छत्रपती संभाजीनगर में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 69 साल के रिटायर्ड कर्मचारी से 11 लाख की ठगी
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
छत्रपती संभाजीनगर में एक 69 साल के सेवानिवृत्त कर्मचारी को डिजिटल अरेस्ट में रखकर उनसे 11 लाख रुपये ऐंठ लिए गए। आरोप है कि उन्हें गिरफ्तारी का डर दिखाया गया। यह मामला 25 से 29 सितंबर के बीच हडको की नवजीवन कॉलनी में हुआ। इस बारे में सिडको पुलिस स्टेशन में साइबर ठगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
शिकायत बुजुर्ग ने खुद दी है। उनके मुताबिक वे जनवरी 2015 में महावितरण से सीनियर ऑपरेटर के पद से रिटायर हुए थे। वे पत्नी, दो बेटों, बहुओं और पोते-पोतियों के साथ रहते हैं।
25 सितंबर को सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे उनके पास एक अनजान नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने कहा कि वह डेटा प्रोटेक्शन अथॉरिटी ऑफ इंडिया से बोल रहा है। उसने बताया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल करके नाशिक के रेणुकानगर में एक सिम कार्ड खरीदा गया है। उस सिम कार्ड के आधार पर मुंबई की कैनरा बैंक में खाता खोला गया और उसमें करोड़ों रुपये जमा किए गए। फोन करने वाले ने यह भी कहा कि यह पैसा आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल हो रहा है। इस तरह उन्हें डराया गया।
कुछ ही मिनटों बाद उनके पास व्हाट्सऐप पर वीडियो कॉल आया। खाकी वर्दी पहने एक व्यक्ति ने खुद को नाशिक के पंचवटी पुलिस स्टेशन का इंस्पेक्टर संदीप राव बताया। इसके बाद एक दूसरे कथित अधिकारी ने आरोप लगाया कि बैंक खातों में अवैध पैसा जमा हुआ है और कहा कि उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। इस वीडियो कॉल के जरिए उन पर नजर भी रखी गई।
गिरफ्तारी से बचना हो तो 29 सितंबर को फिर वीडियो कॉल करने और सारी रकम एक ही खाते में जमा करने को कहा गया। उन्हें बताया गया कि आरबीआई के जरिए बैंक खातों की जांच होगी और इसमें उन्हें सहयोग करना पड़ेगा। सारे बैंक खातों, एफडी और आरडी की रकम एक जगह जमा करने को कहा गया। डर के मारे वे तैयार हो गए।
गिरफ्तारी के डर से उन्होंने सिडको एन-7 के पोस्ट ऑफिस में 10 लाख रुपये की एफडी तुड़वाई। रकम सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के अपने खाते में जमा करने के बाद उन्होंने ठगों के बताए कोटक महिंद्रा बैंक के खाते में 11 लाख रुपये आरटीजीएस से भेज दिए। उनसे कहा गया कि आठ से दस दिन में जांच पूरी होने पर पैसे लौटा दिए जाएंगे। आरबीआई के नाम की एक नकली रसीद भी दिखाई गई।
6 अक्टूबर को अखबार में डिजिटल अरेस्ट से जुड़ी एक खबर पढ़कर उन्हें अहसास हुआ कि उनके साथ भी इसी तरह धोखाधड़ी हुई है। इसके बाद उन्होंने सिडको पुलिस स्टेशन में शिकायत दी, जिसके आधार पर मामला दर्ज किया गया। मामले की आगे की जांच इंस्पेक्टर अतुल येरमे कर रहे हैं।