशंका बन गई है।
नाहिद इस्लाम ने दावा किया कि तारिक रहमान की सरकार बांग्लादेश को भारत की साजिशों से बचाने में पूरी तरह नाकाम रही है। NCP नेताओं ने भारत पर बांग्लादेश के खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया। अपने भाषण में उन्होंने सीमा इलाकों में कथित घटनाओं, असम और पश्चिम बंगाल के मुसलमानों से जुड़े दावों और दिल्ली के धार्मिक स्थलों से जुड़े मुद्दे भी उठाए।
रैली में कट्टर सोच वाले सांसद हसनात अब्दुल्ला भी मौजूद थे। वे इससे पहले भारत के पूर्वोत्तर के सात राज्यों को अलग करने और सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) को रोकने की धमकी देकर विवाद में आ चुके हैं।
रैली में गंगा जल बंटवारा संधि का मुद्दा भी छाया रहा। भारत और बांग्लादेश के बीच 12 दिसंबर 1996 को हुई 30 साल की यह संधि दिसंबर 2026 में खत्म हो रही है। संधि के तहत जनवरी से मई के सूखे मौसम में पश्चिम बंगाल के फरक्का बैराज से गंगा का पानी बांटा जाता है। बांग्लादेश में गंगा को पद्मा कहा जाता है और देश की एक तिहाई आबादी की रोजी-रोटी इस पानी पर टिकी है।
संधि के नवीनीकरण पर नाहिद इस्लाम ने कहा, "अगर भारत के साथ गंगा जल बंटवारा संधि पर न्याय के साथ और बांग्लादेश के हितों की रक्षा करते हुए फिर दस्तखत नहीं हुए, तो बांग्लादेश की जनता एक बार फिर सड़कों पर उतरेगी। इस बार हम अपने हक के पानी के लिए कोई समझौता नहीं करेंगे।"
अगस्त 2024 में शेख हसीना की सत्ता जाने के बाद से बांग्लादेश में भारत विरोधी भावना भड़काने का सिलसिला चलता आ रहा है। फरवरी 2026 के चुनाव के बाद तारिक रहमान की अगुवाई में बांग्लादेश नेशनल पार्टी (BNP) की सरकार बनी, पर देश की आर्थिक दिक्कतें सुलझने के बजाय और गंभीर हुई हैं। अब सबकी नजर इस पर है कि दिसंबर 2026 में संधि के नवीनीकरण के वक्त दोनों देशों के रिश्ते कितने तनावपूर्ण मोड़ पर पहुंचते हैं।
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