चंद्रपुर में चारे की कमी से निपटने की तैयारी, धान की कटाई हाथ से कराने पर जोर
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कलेक्टर वसुमना पंत ने सूखे जैसे हालात के बीच अभी से चारे का इंतजाम करने को कहा है। धान की कटाई हार्वेस्टर की जगह हाथ से करने की अपील की गई है।
चंद्रपुर जिले में सूखे जैसे हालात बने हुए हैं। इसे देखते हुए कलेक्टर वसुमना पंत ने कहा है कि जानवरों के लिए चारे की कमी का इंतजाम अभी से करना जरूरी है। चारा उत्पादन और प्रबंधन की योजना पर रखी गई समीक्षा बैठक में वे यह बोल रही थीं।
कलेक्टर पंत ने कहा कि धान की कटाई के बाद जो पुआल मिलता है, वह बेकार नहीं जाना चाहिए। उसका ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल जानवरों के चारे के तौर पर होना चाहिए। इसके लिए उन्होंने किसानों से अपील की कि हो सके तो हार्वेस्टर मशीन की जगह मजदूरों से धान कटवाएं। चारे के उत्पादन, संवर्धन और भंडारण के लिए सभी संबंधित विभागों को मिलकर काम करने के निर्देश भी उन्होंने दिए।
बैठक में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पुलकित सिंह, निवासी उपजिलाधिकारी दगडू कुंभार, जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी शंकर तोटावार और उपजिलाधिकारी संजय पवार मौजूद थे। पशुपालन उपायुक्त डॉ. सुरेश कुंभरे, मृदा और जल संरक्षण अधिकारी नीलिमा मंडपे और विभागीय वन अधिकारी राजन तलमले के साथ कई दूसरे विभागों के अधिकारी भी आए थे।
कलेक्टर ने बताया कि हार्वेस्टर से कटाई होने पर पुआल का बड़ा हिस्सा खेत में ही पड़ा रह जाता है, या फिर चारे के लिए उसका पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाता। हाथ से कटाई हो तो पुआल ठीक से इकट्ठा करके जानवरों को खिलाया जा सकता है। इसलिए किसानों को दोनों तरीकों का फर्क प्रत्यक्ष प्रदर्शन करके समझाया जाए।
इसकी शुरुआत प्रयोग के तौर पर पांच गांव चुनकर जागरूकता कार्यक्रम चलाने से होगी। उसके बाद हर तहसील के कम से कम दस गांवों में कृषि, पशुपालन, राजस्व, ग्राम विकास और वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मिलकर किसानों और पशुपालकों को मार्गदर्शन देंगे।
कलेक्टर पंत ने आगे कहा कि जो चारा उपलब्ध है, वह बर्बाद न हो, इसके लिए चारा कुट्टी मशीनों का ज्यादा इस्तेमाल हो। विदर्भ-मराठवाड़ा दुग्ध विकास परियोजना के तहत ज्यादा से ज्यादा किसानों और पशुपालकों को बिजली से चलने वाली चारा कुट्टी मशीनों का फायदा दिलाया जाए।
कम पानी में चारा उगाने के लिए उन्होंने हाइड्रोपोनिक तरीके से मक्के का चारा बनाने को बढ़ावा देने को कहा। जिन पशुपालकों के पास पानी सीमित है, उन्हें इस तकनीक का प्रत्यक्ष प्रदर्शन दिखाकर इसके फायदे समझाए जाएं। कलेक्टर ने यह भी निर्देश दिया कि आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और दृश्य-श्राव्य माध्यमों की मदद से किसानों में चारा उत्पादन को लेकर जागरूकता लाई जाए।
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