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04:18 IST

चंद्रपुर के पेट्रोल पंपों पर सुविधाएं नहीं, शिवसेना ने 7 दिन में कार्रवाई की मांग की

ग्राहक संरक्षण समिति और शिवसेना भारतीय कामगार संघटना ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।

चंद्रपुर के पेट्रोल पंपों पर सुविधाएं नहीं, शिवसेना ने 7 दिन में कार्रवाई की मांग की तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

चंद्रपुर जिले के पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाएं नहीं दी जा रहीं और उनसे खुलेआम पैसे वसूले जा रहे हैं। यह गंभीर मामला अब सामने आया है। आरोप है कि केंद्र और राज्य सरकार के साफ आदेशों और तेल कंपनियों के नियमों को ताक पर रख दिया गया है। इसके खिलाफ 'ग्राहक संरक्षण समिति' और 'शिवसेना भारतीय कामगार संघटना' की ओर से आज चंद्रपुर के जिलाधिकारी, जिला आपूर्ति अधिकारी और अन्न और औषध प्रशासन के सहायक आयुक्त को विस्तृत कानूनी ज्ञापन दिया गया। ज्ञापन में सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।

शिवसेना तालुका प्रमुख और ग्राहक संरक्षण समिति के जिलाध्यक्ष संतोष लिलाबाई दशरथ पारखी ने साफ चेतावनी दी है। उनका कहना है कि 7 दिन में दोषी पेट्रोल पंप चालकों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो जिलाधिकारी कार्यालय के सामने तीव्र धरना आंदोलन किया जाएगा। साथ ही हर पंप पर 'भगवी शिकायत पेटी' आंदोलन भी छेड़ा जाएगा।

ज्ञापन के मुताबिक पंप चालकों यानी डीलरों को लाइसेंस देते समय और प्रति लीटर अच्छा कमीशन देते समय ग्राहकों को 6 बुनियादी सुविधाएं मुफ्त, बिना रुकावट और साफ हालत में देना कानूनी तौर पर जरूरी है। इसका आधार पेट्रोलियम मंत्रालय की 'डीलर सिलेक्शन गाइडलाइन 2023', तेल कंपनियों के 'मार्केटिंग डिसिप्लिन गाइडलाइंस 2023' (MDG), यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन (USO) के आदेश, मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल आदेश 2005, आवश्यक वस्तु कानून 1955, वैधमापन विज्ञान कानून 2009 और ग्राहक संरक्षण कानून 2019 बताए गए हैं। नियम के हिसाब से सुविधा न देना 'अनुचित व्यापार प्रथा' (Unfair Trade Practice) के तहत गंभीर अपराध माना जाता है। ज्ञापन में कोझिकोड के ग्राहक आयोग का भी उदाहरण दिया गया है, जिसने सुविधा न देने वाले पंप पर 1 लाख 65 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।

ग्राहक संरक्षण समिति और शिवसेना की संयुक्त टीम ने वरोरा, बल्लारपुर, राजुरा, गोंडपिपरी, ब्रह्मपुरी और चंद्रपुर शहर के 50 से ज्यादा पेट्रोल पंपों की जाकर जांच की। ज्ञापन के मुताबिक इसमें कई चौंकाने वाली बातें मिलीं। करीब 99 प्रतिशत पंपों पर पीने का साफ पानी नहीं मिला, या वॉटर फिल्टर के नल पर ताला लगा मिला। महिला और पुरुषों के शौचालय बेहद गंदे और बदबूदार हालत में हैं। कई जगह 'बंद है' का बोर्ड लगाकर ताला जड़ दिया जाता है। खास तौर पर महिला ग्राहकों को शौचालय इस्तेमाल करने से सीधे मना कर दिया जाता है, जिसे ज्ञापन में मानवाधिकार का हनन बताया गया है।

सबसे बड़ी गड़बड़ी हवा को लेकर बताई गई है। कंपनियों की ओर से दिए गए मुफ्त एयर कंप्रेसर जानबूझकर बंद रखे जाते हैं और पंप के परिसर में ही निजी लोगों को जगह किराये पर दे दी गई है। वहां ग्राहकों से हवा के 10 से 30 रुपये गैरकानूनी तरीके से वसूले जा रहे हैं। ज्ञापन के मुताबिक यह ऐसा गंभीर अपराध है जिसमें लाइसेंस रद्द हो सकता है। इसके अलावा ग्राहक शिकायत दर्ज कराने के लिए 'शिकायत पुस्तिका' (Complaint Book) मांगें तो कर्मचारी गाली-गलौज कर उन्हें भगा देते हैं।

ज्ञापन में प्रशासन से चार मांगें की गई हैं। पहली, आपूर्ति विभाग, वैधमापन विज्ञान और संबंधित तेल कंपनी के अधिकारियों की तीन सदस्यों वाली संयुक्त समिति बनाकर 7 दिन में जिले के सभी पंपों की अचानक जांच की जाए। दूसरी, हर पंप पर साफ मराठी फलक लगाना जरूरी किया जाए, जिस पर लिखा हो कि यहां सारी जनसुविधाएं मुफ्त हैं और शिकायत हो तो टोल फ्री नंबर पर संपर्क करें। इसमें IOCL का 1800-2333-355, BPCL का 1800-22-4344 और HPCL का 1800-22-3030 नंबर दिया जाना है।

तीसरी मांग यह है कि पैसे लेकर हवा भरने वाले और सुविधा न देने वाले पंपों पर नियम के मुताबिक 50,0 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाए और पहले चरण में 15 दिन के लिए ईंधन की बिक्री और सप्लाई बंद की जाए। चौथी, की गई कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट 15 दिन में जनहित में प्रसार माध्यमों को लिखित में दी जाए।

इस मौके पर संतोष लिलाबाई दशरथ पारखी ने कहा, "पेट्रोल पंप चालकों को मिलने वाला कमीशन ग्राहकों को सेवा देने के लिए है, अपनी जेबें भरने के लिए नहीं। अगर 7 दिन में चंद्रपुर जिला प्रशासन ने इन लुटेरे पंप चालकों पर छापे मारकर सख्त कार्रवाई नहीं की, तो शिवसेना और ग्राहक संरक्षण समिति लोकतांत्रिक तरीके से जिलाधिकारी कार्यालय पर धरना आंदोलन करेगी। साथ ही जिले के हर पेट्रोल पंप पर 'भगवी शिकायत पेटी' लगाकर आंदोलन और तेज किया जाएगा।"

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