रविवार, 11 अक्टूबर 2026

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17:14 IST

अक्टूबर की गर्मी से बिजली की मांग रिकॉर्ड 32,500 मेगावॉट पर, त्योहारों से पहले सप्लाई पर दबाव

अक्टूबर की गर्मी से महाराष्ट्र में बिजली की मांग रिकॉर्ड 32,500 मेगावॉट तक पहुंच गई है, जबकि उत्पादन और उपलब्धता की सीमाओं से सप्लाई पर दबाव है।

अक्टूबर की गर्मी से बिजली की मांग रिकॉर्ड 32,500 मेगावॉट पर, त्योहारों से पहले सप्लाई पर दबाव तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

अक्टूबर की बढ़ती गर्मी यानी ऑक्टोबर हीट की वजह से महाराष्ट्र में बिजली की मांग तेज़ी से बढ़ी है। 7 अक्टूबर को राज्य में बिजली की मांग रिकॉर्ड 32 हजार 500 मेगावॉट तक पहुंच गई। लेकिन बिजली बनाने और उसकी उपलब्धता की सीमाओं की वजह से राज्य के सामने सप्लाई का बड़ा चैलेंज खड़ा हो गया है।

मुंबई को छोड़कर महावितरण के कार्यक्षेत्र में 8 अक्टूबर को दोपहर 4 बजे 27 हजार 282 मेगावॉट बिजली की खपत दर्ज की गई। त्योहारों के मौसम में एक तरफ बढ़ा हुआ बिजली इस्तेमाल है और दूसरी तरफ पैदा हुई कमी, दोनों मिलकर चिंता बढ़ा रहे हैं।

बिजली उत्पादन पर इसका बड़ा असर पड़ा है। महानिर्मिती के चार बड़े थर्मल यूनिट फिलहाल बंद हैं। इनमें भुसावल, चंद्रपुर, कोराडी और खापरखेड़ा बिजली केंद्रों का एक-एक यूनिट शामिल है। महानिर्मिती के थर्मल प्रोजेक्ट्स की स्थापित क्षमता 10 हजार 842 मेगावॉट है, पर अभी असल में सिर्फ 6 हजार 392 मेगावॉट बिजली बन रही है। कोयले की कमी, घटी हुई पनबिजली और केंद्रीय ग्रिड से कम सप्लाई ने हालात और मुश्किल कर दिए हैं।

केंद्रीय ग्रिड से महाराष्ट्र के लिए 5 हजार 558 मेगावॉट बिजली तय है। मगर असल में सिर्फ 3 हजार 903 मेगावॉट बिजली मिल रही है, यानी राज्य को पूरी 1 हजार 655 मेगावॉट बिजली कम मिल रही है। इसके अलावा एनटीपीसी के मौदा प्रोजेक्ट का एक यूनिट और गैस पर चलने वाले गांधार व कावास प्रोजेक्ट लंबे समय से बंद पड़े हैं।

इस मुश्किल हालात में बिजली गुल न हो, इसके लिए राज्य सरकार और महावितरण ने कुछ अहम कदम उठाए हैं। पहला है लोड मैनेजमेंट। मांग और उपलब्धता का हिसाब मिलाकर बिजली कटौती से बचने की प्लानिंग की जा रही है।

दूसरा कदम अतिरिक्त बिजली की खरीद है। पावर एक्सचेंज और पीएफसी के जरिए 3 हजार 565 मेगावॉट अतिरिक्त बिजली हासिल करने की कोशिशें चल रही हैं। इसके साथ ही बिजली की कमी दूर करने के लिए शॉर्ट टर्म करारों के तहत 289 मेगावॉट बिजली खरीदी जा चुकी है।

तीसरी तरफ कोयले और सौर ऊर्जा पर ध्यान है। थर्मल प्रोजेक्ट्स के लिए कोयले की सप्लाई सुचारू रखने पर जोर दिया जा रहा है, और दिन में मिलने वाली सौर ऊर्जा का ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है।

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