बीडीडी चॉल पुनर्विकास: ना. म. जोशी मार्ग के 557 निवासियों को मिली नए घरों की चाबी
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने म्हाडा की ना. म. जोशी मार्ग-लोअर परेल बीडीडी चाल परियोजना के पहले चरण की तीन इमारतों के 557 पात्र निवासियों को फ्लैट सौंपे।
मुंबई की बीडीडी चॉलों में रहने वाले 557 पात्र निवासियों को अब उनके नए फ्लैट मिल गए हैं। महाराष्ट्र गृहनिर्माण और क्षेत्र विकास प्राधिकरण यानी म्हाडा की ना. म. जोशी मार्ग-लोअर परेल बीडीडी चॉल पुनर्विकास परियोजना के पहले चरण में तीन पुनर्वास इमारतें बनकर तैयार हुई हैं। इन्हीं इमारतों के फ्लैटों की चाबी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों बांटी गई।
कार्यक्रम मुंबई के यशवंतराव चव्हाण सेंटर में हुआ। वहां मुख्यमंत्री फडणवीस और दूसरे मान्यवरों ने प्रतीक के तौर पर ग्यारह निवासियों को चाबी और कब्जा पत्र सौंपे।
फडणवीस ने कहा कि राज्य सरकार बीडीडी चॉलों समेत कई पुनर्विकास परियोजनाओं के जरिए असली मुंबईवासियों और लंबे समय से शहर में रह रहे लोगों को उसी जगह बड़ा, खुला और अपना घर देने के लिए काम कर रही है। उनके मुताबिक मुंबई की संस्कृति को संभालने वालों को घर देकर संतोष मिला है और असली मुंबईवासियों को मुंबई से बाहर नहीं होने दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने बीडीडी चॉलों का पुनर्विकास प्राइवेट डेवलपरों की जगह म्हाडा से कराने का फैसला किया। इसी वजह से एशिया में शहरी पुनरुत्थान की यह सबसे बड़ी परियोजना जमीन पर उतर रही है। उन्होंने कहा कि चॉल वालों को अच्छे घर देते वक्त सरकार का मकसद मुनाफा कमाना नहीं है। ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं देने को तरजीह दी जा रही है।
फडणवीस ने बीडीडी चॉल के इतिहास का भी जिक्र किया। उनके अनुसार इस चॉल ने कई बदलाव देखे हैं और संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के साथ मुंबई के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और मजदूर आंदोलनों का दौर भी देखा है। यह चॉल ऐतिहासिक विरासत है, क्योंकि भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर और लोकमान्य तिलक यहां रहे थे।
पुनर्विकास का मामला कई साल से अटका हुआ था। कई डेवलपरों के प्रस्ताव आ रहे थे, लेकिन इतने बड़े पुनर्विकास की अड़चनों के कारण काम को उम्मीद के मुताबिक रफ्तार नहीं मिल रही थी। सिर्फ प्राइवेट डेवलपरों के भरोसे परियोजना पूरी होना मुश्किल देखकर म्हाडा को ही डेवलपर बनाने का फैसला हुआ। इसके बाद 2017-18 से काम शुरू हुआ। फडणवीस ने कहा कि बीच में कुछ रुकावटें आईं, मगर काम को बंद नहीं होने दिया गया और उसे फिर रफ्तार दी गई।
बीडीडी चॉलों में कई परिवार करीब 160 वर्ग फुट के ऐसे घरों में दो से तीन पीढ़ियों के साथ रहते थे, जहां बुनियादी सुविधाओं की कमी थी। सरकार ने इन निवासियों को सारी सुविधाओं वाले 500 वर्ग फुट के घर देने का रुख अपनाया है। नए फ्लैटों में बैठक कक्ष यानी लिविंग रूम, दो बेडरूम और जरूरी सुविधाएं दी जा रही हैं। फडणवीस ने भरोसा जताया कि ये घर परिवारों की अगली पीढ़ियों के लिए भी मजबूत सहारा बनेंगे।
पुलिस कर्मचारियों के लिए भी उन्होंने बात रखी। बीडीडी चॉलों में लंबे समय से रह रहे, 2011 से पहले के पात्र पुलिस कर्मचारियों को 15 लाख रुपये में घर देने का फैसला कायम है। 2011 के बाद की कटऑफ की वजह से जो कुछ पुलिस कर्मचारी पात्र नहीं ठहरते, उन्हें भी विशेष मामला मानकर निर्माण लागत में घर देने का फैसला हुआ है। फडणवीस ने साफ किया कि इस फैसले को लागू करते समय कीमत को लेकर जो फर्क और दिक्कतें आई हैं, उन्हें दूर करने के लिए बैठक करके सही रास्ता निकाला जाएगा।
आखिर में मुख्यमंत्री ने निवासियों से अपील की कि चाबी मिलने के बाद वे इन घरों को अपने परिवार की संपत्ति समझकर संभालें और पीढ़ियों की शान मानें। उन्होंने कहा कि अच्छी कीमत मिल रही हो, तब भी घर न बेचें और अगली दो-तीन पीढ़ियों के लिए यह विरासत बचाकर रखें।
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