मंगलवार, 3 नवंबर 2026

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बोर्डा में आदिवासी आश्रमशालाओं के छात्रों की तीन दिन की परियोजना स्तरीय खेल प्रतियोगिता शुरू

बोर्डा में आदिवासी आश्रमशालाओं के छात्रों की तीन दिन की परियोजना स्तरीय खेल प्रतियोगिता शुरू तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
खेल PT24 टीम

एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना, चंद्रपुर की आश्रमशालाओं के 1058 खिलाड़ी छात्र बोर्डा की शासकीय आश्रमशाला में खेल रहे हैं। उद्घाटन मैच 17 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों की कबड्डी में बोर्डा केंद्र और देवाडा केंद्र के बीच खेला गया।

चंद्रपुर: एकात्मिक आदिवासी विकास परियोजना, चंद्रपुर के तहत चलने वाली आश्रमशालाओं के छात्रों की परियोजना स्तरीय खेल प्रतियोगिता आज (2 तारीख) शासकीय माध्यमिक तथा उच्च माध्यमिक आश्रमशाला, बोर्डा में शुरू हुई। जोश और शान-शौकत भरे माहौल में हुई इस शुरुआत का मकसद छात्रों के खेल कौशल को बढ़ावा देना है। साथ ही उनके शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास को भी आगे बढ़ाना है।

प्रतियोगिता का उद्घाटन अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी कल्पना क्षीरसागर के हाथों हुआ। अध्यक्षता एकात्मिक आदिवासी विकास परियोजना के परियोजना अधिकारी विकास राचेलवार ने की। प्रमुख अतिथि के तौर पर अधिष्ठाता डॉ. मिलिंद कांबळे, दंत और मुखरोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप पिपरे और उमेश कडू समेत कुछ और लोग मौजूद थे।

कार्यक्रम की शुरुआत ढोल-ताशों की गूंज और महाराष्ट्रीयन पारंपरिक अंदाज में हुई। इसके बाद दीप जलाया गया, महापुरुषों की तस्वीरों पर माला चढ़ाई गई और खेल ज्योत प्रज्वलित कर प्रतियोगिताओं के औपचारिक आगाज का ऐलान हुआ। अलग-अलग बीट से आए खिलाड़ी छात्रों ने अनुशासित मार्च पास्ट किया।

सेवा संकल्प अभियान के तहत 62 आश्रमशालाओं और छात्रावासों के करीब 8 हजार छात्रों की दांतों की जांच की गई थी। इसके लिए दंतरोग और मुखरोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप पिपरे का सम्मान किया गया।

शासकीय आश्रमशाला, बोर्डा के छात्रों ने आदिवासी पारंपरिक नृत्य पेश किया, जिसने मौजूद मेहमानों और दर्शकों का दिल जीत लिया। इस प्रस्तुति में आदिवासी समाज की समृद्ध लोककला, सांस्कृतिक परंपरा और लोकजीवन की सुंदर झलक दिखी।

प्रस्तावना रखते हुए परियोजना अधिकारी विकास राचेलवार ने खेल प्रतियोगिताओं की अहमियत समझाई। उन्होंने कहा कि पढ़ाई में आगे बढ़ने के साथ-साथ शारीरिक सेहत, मानसिक सेहत, अनुशासन और आत्मविश्वास भी उतने ही जरूरी हैं। उन्होंने छात्रों से नियमित कसरत करने, सही खानपान रखने और सेहतमंद जीवनशैली अपनाने की अपील की।

डॉ. मिलिंद कांबळे ने मार्गदर्शन में बताया कि खेल प्रतियोगिताओं और अंतर-परियोजना गतिविधियों से संस्कृति, अनुभव और ज्ञान का आदान-प्रदान होता है, और इससे छात्रों का व्यक्तित्व कैसे निखरता है। अध्यक्षीय भाषण में कल्पना क्षीरसागर ने कहा कि छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए ऐसे आयोजन और प्रतियोगिताएं लगातार होती रहनी चाहिए। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे सिर्फ जीतने के लिए नहीं, बल्कि नई चीजें सीखने, अपनी क्षमता पहचानने और खिलाड़ी भावना बनाए रखने के इरादे से हिस्सा लें।

उद्घाटन समारोह के बाद गणमान्य अतिथियों की मौजूदगी में उद्घाटन मैच खेला गया। यह 17 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों की कबड्डी प्रतियोगिता में बोर्डा केंद्र और देवाडा केंद्र के बीच था। तीन दिन के इस खेल महोत्सव में कुल 1058 खिलाड़ी छात्र शामिल हैं। उनके इंतजाम के लिए करीब 200 अधिकारी-कर्मचारी और सहायक मानव संसाधन लगा हुआ है।

आयोजन सहायक परियोजना अधिकारी राजीव बोंगीरवार (शिक्षा) के मार्गदर्शन में हुआ। परियोजना खेल समन्वयक सुरेश श्रीरामे ने प्रतियोगिताओं की योजना और तालमेल की जिम्मेदारी संभाली। कार्यक्रम का संचालन अनुराधा लाड ने किया और रामदास खवशी ने आभार माना।

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