ब्रसेल्स में वाणिज्य सचिव की यूरोपियन कमीशन से बात, प्रस्तावित FTA को लागू करने की तैयारी
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वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने ब्रसेल्स में यूरोपियन कमीशन के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। बाजार तक पहुंच, सीमाशुल्क और सप्लाई चेन पर बात हुई।
भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच आर्थिक रिश्तों को नई दिशा देने के लिए ब्रसेल्स में उच्चस्तरीय बातचीत हुई है। भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल और यूरोपियन कमीशन के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हुई इन बैठकों में प्रस्तावित मुक्त व्यापार करार (FTA) को जमीन पर उतारने की तैयारी, बाजार तक पहुंच आसान बनाने और सीमाशुल्क में सहयोग बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा हुई। उम्मीद जताई जा रही है कि इससे भारत और यूरोपीय देशों के बीच व्यापार की तकनीकी अड़चनें दूर होंगी और दोनों अर्थव्यवस्थाओं को बड़ा फायदा मिलेगा।
30 अक्टूबर 2026 को ब्रसेल्स में भारतीय दूतावास और बिजनेसयूरोप (BusinessEurope) ने मिलकर एक खास बिजनेस राउंडटेबल रखा था। इसमें वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल और राजदूत प्रणय वर्मा ने बात रखी। अग्रवाल ने भारत की मजबूत आर्थिक ग्रोथ और निवेश के मौकों को एक बार फिर सामने रखा। दौरे के दौरान उन्होंने यूरोपियन कमीशन के प्रमुख महानिदेशकों से अलग से भी मुलाकात की।
इन मुलाकातों में डिट्टे जूल जॉर्गेनसेन भी थे, जो व्यापार और आर्थिक सुरक्षा महानिदेशालय के महानिदेशक हैं। उनके साथ दोनों तरफ का व्यापार आसान करने, बाजार तक पहुंच बेहतर बनाने, सप्लाई चेन को ज्यादा लचीला करने और भारतीय व यूरोपीय कंपनियों के लिए नए मौके बनाने पर सहमति बनी।
कर और सीमाशुल्क संघ महानिदेशालय के महानिदेशक गेरासिमॉस थॉमस के साथ हुई बैठक में सीमाशुल्क की प्रक्रिया को डिजिटल, पारदर्शी और तेज करने पर जोर दिया गया, ताकि व्यापारियों का लेन-देन का खर्च कम हो। अंतरराष्ट्रीय साझेदारी महानिदेशालय के महानिदेशक कोएन डोएन्स के साथ ग्रीन टेक्नोलॉजी, टिकाऊ विकास और साफ ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग पर बात हुई।
प्रस्तावित करार से भारतीय उत्पादकों के लिए यूरोप का बाजार ज्यादा आसान और सस्ता होगा। यूरोपियन यूनियन जाने वाले 99 प्रतिशत से ज्यादा भारतीय सामान पर आयात शुल्क पूरी तरह माफ किया जाएगा। इसका सीधा फायदा कपड़ा (Textile), चमड़े के सामान (Leather) और गहने बनाने वालों (Gems & Jewellery) को होगा, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार के मौके बनेंगे।
दूसरी तरफ, भारत भी यूरोप से आने वाले 96 प्रतिशत से ज्यादा सामान पर शुल्क धीरे-धीरे घटाएगा। इसमें यूरोपीय गाड़ियों पर आयात शुल्क सालाना 250,000 यूनिट के कोटे के साथ 10 प्रतिशत तक लाना भी शामिल है।
व्यापार की बातचीत के अलावा वाणिज्य सचिव ने एंटवर्प डायमंड इकोसिस्टम (Antwerp Diamond Ecosystem) के हीरा उद्योग के प्रमुख प्रतिनिधियों से भी अहम मुलाकात की। इसमें ग्लोबल डायमंड वैल्यू चेन, जिम्मेदार खरीद (Responsible Sourcing), सर्टिफिकेट की जरूरतों और भारत में बढ़ती हीरा प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग के मौकों पर बात हुई। मुंबई, सूरत और एंटवर्प जैसे दुनिया के हीरा केंद्रों के बीच सहयोग मजबूत करने पर दोनों पक्षों ने जोर दिया।
भारत और यूरोपियन यूनियन ने तय किया है कि करार को कामयाबी से लागू करने के लिए सीमाशुल्क की प्रक्रिया पूरी तरह आधुनिक और पारदर्शी बनाई जाएगी। माल की आवाजाही तेज हो और सीमाशुल्क के कागजात का काम आसान हो, इसके लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा। दोनों पक्षों ने न्याय्य, संतुलित और दोनों के लिए फायदेमंद करार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता फिर दोहराई है।
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