मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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19:46 IST

बँकों की तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल टली, यूनियनों और IBA की देर रात बैठक के बाद फैसला

28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित बैंक हड़ताल आखिरी वक्त पर वापस, ग्राहकों को राहत, मगर पांच दिन काम के हफ्ते और पेंशन जैसी मांगें अभी बाकी

बँकों की तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल टली, यूनियनों और IBA की देर रात बैठक के बाद फैसला
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

बैंक में खाता रखने वालों के लिए राहत की खबर है। देश भर के बैंक कर्मचारी 28 सितंबर से तीन दिन की हड़ताल पर जाने वाले थे, लेकिन हड़ताल शुरू होने के ठीक एक दिन पहले कर्मचारी यूनियनों की बैठक हुई और 28 से 30 सितंबर के बीच प्रस्तावित यह हड़ताल टालने का फैसला ले लिया गया।

यह फैसला इंडियन बैंक्स एसोसिएशन यानी IBA और यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस यानी UFBU के बीच देर रात हुई बैठक में हुआ। इस बैठक में बैंक कर्मचारियों की अलग-अलग मांगों पर बातचीत हुई, जिसके बाद 28 सितंबर से शुरू होने वाली तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल को स्थगित करने पर सहमति बनी।

हालांकि इस बैठक में कर्मचारियों की सारी मांगों पर कोई पक्का हल निकला है या नहीं, इसकी पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। यानी हड़ताल भले टल गई हो, लेकिन कर्मचारियों की मांगों का मसला पूरी तरह सुलझा है या नहीं, इस पर सबकी नजर बनी हुई है।

यूनियनों की सबसे बड़ी मांगों में एक है पांच दिन का कामकाजी हफ्ता लागू करना। इसके लिए बैंक कर्मचारी यूनियनें काफी समय से मांग उठा रही हैं। मुख्य श्रम आयुक्त के साथ हुई बातचीत में सरकार की तरफ से इस मांग पर कोई ठोस भरोसा नहीं मिला, ऐसा यूनियनों का कहना था।

AIBOC के महासचिव रुपम रॉय ने सरकार और बैंक प्रबंधन के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा था कि इसी वजह से आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। वहीं NCBE के महासचिव एल. चंद्रशेखर ने यह बात रखी थी कि केंद्र और राज्य सरकार के दफ्तरों, RBI, LIC, GIC और NABARD जैसी संस्थाओं में पहले से ही पांच दिन का कामकाजी हफ्ता लागू है।

यूनियनों की मांगों में सिर्फ पांच दिन का हफ्ता ही नहीं, पेंशन से जुड़े कई मुद्दे भी शामिल हैं। इनमें पेंशन के फायदों में सुधार, सभी पेंशनधारकों के लिए एक जैसी महंगाई भत्ता नीति और NPS के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना में लौटने का विकल्प देने की मांग शामिल है।

सितंबर का चौथा शनिवार होने की वजह से उस दिन बैंक बंद थे, इसलिए ग्राहकों को दिक्कत न हो इसके लिए रविवार को बैंकों का कामकाज चालू रखा गया था। अगर हड़ताल हो जाती तो 28 से 30 सितंबर के बीच फिर से बैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका थी। चेक क्लियरेंस, नकद जमा करने और निकालने जैसी कुछ सेवाएं प्रभावित हो सकती थीं। इस प्रस्तावित हड़ताल का असर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, पुराने प्राइवेट बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों पर पड़ने की आशंका जताई गई थी। अब हड़ताल टलने से ग्राहकों को बड़ी राहत मिली है।

इस बीच वित्त मंत्रालय ने बैंक कर्मचारियों से हड़ताल का रास्ता न अपनाकर बातचीत से मसले सुलझाने की अपील की थी। मंत्रालय ने यह भी बताया था कि PLI योजना को लेकर लंबी चर्चा के बाद सितंबर की शुरुआत में ही फैसला लिया जा चुका है। फिलहाल 28 से 30 सितंबर की बैंक हड़ताल भले टल गई हो, लेकिन पांच दिन के कामकाजी हफ्ते, पेंशन सुधार और NPS सहित बाकी मांगों पर आगे क्या फैसला होता है, इस पर बैंक कर्मचारियों और ग्राहकों दोनों की नजर टिकी है।

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