देवरी पंचायत समिति के सभापति अनिल बिसेन को संभागीय आयुक्त ने ठहराया अपात्र
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शिकायत पर हुई जांच में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण और पद के दुरुपयोग की बात निकली; आदेश 4 नवंबर को आया।
गोंदिया: देवरी पंचायत समिति के सभापति अनिल बिसेन आयुक्त की कार्रवाई के बाद मुश्किल में पड़ गए हैं। अभियोक्ता मस्करे की शिकायत पर हुई जांच में बिसेन दोषी पाए गए। इसके बाद संभागीय आयुक्त ने उन्हें अपात्र ठहरा दिया। यह आदेश 4 नवंबर को दिया गया। इस कार्रवाई से राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है।
अनिल बिसेन पहले भी अक्सर विवादों में रहे हैं। एक खास पार्टी की तरफ से उनके कामकाज की खूब तारीफ की गई और उन्हें विकासपुरुष तक कहा गया। जनप्रतिनिधि भी लगातार उनका बचाव करते रहे। फिर भी बिसेन के खिलाफ भ्रष्टाचार के कई मामले और शिकायतें सामने आती रहीं।
शिकायतकर्ता एड. भूषण मस्करे ने यह बात उजागर की कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करके निर्माण किया गया है। इसकी विधिवत शिकायत विभाग में की गई और जांच के आदेश भी दिए गए। जांच में सामने आया कि अनिल बिसेन ने सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर निर्माण किया और पद का दुरुपयोग किया। यह भी निकला कि एडीबी ट्रेडर्स नाम का प्रतिष्ठान उनकी खुद की मिल्कियत का है, फिर भी निर्माण कामों में वहां से सामान की सप्लाई करके अपना हित साधा गया। इस आधार पर वे जिला परिषद और पंचायत समिति अधिनियम 1961 की धारा 16, 1 आय के तहत अयोग्य ठहरे।
इसके अलावा मनरेगा के तहत अपने नाम पर बोरवेल का लाभ लेने की बात भी सामने आई। भाई और भाभी के नाम पर गोशाला योजना का लाभ लेने की बात भी जांच में आई। जांच में बिसेन के दोषी पाए जाने पर संभागीय आयुक्त विजयालक्ष्मी बिदरी ने महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिति अधिनियम 1961 की धारा 16, 1 (आय) और 58 (आयई) के तहत प्रतिवादी सभापति अनिलकुमार बिसेन को पद के लिए अयोग्य ठहराने का आदेश पारित किया। इस आदेश से बिसेन पद से अपात्र घोषित हो गए हैं।
कानून के सामने कोई बड़ा नहीं: एड. मस्करे
एड. मस्करे ने कहा कि अनिलकुमार बिसेन के भ्रष्ट कामकाज की चर्चा सबको थी। इस बारे में उन्होंने विधिवत शिकायत की और विभाग को दस्तावेज भी दिए। विभाग की जांच में हर मुद्दे पर बिसेन दोषी निकले, इसलिए संभागीय आयुक्त ने उन्हें अपात्र ठहराया। उनके मुताबिक यह कार्रवाई साबित करती है कि कानून के सामने कोई बड़ा नहीं है।
यह जानकारी उन्होंने बुलाई गई पत्रकार परिषद में दी। इस मौके पर उनके साथ पूर्व जिला परिषद सदस्य गंगाधर परशुरामकर और सामाजिक कार्यकर्ता यशवंत मानकर मौजूद थे। मस्करे ने आगे कहा कि यह लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में जितने और सबूत देने की जरूरत पड़ेगी, उतने सबूत वे न्याय प्रणाली के सामने रखेंगे।
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