अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो भारत दौरे पर, 200 से ज्यादा उद्योगपति साथ, मुंबई-जामनगर पर फोकस
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अमेरिका के परराष्ट्र सचिव मार्को रुबियो 17 से 22 अक्टूबर के बीच भारत और मध्य एशिया के अहम दौरे पर आए हैं। इस साल यह उनका दूसरा भारत दौरा है, इसलिए कूटनीति के नजरिए से इस यात्रा को काफी अहमियत दी जा रही है। भारत और अमेरिका के सामरिक और आर्थिक रिश्ते दिन-ब-दिन मजबूत हो रहे हैं, और उसी पृष्ठभूमि में यह दौरा हो रहा है।
रुबियो सिर्फ नीतिगत बातचीत तक सीमित नहीं रहेंगे। वे भारत और अमेरिका के बीच व्यापारी करारों को जमीन पर उतारने के लिए एक बहुत बड़े कारोबारी शिष्टमंडल की अगुवाई भी कर रहे हैं। इस शिष्टमंडल में 200 से ज्यादा अव्वल अमेरिकी उद्योगपति और कारोबारी नेता शामिल हैं, जो मध्य एशिया और भारत में अरबों डॉलर के नए निवेश की नींव रख रहे हैं।
दौरे की शुरुआत उन्होंने मध्य एशिया के उज्बेकिस्तान से की। ऐतिहासिक शहर समरकंद में हुई 'C5+1' मंत्री स्तर की परिषद में वे शामिल हुए। इस मंच के जरिए अमेरिका का मुख्य मकसद उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और किर्गिज गणराज्य जैसे मध्य एशियाई देशों के साथ सामरिक सहयोग बढ़ाना है। साथ ही क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास के नए मौके बनाना भी इसका मकसद है।
मध्य एशिया की बातचीत के बाद रुबियो भारत पहुंच रहे हैं। इस दौरे की सबसे खास बात यह है कि नई दिल्ली की राजनीतिक बैठकों के साथ उनका मुख्य ध्यान देश के दो बड़े आर्थिक और औद्योगिक शहरों, मुंबई और जामनगर, पर रहेगा। कूटनीतिक हलकों में इस रणनीति की खूब चर्चा है।
मुंबई को भारत की आर्थिक और वित्तीय सेवाओं की राजधानी कहा जाता है। ग्लोबल बैंकिंग, कैपिटल मार्केट, वेंचर कैपिटल और टेक्नोलॉजी सेक्टर में बड़े निवेश के फैसले मुंबई से ही होते हैं। अपने साथ आए 200 से ज्यादा उद्योगपतियों के शिष्टमंडल के साथ रुबियो मुंबई में भारतीय उद्योगपतियों और CEOs से सीधी बात करेंगे। भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाना, टेक्नोलॉजी का लेन-देन और इन्फ्रास्ट्रक्चर में अमेरिकी पूंजी लाना मुंबई दौरे का मुख्य एजेंडा है।
दूसरी तरफ गुजरात के जामनगर का चुनाव सबको चौंकाने वाला रहा है। जामनगर को सिर्फ भारत का ही नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा पेट्रोकेमिकल और रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स माना जाता है। ग्लोबल एनर्जी मार्केट की हलचल, ग्रीन एनर्जी टेक्नोलॉजी और हाइड्रोजन ईंधन की आगे की जरूरतों को देखते हुए जामनगर की रणनीतिक अहमियत बहुत है।
अमेरिका और भारत की एनर्जी पार्टनरशिप (US-India Energy Dialogue) अब पारंपरिक तेल से आगे बढ़कर रिन्यूएबल एनर्जी और क्लीन एनर्जी टेक की तरफ मुड़ रही है। जामनगर के विशाल एनर्जी प्रोजेक्ट्स का दौरा करके रुबियो और उनका शिष्टमंडल ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, सप्लाई चेन को और मजबूत करने और आने वाले वक्त की ऊर्जा सुरक्षा पर गहरी बातचीत करेगा।
जानकारों का मानना है कि दुनिया की अर्थव्यवस्था में उथल-पुथल, इंडो-पैसिफिक इलाके की सुरक्षा चुनौतियों और ग्लोबल सप्लाई चेन में बदलाव के बीच रुबियो का यह दौरा बिल्कुल सही वक्त पर हो रहा है। उन्हें भरोसा है कि इससे भारत और अमेरिका के व्यापारी करारों को नई रफ्तार मिलेगी और दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी। उद्योगों के केंद्रों का सीधा दौरा करके अमेरिका ने भारत के साथ आर्थिक रिश्तों को नई दिशा देने का साफ संकेत दिया है।