असोचैम की एरोस्पेस और डिफेंस बैठक: संरक्षण उत्पादन 1,80,000 करोड़ रुपये, सैंडबॉक्स का प्रस्ताव
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असोचैम महाराष्ट्र एरोस्पेस एंड डिफेंस काउंसिल की पहली स्टेकहोल्डर बैठक में देश के रक्षा क्षेत्र की दिशा पर खुलकर बात हुई। बैठक को संबोधित करते हुए पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे, PVSM, AVSM, VSM, ADC (रिटायर्ड) ने कहा कि भारत के रक्षा उत्पादन क्षेत्र की प्राथमिकताएं अब सिर्फ असेंबली पर आधारित उत्पादन से हटकर तेजी से स्वदेशी तकनीक के मालिकाना हक़ और नए शोध की ओर बढ़ रही हैं।
सरकार के बदलते नीतिगत नजरिए पर जोर देते हुए जनरल पांडे ने कहा, "लक्ष्य साफ तौर पर 'मेक इन इंडिया' से 'ओन्ड बाय इंडिया' की तरफ बढ़ रहा है। टेक्नोलॉजी ट्रांसफर लेकर यहां सिर्फ पुर्जे जोड़ देना काफी नहीं है, टेक्नोलॉजी और सब-सिस्टम्स में अपना खुद का आईपी होना जरूरी है।"
बैठक में L&T प्रिसिजन इंजीनियरिंग एंड सिस्टम्स के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और SIDM के अध्यक्ष अरुण टी. रामचंद्रन ने बताया कि पिछले वित्त वर्ष में देश के अंदर रक्षा उद्योग का उत्पादन करीब 1,80,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। असोचैम महाराष्ट्र राज्य परिषद के अध्यक्ष मिलिंद हर्डीकर ने साफ किया कि इस क्षेत्र का भविष्य सिर्फ उत्पादन क्षमता पर टिका नहीं होगा। उनके मुताबिक यह इस पर भी निर्भर करेगा कि उन्नत तकनीक को डिजाइन करने, विकसित करने और नया रूप देने की क्षमता कितनी है।
असोचैम के महासचिव सौरभ सान्याल ने वर्चुअल संबोधन में कहा कि आयात की जगह देश में बनाने से आगे बढ़कर स्वदेशी डिजाइन और निर्यात पर ध्यान देना चाहिए। इसके लिए महाराष्ट्र का औद्योगिक आधार और कुशल मानव संसाधन बहुत काम का है। असोचैम एरोस्पेस एंड डिफेंस विभाग के अध्यक्ष संजय चक्रवर्ती ने महाराष्ट्र में एक पूरी और आपसी सहयोग वाली डिफेंस इकोसिस्टम खड़ी करने का लक्ष्य सामने रखा।
चर्चा के दौरान महाराष्ट्र में एक खास टेस्टिंग और वैलिडेशन सुविधा, यानी 'सैंडबॉक्स', बनाने का अहम प्रस्ताव रखा गया। साथ ही उद्योग, सशस्त्र बलों और सरकार के बीच तालमेल बढ़ाने की बात भी उठी। ऊंची उत्पादन लागत, वर्किंग कैपिटल की दिक्कतें और कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए मार्च 2027 तक एक मसौदा और कार्यसमूह का ढांचा तय करने का लक्ष्य रखा गया है। इसे अप्रैल 2027 से लागू करने का उद्देश्य है।
कार्यक्रम का समापन असोचैम की राज्य और केंद्रशासित प्रदेश प्रमुख सुश्री परमिंदर जीत कौर के आभार प्रदर्शन के साथ हुआ।
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