शरीर के ऊतकों को ऑक्सीजन न मिले तो क्या होता है, हायपोक्सिया के लक्षण और कारण
शरीर के ऊतकों तक जरूरत भर प्राणवायू न पहुंचने की स्थिति को हायपोक्सिया कहते हैं। दमा, न्यूमोनिया, हृदयविकार और रक्तक्षय इसके कारणों में गिनाए गए हैं।
शरीर की हर पेशी को ठीक से काम करने के लिए प्राणवायू यानी ऑक्सीजन की जरूरत होती है। दिमाग, हृदय, फेफड़े और किडनी जैसे अहम अंगों को इसकी जरूरत और भी ज्यादा रहती है। जब शरीर के ऊतकों को जरूरत जितनी प्राणवायू नहीं मिलती, तो इस हालत को हायपोक्सिया कहा जाता है।
यह हालत छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक किसी को भी हो सकती है। कई बार यह अचानक पैदा हो जाती है। फेफड़े या हृदय की लंबे समय से चली आ रही बीमारियों में यह धीरे-धीरे भी बढ़ सकती है।
हायपोक्सिया और हायपोक्सिमिया, इन दो शब्दों में फर्क है। खून में प्राणवायू की मात्रा कम होने को अलग संज्ञा से बताया गया है, जबकि शरीर के ऊतकों को पर्याप्त प्राणवायू न मिलना हायपोक्सिया है। दोनों अलग हैं, लेकिन खून में ऑक्सीजन कम होने की वजह से ही आगे चलकर ऊतकों में हायपोक्सिया की समस्या खड़ी होती है। शरीर की हर पेशी को जिंदा रहने और काम करने के लिए ऑक्सीजन चाहिए, इसलिए इसे बेहद गंभीर और ध्यान देने लायक स्थिति बताया गया है।
शुरुआती लक्षणों की बात करें तो प्राणवायू की सप्लाई घटने पर शरीर इसकी भरपाई के लिए सांस और दिल की रफ्तार बढ़ाने की कोशिश करता है। शुरू में सांस फूलना, तेज सांस लेना, दिल की धड़कन बढ़ना, चक्कर आना, सिरदर्द या ध्यान लगाने में दिक्कत जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं।
कारणों में दमा, न्यूमोनिया, गंभीर श्वसन संक्रमण, फेफड़ों की लंबे समय की बीमारी, फेफड़े की रक्तवाहिनी में गुठली अटकना, हृदयविकार और जन्म से मौजूद हृदय के दोष गिनाए गए हैं। गंभीर रक्तक्षय में भी ऊतकों तक पर्याप्त प्राणवायू पहुंचने में रुकावट आ सकती है।
इसके अलावा सांस की नली में रुकावट आने या अचानक बहुत ऊंचे इलाके में जाने से भी यह समस्या खड़ी हो सकती है। बच्चों में सांस की नली के संक्रमण और कुछ जन्मजात बीमारियां अहम कारण बताई गई हैं।
कुल मिलाकर, दमा, न्यूमोनिया, फेफड़ों की बीमारियां, हृदयविकार, रक्तक्षय और सांस की नली की रुकावट से यह समस्या हो सकती है। सांस फूलना, तेज सांस, बढ़ी हुई धड़कन, चक्कर और ध्यान न लगना इसके शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।