चिमूर के मोठेगांव में पशुशाला में घुसा तेंदुआ, तीन बकरियां और एक बकरा मारे गए
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
चंद्रपुर जिले की चिमूर तहसील के मोठेगांव में बुधवार तड़के करीब दो बजे तेंदुआ एक पशुशाला में घुस गया। उसने आशीष सुधाकर सुकारे की पशुशाला में तीन बकरियों और एक बकरे को मार डाला। इस घटना से पशुपालक को आर्थिक नुकसान हुआ है और इलाके के लोगों में डर का माहौल है।
सुबह घटना का पता चलते ही गांव वालों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। वन विभाग को इसकी सूचना दी गई। उसके बाद वन विभाग के कर्मचारी और वनरक्षक पाटील घटनास्थल पर पहुंचे और उन्होंने पंचनामा किया।
बताया जा रहा है कि मोठेगांव परिसर में एक महीने के भीतर तेंदुए के हमले की यह तीसरी घटना है। बार-बार हो रहे हमलों से पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है। रात के वक्त अपने पालतू जानवरों को बचाना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
गांव के आसपास तेंदुए की हलचल बढ़ने को देखते हुए गांव वालों ने वन विभाग से मांग की है कि इलाके में गश्त बढ़ाई जाए, वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखी जाए और आगे ऐसी घटनाएं रोकने के लिए असरदार कदम उठाए जाएं। गांव वाले यह भी चाहते हैं कि वन विभाग तेंदुए की गतिविधियों का आकलन करे और जरूरी एहतियाती कदम उठाए। साथ ही प्रभावित पशुपालक को नियम के मुताबिक मुआवजा देने की मांग भी की जा रही है।
ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व समेत चंद्रपुर जिले के कई वन क्षेत्रों में बाघ, तेंदुए और दूसरे वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है। जंगलों से सटे गांवों में खेती और जंगल पर निर्भर जिंदगी के कारण कई बार इंसानों और वन्यजीवों का आमना-सामना हो जाता है। इसी वजह से लोगों पर हमले, पालतू जानवरों का शिकार और वन्यजीवों की हादसों में मौत जैसी घटनाएं सामने आती हैं।
खेतों में काम करते वक्त, जंगल से लघु वनोपज इकट्ठा करते समय या गांव के आसपास आते-जाते हुए ग्रामीणों का सामना वन्यजीवों से हो सकता है। दूसरी तरफ पालतू जानवरों पर हमले होने से ग्रामीण परिवारों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। इसलिए यह मुद्दा सिर्फ वन्यजीवों के संरक्षण का नहीं है, यह लोगों की सुरक्षा और गांव की रोजी-रोटी से भी जुड़ा है।
इस संघर्ष को कम करने के लिए वन विभाग और गांव वालों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। तेंदुए की हलचल वाले इलाकों में नियमित गश्त, जरूरत के हिसाब से कैमरा ट्रैप से निगरानी, गांव वालों को वक्त पर सूचना और सुरक्षा को लेकर जागरूकता जैसे उपाय अहम हैं।
पशुपालकों को भी चाहिए कि रात में अपने जानवर सुरक्षित और बंद पशुशालाओं में रखें। तेंदुआ दिखे तो उसका पीछा करने या उसे घेरने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। ऐसे में तुरंत वन विभाग को खबर देनी चाहिए। स्थानीय स्तर पर बेहतर तालमेल से संभावित खतरे कम करने में मदद मिल सकती है।
मोठेगांव में तेंदुए की बढ़ती हलचल और पालतू जानवरों पर हमलों से चिंता बनी हुई है। वन्यजीवों के संरक्षण के साथ गांव वालों की सुरक्षा और पशुधन की हिफाजत के लिए असरदार उपाय करना वक्त की जरूरत है।
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