बार-बार शरीर पर पित्ती उठे तो जरूरी नहीं कि अॅलर्जी हो, CSU भी हो सकता है
ठाणे के किम्स हॉस्पिटल्स की डर्माटोलॉजिस्ट डॉ. विशालाक्षी विश्वनाथ ने क्रॉनिक स्पॉन्टेनियस अर्टिकारिया (CSU) के बारे में बताया है।
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शरीर पर पित्ती उठती है तो आदमी सबसे पहले उसकी वजह ढूंढता है। शक होता है कि कोई खाने की चीज, कोई दवा या त्वचा पर लगा कोई प्रोडक्ट इसके पीछे होगा। लेकिन कोई साफ वजह या ट्रिगर न हो, फिर भी पित्ती बार-बार उठती रहे, तब क्या? इसी पर ठाणे के किम्स हॉस्पिटल्स की कंसल्टेंट डर्माटोलॉजिस्ट डॉ. विशालाक्षी विश्वनाथ ने क्रॉनिक स्पॉन्टेनियस अर्टिकारिया यानी CSU के बारे में जानकारी दी है।
डॉ. विश्वनाथ के मुताबिक क्रॉनिक अर्टिकारिया में छह हफ्ते से ज्यादा वक्त तक शरीर पर पित्ती उठती रहती है, सूजन आती है या दोनों तकलीफें बार-बार होती हैं। इसी का एक प्रकार CSU (सीएसयू) है, जिसमें कोई बाहरी वजह या ट्रिगर न होने पर भी ये लक्षण अचानक दिखने लगते हैं। यह किसी खास चीज से जुड़ी एलर्जी की प्रतिक्रिया से अलग होता है। इस फर्क को वक्त पर पहचानना बहुत अहम है, क्योंकि इससे सही इलाज और लक्षणों को असरदार तरीके से संभालने में मदद मिलती है।
डॉ. विश्वनाथ ने कहा, "शरीर पर बार-बार पित्ती उठना हर बार एलर्जी का लक्षण हो, ऐसा जरूरी नहीं। कोई साफ वजह न होने पर भी लक्षण लगातार दिखते रहें या फिर-फिर उभरें, तो इसके पीछे क्रॉनिक स्पॉन्टेनियस अर्टिकारिया संभावित वजह हो सकती है। डर्माटोलॉजिस्ट की सलाह लेने से इन लक्षणों की असली वजह खोजना और इलाज की सही दिशा तय करना मुमकिन होता है। खासकर बार-बार उठने वाली यह पित्ती नींद में खलल डालने लगे, बेचैनी बढ़ाए या रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डालने लगे, तब वक्त पर मेडिकल सलाह लेना बहुत जरूरी हो जाता है।"
डॉ. विश्वनाथ ने इस बात को समझने के लिए पांच अहम बातें बताई हैं। पहली बात यह कि पित्ती उठने का मतलब हर बार एलर्जी नहीं होता। पित्ती में त्वचा पर अचानक लाल, खुजली वाले चकत्ते बन जाते हैं, जो शरीर के किसी भी हिस्से पर दिख सकते हैं। यह एलर्जी की प्रतिक्रिया से हो सकता है, लेकिन CSU का भी मुख्य लक्षण है, जिसमें कोई बाहरी वजह न होने पर भी तकलीफ होती है।
इसलिए बार-बार पित्ती उठे तो यह मान लेना ठीक नहीं कि यह किसी खास खाने की चीज, प्रोडक्ट या माहौल की वजह से हो रहा है। डॉ. विश्वनाथ के मुताबिक लक्षणों का स्वरूप और मरीज की मेडिकल हिस्ट्री देखकर हेल्थ एक्सपर्ट सही अंदाजा लगा सकते हैं कि असल दिक्कत क्या है।
