बाणेर-वाकड के बाद पश्चिम पुणे का नया रियल एस्टेट ठिकाना बना म्हालुंगे
हिंजवडी के पास बसा म्हालुंगे घर खरीदारों और बिल्डरों की पहली पसंद बन रहा है।
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करीब दस साल पहले पश्चिम पुणे और पिंपरी-चिंचवड की सीमा के आसपास अपना घर लेने का सपना देखने वालों के पास बाणेर, बालेवाडी या वाकड जैसे गिने-चुने विकल्प ही होते थे। पिछले कुछ सालों में शहर का दायरा तेजी से फैला है और अब म्हालुंगे का नाम घर खरीदने वालों के साथ-साथ बिल्डरों की जुबान पर भी सबसे आगे है।
हिंजवडी आईटी हब का विस्तार, आने-जाने का मजबूत जाल और टाउनशिप खड़ी करने के लिए उपलब्ध बड़े प्लॉट, इन वजहों से म्हालुंगे पश्चिमी पट्टे के नए रिहायशी केंद्र के रूप में आकार ले रहा है। बाणेर-वाकड के बाद इसे पश्चिम पुणे का नया रियल एस्टेट हॉटस्पॉट कहा जा रहा है।
म्हालुंगे के तेजी से बदलने के पीछे सबसे बड़ी वजह इसकी लोकेशन है। एशिया के सबसे बड़े आईटी केंद्रों में से एक हिंजवडी के ठीक पास यह इलाका बसा है। मुंबई-बंगलुरु राष्ट्रीय महामार्ग से सीधा कनेक्शन है और बाणेर, बालेवाडी तथा वाकड जैसे विकसित इलाकों से जोड़ने वाली अंदरूनी सड़कों की वजह से यहां से आना-जाना आसान हो गया है।
वाकड और बाणेर जैसे जमे-जमाए इलाकों में निर्माण की घनत्व बहुत बढ़ गई है, इसलिए नए प्रोजेक्ट के लिए जगह की कमी महसूस हो रही है। ऐसे में म्हालुंगे में अब भी बड़े प्लॉट मिल रहे हैं। इसी वजह से बड़े बिल्डर एक ही परिसर में आधुनिक लाइफस्टाइल और सुनियोजित सुविधाएं देने वाले बड़े प्रोजेक्ट खड़े कर पा रहे हैं।
बिल्डिंग सेक्टर की गेरा पुणे रेसिडेंशियल रियल एस्टेट रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिमोत्तर पुणे और पिंपरी-चिंचवड से लगे पट्टे में, यानी हिंजवडी, वाकड, रावेत, किवळे और म्हालुंगे में, घर खरीदी में बड़ी तेजी दर्ज हुई है। जनवरी से जून 2026 के छह महीनों में इस पूरे पट्टे में 12 हजार 120 घर बिके। पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले इसमें 29 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
दामों का ग्राफ भी ऊपर गया है। रिपोर्ट के अनुसार पांच साल में घरों के दाम में 45 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। साल 2021 में म्हालुंगे इलाके में घरों का औसत दाम 6 हजार 298 रुपये प्रति वर्ग फुट था। साल 2026 की दूसरी तिमाही तक यह दाम 9 हजार 145 रुपये प्रति वर्ग फुट तक पहुंच गया है।
आम भाषा में कहें तो साल 2021 में औसतन 1 हजार वर्ग फुट के घर के लिए ग्राहक को करीब 63 लाख रुपये चुकाने पड़ते थे। वही घर आज करीब 91 लाख रुपये की कीमत पर पहुंच गया है।
इलाके की रफ्तार को इंफ्रास्ट्रक्चर से भी ताकत मिली है। हिंजवडी से शिवाजीनगर के बीच शुरू होने वाली पुणे मेट्रो लाइन क्रमांक 3 से हिंजवडी का रोजगार केंद्र शहर के बीच के हिस्से से जुड़ेगा। म्हालुंगे सीधे इसी कॉरिडोर के पास है, इसलिए यहां के लोगों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट का तेज और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प मिल रहा है।
सिर्फ चार दीवारों के घर बनाने की बजाय इस इलाके में शैक्षणिक संस्थाएं, आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं, कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, मनोरंजन केंद्र और चौड़ी अंदरूनी सड़कों का जाल तेजी से खड़ा हो रहा है। नतीजा यह कि म्हालुंगे की पहचान सिर्फ उपनगर की नहीं रह गई, वह एक आत्मनिर्भर रिहायशी इकोसिस्टम में बदल रहा है।
फिलहाल इस इलाके में वीटीपी रियल्टी और गोदरेज प्रॉपर्टीज जैसे राष्ट्रीय स्तर के डेवलपरों के बड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट बन चुके हैं। वीटीपी बेलिसिमो, वीटीपी टाउन स्क्वेयर, वीटीपी एथेरियस के साथ गोदरेज हिलसाइड एस्टेट और मेडोज जैसे प्रोजेक्ट से इलाके का चेहरा पूरी तरह बदल गया है।
पीएमआरडीए के तहत पहली हाय-टेक टाउनशिप योजना की वजह से यहां सुनियोजित विकास हो रहा है। पुरानी शहरी बस्तियों के मुकाबले म्हालुंगे नई पीढ़ी, खासकर आईटी कर्मचारियों की लाइफस्टाइल के हिसाब से हाय-टेक टाउनशिप के रूप में पहचान बना रहा है। इसमें शक नहीं कि आने वाले समय में पश्चिमी पट्टे में निवेश और रिहाइश का यह प्रमुख केंद्र बनेगा।