भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता लागू, भारतीय सामान को बिना टैक्स एंट्री
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता मंगलवार 20 अक्टूबर से लागू हो गया है।
भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता मंगलवार, 20 अक्टूबर से लागू हो गया है। भारत इन दिनों दुनिया भर में अपनी जगह मजबूत करने की कोशिश में है, और अलग-अलग समझौतों में यही कोशिश दिख रही है। यह समझौता सिर्फ न्यूजीलैंड के लिए नहीं, बल्कि भारत के लिए भी काफी फायदेमंद बताया गया है। इससे कई उद्योगों को बढ़ावा मिलने की बात कही जा रही है।
इस समझौते के तहत कपड़ा, चमड़े का सामान और जूते-चप्पल जैसे सेक्टरों के प्रोडक्ट समेत कई भारतीय सामान को न्यूजीलैंड के बाजार में बिना टैक्स के एंट्री मिलेगी। समझौते के मुताबिक भारतीय निर्यात की सभी टैरिफ कैटेगरी को पहले दिन से ही टैक्स फ्री एंट्री दी गई है। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री ने इस समझौते को ऐतिहासिक कहा है।
यह पिछले पांच साल में लागू हुआ भारत का सातवां व्यापार समझौता है। इससे पहले भारत संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE, मॉरीशस, यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन, यूनाइटेड किंगडम, ओमान और ऑस्ट्रेलिया के साथ व्यापार समझौते लागू कर चुका है। न्यूजीलैंड के साथ समझौता लागू होने से देश के प्रभावी मुक्त व्यापार समझौतों की गिनती 17 हो गई है।
दोनों देशों ने इस समझौते पर 27 अप्रैल 2026 को दस्तखत किए थे। बातचीत 2010 में शुरू हुई थी, लेकिन 2015 में रुक गई। मार्च 2025 में दोनों देशों ने फिर से बातचीत शुरू की, जिसके बाद यह समझौता फाइनल हुआ।
जानकारों के मुताबिक इस समझौते से कपड़ा और तैयार कपड़े, चमड़े का सामान और जूते-चप्पल, इंजीनियरिंग प्रोडक्ट, गाड़ियों के स्पेयर पार्ट, रत्न और गहने, खेती और खाने के प्रोडक्ट, दवा उद्योग और बाकी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टरों को फायदा होने की उम्मीद है। भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में मुकाबले में बढ़त मिल सकती है। खासकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के लिए नए मौके बन सकते हैं।
डेलॉइट इंडिया के पार्टनर गुलजार दिडवानिया ने कहा कि इस समझौते से भारत में सीधे विदेशी निवेश बढ़ने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि न्यूजीलैंड ने अगले 15 साल में भारत में 20 अरब अमेरिकी डॉलर के सीधे विदेशी निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। दिडवानिया के मुताबिक कुछ खास कच्चे माल पर शुल्कमुक्त एंट्री, आसान सीमाशुल्क प्रक्रिया और निवेश बढ़ाने वाले इंतजामों से दोनों देशों की वैल्यू चेन का एकीकरण मजबूत हो सकता है। इससे निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनाने में भी मदद मिलेगी।
दिडवानिया ने यह भी कहा कि यह समझौता सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है, रणनीतिक नजरिए से भी अहम है। उनके मुताबिक इससे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की स्थिति मजबूत होगी और विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ मुक्त व्यापार समझौतों का जाल और फैलेगा।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।