दूसरी बात छह हफ्ते की मियाद है। पित्ती की तकलीफ छह हफ्ते से ज्यादा लगातार रहे, तब उसे क्रॉनिक अर्टिकारिया माना जाता है। CSU में त्वचा के चकत्ते आमतौर पर 24 घंटे के अंदर गायब हो जाते हैं, पर शरीर के दूसरे हिस्से पर नए चकत्ते उभर सकते हैं। इसलिए दो बार की तकलीफ के बीच त्वचा बिल्कुल सामान्य दिखे, तब भी बीमारी शरीर में चालू रह सकती है। पित्ती कब उठती है, कितनी देर रहती है और साथ में सूजन आती है या नहीं, इसका नियमित नोट रखा जाए तो डॉक्टर से सलाह के वक्त यह जानकारी जांच के लिए काम की साबित होती है।
तीसरी बात यह कि वजह की तलाश थका देने वाली हो सकती है। लक्षण बार-बार लौटते हैं तो लोग तकलीफ दोबारा न हो, इसके लिए खान-पान बदलने, स्किनकेयर प्रोडक्ट बदलने या रोज की आदतें छोड़ने लगते हैं। लेकिन CSU में ऐसा कोई तय बाहरी कारक या ट्रिगर नहीं होता, जिसे ढूंढा या टाला जा सके। कुछ चीजों से कुछ लोगों में लक्षण ज्यादा तेज हो सकते हैं, पर इसका मतलब यह नहीं कि वही चीजें समस्या की जड़ हैं। डर्माटोलॉजिस्ट देख सकते हैं कि आगे और जांच की जरूरत है या नहीं, और मरीजों को गैरजरूरी पाबंदियों से बचने में मदद कर सकते हैं।
चौथी बात, CSU का असर सिर्फ त्वचा तक सीमित नहीं रहता। लगातार खुजली से नींद टूट सकती है, दिन में थकान लग सकती है और काम पर ध्यान देना या रोजमर्रा के काम संभालना मुश्किल हो सकता है। शरीर पर साफ दिखते चकत्ते या सूजन की वजह से दूसरों के बीच जाने में बेचैनी या हीन भावना भी आ सकती है। लक्षण फिर कब उभरेंगे, इसकी अनिश्चितता मानसिक तनाव और बढ़ा सकती है। CSU सिर्फ त्वचा के बाहरी रूप पर नहीं, पूरी जीवनशैली की क्वालिटी और मानसिक सेहत पर भी असर डाल सकता है।
पांचवीं बात, सटीक डायग्नोसिस से इलाज की दिशा तय होती है। बार-बार पित्ती उठने के पीछे अलग-अलग वजहें हो सकती हैं, इसलिए सही इलाज के लिहाज से असल समस्या पहचानना जरूरी कदम है। डर्माटोलॉजिस्ट या एलर्जिस्ट लक्षणों की अवधि और स्वरूप जांचकर और मेडिकल हिस्ट्री देखकर तय कर सकते हैं कि आगे जांच की जरूरत है या नहीं।
CSU का इलाज मुख्य रूप से लक्षणों को काबू में रखने पर केंद्रित होता है। यह इलाज मेडिकल जांच और इलाज पर शरीर के रिस्पॉन्स पर निर्भर करता है। जब कोई साफ एलर्जी वजह नहीं होती, तब सिर्फ शक वाली चीजों से बार-बार बचने से लक्षण पूरी तरह नहीं रुकते।
कुल मिलाकर, बार-बार उठने वाली पित्ती को गंभीरता से लेना चाहिए, खासकर तब जब यह तकलीफ कई हफ्तों तक बनी रहे या बिना किसी साफ वजह के फिर-फिर उभरे। हर बार की तकलीफ को सिर्फ एलर्जी मान लेने के बजाय लक्षणों का स्वरूप समझकर डर्माटोलॉजिस्ट से सही जांच करा लेना मरीजों को इन लक्षणों को ज्यादा असरदार तरीके से संभालने की दिशा में मदद कर सकता है।