सोम‌वार, 19 अक्टूबर 2026

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08:22 IST

बाजार में पिछले हफ्ते की तेजी के बाद अब Q2 नतीजे, FII और तेल की कीमतों पर नजर

पिछले हफ्ते निफ्टी 50 में 2.77 फीसदी और सेन्सेक्स में 3.11 फीसदी की बढ़त रही। अब निवेशकों की नजर सितंबर तिमाही के नतीजों, विदेशी निवेशकों के रुख, बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल पर रहेगी।

बाजार में पिछले हफ्ते की तेजी के बाद अब Q2 नतीजे, FII और तेल की कीमतों पर नजर तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

भारतीय शेयर बाजार के लिए अगला हफ्ता अहम रहने वाला है। उम्मीद है कि सितंबर तिमाही (Q2) के नतीजे, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का रुख, दुनिया भर की बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल के दाम बाजार की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे। हाल की जोरदार तेजी के बाद निवेशक यह परखेंगे कि बाजार अपनी रफ्तार बनाए रख पाता है या नहीं।

पिछले हफ्ते निफ्टी 50 में 2.77 फीसदी और सेन्सेक्स में 3.11 फीसदी की बढ़त हुई। इस तेजी को आईटी स्टॉक्स में फिर से लौटी खरीदारी, ग्लोबल बॉन्ड यील्ड पर दबाव में कमी और देश के संस्थागत निवेशकों (DII) की लगातार खरीदारी से सहारा मिला। शुक्रवार को दोनों बड़े इंडेक्स लगातार दूसरे ट्रेडिंग सेशन में चढ़कर बंद हुए। इससे हाल की गिरावट के बाद बाजार में सुधार की उम्मीद और मजबूत हुई।

शुक्रवार को सेन्सेक्स 413.66 अंक, यानी 0.56 फीसदी चढ़कर 74,729.27 अंक पर बंद हुआ। निफ्टी 50 148.80 अंक, यानी 0.65 फीसदी की बढ़त के साथ 23,146.15 अंक पर बंद हुआ। पूरे हफ्ते में सेन्सेक्स 2,256.94 अंक और निफ्टी 625.7 अंक ऊपर गया।

अब बाजार से जुड़े लोगों की नजर सितंबर तिमाही के नतीजों पर रहेगी। निवेशक देखेंगे कि हाल की तेजी सिर्फ आईटी स्टॉक्स तक सीमित है या दूसरे सेक्टरों में भी फैली है। बैंकिंग, कंज्यूमर और इंडस्ट्रियल कंपनियों के नतीजे और मैनेजमेंट की टिप्पणियां इसलिए खास होंगी कि उनसे राजस्व में बढ़त, मार्जिन में सुधार और मांग की हालत का अंदाजा लगेगा।

अगली तिमाही के लिए कंपनियां जो गाइडेंस देंगी, वह भी निवेशकों की भावना तय करने में अहम रहेगा। दमदार नतीजे और सकारात्मक ट्रेडिंग संकेत बाजार को सहारा दे सकते हैं, जबकि कमजोर प्रदर्शन या सतर्क रुख आगे की बढ़त को सीमित कर सकता है।

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का रुख भी अहम रहेगा। उनकी बिकवाली में कुछ कमी आई है, लेकिन अगर यही सिलसिला जारी रहा तो बाजार दबाव में आ सकता है। वहीं देश के संस्थागत निवेशकों (DII) की लगातार खरीदारी बाजार को सहारा दे सकती है।

ग्लोबल बॉन्ड यील्ड और मौद्रिक नीति से जुड़ी उम्मीदों पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। यील्ड फिर बढ़ी तो इक्विटी बाजार की वैल्यूएशन पर दबाव आ सकता है और फिक्स्ड-इनकम निवेश ज्यादा आकर्षक हो जाएगा। इसके उलट, यील्ड घटने पर जोखिम लेने का रुझान बढ़ सकता है और शेयर बाजार में निवेश को बढ़ावा मिल सकता है।

अगले हफ्ते कच्चे तेल के दाम और भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी मायने रखेंगे। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम लगातार बढ़े तो भारत का आयात खर्च बढ़ सकता है, महंगाई पर दबाव आ सकता है और कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर दुनिया के वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।

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