अहिल्यानगर के वरिष्ठ नेता भानुदास कोतकर का दिल का दौरा पड़ने से 74 साल की उम्र में निधन
कांग्रेस के पूर्व शहराध्यक्ष और कृषि उपज बाजार समिति के पूर्व सभापति भानुदास कोतकर का आज सुबह निधन हो गया।
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अहिल्यानगर की राजनीति और सहकार क्षेत्र में कई दशकों तक असर रखने वाले वरिष्ठ नेता भानुदास एकनाथ कोतकर का आज सुबह निधन हो गया। वे 74 साल के थे। दिल का दौरा पड़ने से उनकी जान गई। वे कांग्रेस के पूर्व शहराध्यक्ष थे और कृषि उपज बाजार समिति के सभापति भी रह चुके थे।
आज सुबह अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और सीने में दिल की तकलीफ महसूस हुई। उन्हें फौरन अहिल्यानगर के आनंदऋषीजी हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। उनके जाने से अहिल्यानगर के राजनीतिक गलियारे का एक बेहद असरदार और चर्चित दौर खत्म हो गया है।
भानुदास कोतकर ने कांग्रेस के पूर्व शहराध्यक्ष के तौर पर अपनी राजनीतिक पहचान बनाई और स्थानीय राजनीति में अपनी अलग और मजबूत जगह बनाई। दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बालासाहेब थोरात से उनके बहुत करीबी और अच्छे रिश्ते थे।
अहिल्यानगर कृषि उपज बाजार समिति की राजनीति में कई साल तक उनका एकछत्र राज और बड़ा दबदबा रहा। बाजार समिति के अध्यक्ष पद पर रहने के साथ-साथ सहकार क्षेत्र की अलग-अलग हलचलों में भी उनकी भूमिका हमेशा निर्णायक मानी जाती थी।
अहिल्यानगर के केडगाव इलाके के राजनीतिक समीकरण हों या सहकार और बाजार समिति की सियासत, भानुदास कोतकर का नाम हमेशा केंद्र में रहा। राजनीति के साथ उनके परिवार की होटल कारोबार जैसे कई व्यावसायिक क्षेत्रों में भी सक्रिय हिस्सेदारी थी।
उनके बड़े बेटे संदीप कोतकर अहिल्यानगर महानगरपालिका के महापौर रह चुके हैं और उन्होंने राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया। इसके अलावा राष्ट्रवादी कांग्रेस के पूर्व विधायक अरुणकाका जगताप से उनका समधियाना रिश्ता था, जिससे राजनीतिक हलकों में इस परिवार का वजन और बढ़ गया था।
भानुदास कोतकर की जिंदगी जितनी राजनीतिक दबदबे के लिए जानी गई, उतनी ही कुछ गंभीर अदालती मामलों की वजह से भी पूरे राज्य में चर्चा में रही। अशोक लांडे हत्या मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस मामले से उनका नाम पूरे राज्य में चर्चा के केंद्र में आ गया था।
राजनीतिक दबदबा, सहकार क्षेत्र की पकड़, कारोबारी सफर और अदालती लड़ाई, इन अलग-अलग और एक-दूसरे से उलट पहलुओं की वजह से उनकी शख्सियत हमेशा चर्चा में बनी रही। उनके निधन से अहिल्यानगर के राजनीतिक और सहकार इतिहास के एक उथल-पुथल भरे और अहम अध्याय का अंत हो गया है। उनके पीछे परिवार, रिश्तेदारों और साथियों में शोक की लहर है।
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