बालों के झड़ने के पीछे पोषण की कमी भी बड़ी वजह, जानें कौन से तत्व जरूरी
डाइट में आयरन, विटामिन डी, प्रोटीन और जिंक की कमी बालों को कमजोर कर सकती है, एक्सपर्ट्स का कहना है कि कारण जाने बिना सप्लीमेंट लेना नुकसानदेह भी हो सकता है।
बाल पतले होने लगें तो ज्यादातर लोग सीधे स्ट्रेस या जेनेटिक्स को दोष दे देते हैं। लेकिन एक वजह ऐसी भी है जो अक्सर नजरअंदाज हो जाती है - आपकी डाइट, यानी आप क्या खा रहे हैं और क्या नहीं खा पा रहे। पोषण की कमी हमेशा साफ लक्षणों के साथ सामने नहीं आती। कई बार पहला इशारा यही होता है कि बाल पहले से ज्यादा टूटने लगते हैं, झड़ना बढ़ जाता है, या फिर बढ़ना ही धीमा पड़ जाता है।
बालों की जड़ें यानी हेयर फॉलिकल शरीर के सबसे ज्यादा मेटाबॉलिकली एक्टिव हिस्सों में गिने जाते हैं। हर बाल को बनाने और बनाए रखने के लिए इन्हें लगातार पोषक तत्वों की जरूरत पड़ती है। जब शरीर पर पोषण का दबाव आता है - चाहे वो सख्त डाइटिंग की वजह से हो, खाना ठीक से अब्जॉर्ब न होने से हो, या सीधी कमी से हो - तो शरीर पहले जरूरी अंगों को संसाधन भेजता है। बालों की ग्रोथ को पीछे धकेल दिया जाता है। यह कोई बीमारी नहीं, बल्कि शरीर का एक तर्कसंगत फैसला है। यही वजह है कि पोषण की कमी से होने वाला हेयर लॉस अक्सर धीरे-धीरे, पूरे सिर में फैला हुआ और शुरुआत में पकड़ में न आने वाला होता है।
आयरन की कमी बालों के झड़ने की सबसे आम वजहों में से एक है, खासकर महिलाओं में। लेकिन जो बात ज्यादातर लोग मिस कर देते हैं वो यह है कि इसके लिए क्लिनिकली एनीमिक होना जरूरी नहीं। फेरिटिन, जो आयरन का स्टोर किया हुआ रूप होता है, अगर कम हो जाए तो सामान्य ब्लड टेस्ट में हीमोग्लोबिन नॉर्मल दिखने पर भी बाल झड़ सकते हैं। फेरिटिन सीधे तौर पर बालों के ग्रोथ साइकल में भूमिका निभाता है। इसका लेवल गिरने पर फॉलिकल्स समय से पहले ग्रोथ फेज (एनाजन) से रेस्टिंग फेज (टेलोजन) में चले जाते हैं, जिससे करीब दो से तीन महीने बाद झड़ना बढ़ जाता है। यह देरी से आने वाला असर ही इसे समझना मुश्किल बना देता है। दाल, हरी पत्तेदार सब्जियां, रेड मीट और फोर्टिफाइड सीरियल्स आयरन लेवल को सपोर्ट करते हैं। आयरन वाली चीजों के साथ विटामिन सी लेने से उसका अब्जॉर्प्शन काफी बेहतर हो जाता है।
विटामिन डी सिर्फ हड्डियों के लिए ही नहीं, नए हेयर फॉलिकल बनाने और ग्रोथ साइकल को नियंत्रित करने में भी काम आता है। फॉलिकल सेल्स में विटामिन डी के रिसेप्टर्स पाए जाते हैं, यानी इसकी कमी सीधे इन सेल्स के काम पर असर डालती है। यह बात इसलिए भी अहम है क्योंकि विटामिन डी की कमी बेहद आम है, खासकर उन लोगों में जो ज्यादातर समय घर के अंदर रहते हैं, कम धूप वाले इलाकों में रहते हैं, या जिनकी त्वचा का रंग गहरा है। रिसर्च में यह बात लगातार सामने आई है कि विटामिन डी का कम लेवल एलोपेसिया एरियाटा और आम तौर पर बाल पतले होने की समस्या से जुड़ा है।
बाल लगभग पूरी तरह से केराटिन नाम के प्रोटीन से बने होते हैं। अगर डाइट में प्रोटीन लगातार कम रहे, तो शरीर के पास बाल बनाने के लिए कच्चा माल कम पड़ जाता है। यही वजह है कि क्रैश डाइट या लंबे समय तक कम कैलोरी वाली डाइट लेने से कुछ ही महीनों में बाल झड़ने लगते हैं। जिंक एक ऐसा मिनरल है जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। यह फॉलिकल्स के आसपास ऑयल ग्लैंड को सही रखने और प्रोटीन बनाने में मदद करता है। इसकी कमी से बाल रूखे और भंगुर हो सकते हैं, और गंभीर मामलों में असली हेयर लॉस भी हो सकता है। बी विटामिन्स में बायोटिन को सबसे ज्यादा तवज्जो मिलती है, लेकिन बी12 और फोलेट शायद उससे भी ज्यादा जरूरी हैं। दोनों रेड ब्लड सेल बनाने में शामिल होते हैं, जिससे तय होता है कि स्कैल्प तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व कितनी अच्छी तरह पहुंच रहे हैं। वेजिटेरियन और वीगन लोगों में बी12 की कमी का खतरा ज्यादा रहता है क्योंकि यह मुख्य रूप से नॉन-वेज चीजों में ही पाया जाता है।
असली वजह जाने बिना हेयर लॉस का इलाज करना अक्सर काम नहीं करता। यह जाने बिना कि कमी किस चीज की है, सप्लीमेंट लेना कई बार फायदे की जगह नुकसान कर सकता है - जैसे ज्यादा आयरन या विटामिन ए लेने से बाल झड़ना रुकने की बजाय बढ़ भी सकता है। इसीलिए किसी भी इलाज से पहले टारगेटेड ब्लड पैनल कराना, बैलेंस्ड डाइट लेना और अंदाजा लगाने की बजाय असली कमी को पहचानकर उसे दूर करना ही सबसे सही तरीका है। बाल अक्सर शरीर में किसी गहरी दिक्कत का सबसे पहला दिखने वाला इशारा होते हैं, और इस इशारे को गंभीरता से लेना जरूरी है।