मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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21:31 IST

अहमदाबाद फायर ब्रिगेड के बेड़े में अब टोयोटा हिलक्स की रेस्क्यू गाड़ियां शामिल

अहमदाबाद अग्निशमन और आपातकालीन सेवा ने अपने बेड़े में 15 टोयोटा हिलक्स गाड़ियां शामिल कीं, जिन्हें पूरी तरह बदलकर बचाव कार्य के लिए तैयार किया गया है।

अहमदाबाद फायर ब्रिगेड के बेड़े में अब टोयोटा हिलक्स की रेस्क्यू गाड़ियां शामिल
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

टोयोटा हिलक्स नाम सुनते ही जो तस्वीर सामने आती है वो है एक दमदार गाड़ी की, जो पहाड़, पत्थर, कीचड़ हर जगह से निकल सकती है। अब तक यह गाड़ी लोग शौक से या सामान ढोने के लिए खरीदते थे, लेकिन अब इसे एक बिलकुल नया काम सौंपा गया है, लोगों की जान बचाने का काम।

अहमदाबाद फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज यानी AFES ने अपने बेड़े में 15 टोयोटा हिलक्स गाड़ियां शामिल की हैं। ये कोई आम गाड़ियां नहीं हैं, इन्हें पूरी तरह बदलकर अग्निशमन और रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए तैयार किया गया है। जहां बड़ी फायर ब्रिगेड की गाड़ी नहीं पहुंच पाती, वहां यह हिलक्स आसानी से पहुंच जाएगी।

इस गाड़ी को क्यों चुना गया, इसकी वजह इसका इंजन और मॉडल है। इस गाड़ी में 2.8 लीटर का टर्बो-डीजल इंजन है, जो 204 HP पावर और 500 Nm टॉर्क देता है। गाड़ी की बॉडी लैडर-फ्रेम पर बनी है और सबसे खास बात यह है कि इसमें 4x4 यानी चारों पहियों में पावर मिलती है। अगर कोई इमारत गिर जाए और वहां रास्ते पर चारों तरफ मलबा फैला हो, तो फायर ब्रिगेड की बड़ी गाड़ी वहां नहीं जा सकती। ऐसे में यह छोटी हिलक्स गाड़ी आसानी से पहुंच सकती है। यही वजह है कि म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने इस गाड़ी को चुना। ये गाड़ियां सिर्फ आग बुझाने के लिए नहीं बल्कि रेस्क्यू ऑपरेशन और हादसे में फंसे लोगों को बाहर निकालने के काम भी आएंगी।

इन 15 गाड़ियों पर कितना खर्च आया, इसकी बात करें तो अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने इन 15 गाड़ियों पर करीब 19.74 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। यानी एक गाड़ी पर एक करोड़ रुपये से भी ज्यादा खर्च हुआ है। खास बात यह है कि ये हिलक्स के पुराने मॉडल हैं, नया फेसलिफ्ट मॉडल नहीं, फिर भी इन्हें खास तौर पर तैयार करवाया गया है। इतना ही नहीं, कॉर्पोरेशन ने 10 और रेस्क्यू बोट भी खरीदी हैं, जिन पर 3.40 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। अगर बाढ़ आती है तो पानी से भी लोगों को बचाया जा सकेगा। कुल मिलाकर आपदा के वक्त के लिए पूरी तैयारी रखी गई है।

इन गाड़ियों को इस तरह सजाया गया है कि वे एक छोटा रेस्क्यू सेंटर लगें, मानो एक छोटा अस्पताल हो। गाड़ी में हाइड्रोलिक कटर और स्प्रेडर लगा है, यानी अगर हादसे में गाड़ी का दरवाजा जाम हो जाए या इमारत गिरने से कोई फंस जाए, तो लोहा काटकर उसे बाहर निकाला जा सकता है। भारी मलबा हटाने के लिए वेल्डिंग और कटिंग मशीन भी गाड़ी में मौजूद है।

रात के समय या अंधेरे में काम करने के लिए गाड़ी पर बड़ी टेलिस्कोपिक लाइट लगाई गई है, जिसमें हाई-पावर LED फ्लडलाइट लगे हैं, ताकि अंधेरे में भी दिन जैसा उजाला हो सके। गाड़ी के पिछले हिस्से में एक खास कंपार्टमेंट बनाया गया है, जिसमें रस्सी, लाइफ जैकेट और फर्स्ट एड का सारा सामान रखा गया है। सड़क हादसा हो, इमारत गिरना हो, बाढ़ हो या लिफ्ट में कोई फंस जाए, यह गाड़ी हर जगह दौड़कर पहुंचेगी।

पहले एक घंटे में मदद मिल जाए तो जान बचने के चांस सबसे ज्यादा होते हैं, इसे गोल्डन आवर कहा जाता है। यह हिलक्स उसी गोल्डन आवर में घटनास्थल पर पहुंचकर जान बचाने का काम करेगी। बड़ी गाड़ियों के मुकाबले यह छोटी और तेज होने की वजह से अहमदाबाद की तंग गलियों में भी आसानी से पहुंच सकेगी।

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