बुधवार, 14 अक्टूबर 2026

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22:19 IST

बाल दृष्टी: मुंबई के 1,200 निगम स्कूलों के 3 लाख बच्चों की आंखों की जांच का लक्ष्य

बृहन्मुंबई महानगरपालिका और व्हिजन फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने तीन साल में निगम के स्कूलों के तीन लाख विद्यार्थियों की नेत्रजांच का लक्ष्य रखा है।

बाल दृष्टी: मुंबई के 1,200 निगम स्कूलों के 3 लाख बच्चों की आंखों की जांच का लक्ष्य तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

बोर्ड साफ न दिखने की वजह से पढ़ाई में पीछे रह जाने वाले बच्चों को आंखों का इलाज मिल सके, इसके लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका और व्हिजन फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने मिलकर 'बाल दृष्टी' नाम से एक नई पहल शुरू की है। बताया गया है कि यह अपनी तरह की पहली पहल है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस पहल के लिए आगे बढ़कर कदम उठाया है।

इस पहल के तहत तीन साल के अंदर महानगरपालिका के 1,200 स्कूलों के तीन लाख विद्यार्थियों की आंखों की जांच करने का लक्ष्य तय किया गया है।

उपक्रम के मुताबिक 75 प्रतिशत से ज्यादा दृष्टिदोष ऐसे होते हैं जिन्हें टाला जा सकता है या इलाज से सुधारा जा सकता है। 'बाल दृष्टी' अपवर्तनदोष की पहचान और इलाज पर केंद्रित है और आयुष्मान भारत के तहत चलने वाले स्कूल स्वास्थ्य और कल्याण कार्यक्रम से जुड़ा हुआ है। कहा गया है कि बच्चे अक्सर यह नहीं बता पाते कि उन्हें साफ नहीं दिख रहा। वे धीरे-धीरे उतारने जैसे बर्ताव से अपनी परेशानी जाहिर करते हैं। मगर इन लक्षणों को अक्सर लापरवाही या पढ़ाई में ध्यान न देना समझ लिया जाता है। इस पहल में इसी स्थिति को वक्त रहते पहचानकर विद्यार्थियों को इलाज से जोड़ने पर जोर दिया गया है।

अब तक इस उपक्रम के तहत 361 विद्यार्थियों को चश्मे दिए जा चुके हैं। जिन विद्यार्थियों में आंखों की बीमारी का शक मिलता है, उन्हें ताडदेव रोड पर व्हिजन फाउंडेशन ऑफ इंडिया के कम्युनिटी आय क्लिनिक में विस्तार से जांच के लिए भेजा जाता है। इस जांच के बाद तय किया जाता है कि चश्मा, विशेषज्ञ का इलाज या ऑपरेशन की जरूरत है या नहीं। माता-पिता से घर और स्कूल की मुलाकातों के जरिए लगातार संपर्क रखा जा रहा है और इलाज पूरा होने तक फॉलोअप किया जा रहा है। अब तक चार विद्यार्थियों की तिरछेपन की सर्जरी की गई है।

जांच के दौरान कुछ गंभीर आंखों की खामियां भी सामने आई हैं। एक विद्यार्थी की एक आंख में माइनस 11.50 एसपीएच का निकट दृष्टिदोष मिला, जबकि कुछ विद्यार्थियों की रिपोर्ट में यह माइनस 16 एसपीएच तक पहुंचा है। बताया गया है कि शून्य को सामान्य दृष्टिमापन माना जाता है और माइनस 6 से उच्च निकट दृष्टिदोष की स्थिति शुरू होती है। इस स्तर पर कुछ सेंटीमीटर के आगे का दृश्य भी धुंधला दिख सकता है। एक विद्यार्थी में मोतियाबिंद का भी निदान हुआ है।

उपक्रम में देश के आंकड़े भी बताए गए हैं। देश में अनुमानित 93 लाख बच्चे दृष्टिबाधित बताए गए हैं। 'इंडियन जर्नल ऑफ ऑप्थैल्मोलॉजी' में 2022 के एक अध्ययन के मुताबिक बाल अंधत्व की वजह से भारत की सकल राष्ट्रीय आय को करीब 1,300 करोड़ रुपये का अप्रत्यक्ष नुकसान होता है। अपवर्तनदोष और ऐम्ब्लायोपिया बाल अंधत्व के मुख्य कारण बताए गए हैं, और 75 प्रतिशत से ज्यादा दृष्टिदोष टाले जा सकते हैं या इलाज से सुधारे जा सकते हैं।

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