अहिल्यानगर में भगवान बाबा मल्टीस्टेट के जमाकर्ता एसपी दफ्तर पर उतरे, सभी आरोपियों की गिरफ्तारी मांगी
श्री संत भगवान बाबा मल्टीस्टेट को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी के करोड़ों रुपये के घोटाले पर जमाकर्ताओं ने अहिल्यानगर में जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया।
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श्री संत भगवान बाबा मल्टीस्टेट को-ऑपरेटिव्ह क्रेडिट सोसायटी में करोड़ों रुपये की आर्थिक गड़बड़ी हुई है। इसके बाद इस सोसायटी में पैसा जमा करने वाले लोगों का सब्र आखिरकार जवाब दे गया। उन्होंने अहिल्यानगर में जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय पर पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया। उनकी मुख्य मांग थी कि इस मामले के सभी दोषियों और बाकी बचे आरोपियों को फौरन गिरफ्तार किया जाए।
शेवगाव, पाथर्डी, श्रीरामपूर और अहिल्यानगर इलाके से करीब 60 से 70 पीड़ित जमाकर्ता एक साथ आए और पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सामने आंदोलन शुरू किया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि सभी आरोपियों को अरेस्ट किया जाए और जमाकर्ताओं को इंसाफ मिले। मेहनत की जमा पूंजी फंस जाने से ये लोग बेहद गुस्से में थे। उन्होंने प्रशासन के धीमे कामकाज पर भी कड़ी नाराजगी जताई।
प्रदर्शनकारियों ने जिला पुलिस अधीक्षक मुमक्का सुदर्शन से मुलाकात की और उन्हें अपनी मांगों का निवेदन सौंपा। निवेदन में कहा गया कि संस्था की मौजूदा चेअरमन मंदाकिनी रंगनाथ वैद्य और मुख्य कार्यकारी अधिकारी जयशाली मयूर वैद्य को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
आंदोलनकारियों ने एक सनसनीखेज दावा भी किया है। उनके मुताबिक जयशाली वैद्य की बहन वैशाली योगेश गायकवाड के नाम पर संस्था से पूरे 30 करोड़ रुपये का कर्ज दिखाया गया है। निवेदन में मांग की गई कि इस शक भरे लेनदेन की निष्पक्ष और गहरी जांच हो और दोषियों के खिलाफ फौरन मामले दर्ज किए जाएं।
आंदोलन की गर्मी देखकर आर्थिक अपराध शाखा के जांच अधिकारी शिरीष देशमुख ने प्रदर्शनकारियों से बात की। उन्होंने पक्का भरोसा दिया कि मामले के बाकी सभी आरोपियों को जल्द से जल्द ढूंढकर गिरफ्तार किया जाएगा और कानूनी कार्रवाई तेजी से होगी। जांच अधिकारी के इस आश्वासन के बाद जमाकर्ताओं ने फिलहाल अपना आंदोलन वापस ले लिया।
आंदोलन खत्म हो गया है, लेकिन अब सभी जमाकर्ताओं की नजर इस पर टिकी है कि पुलिस का दिया भरोसा कब पूरा होता है। सभी पीड़ित जमाकर्ताओं की बस यही उम्मीद है कि उनकी मेहनत की कमाई सुरक्षित लौट आए और दोषियों को कड़ी सजा मिले। अब देखना यह है कि पुलिस प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है।
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