आगरकर के जाने के बाद मुख्य चयनकर्ता की पोस्ट पर जडेजा का सवाल, फिर शुरू हुई चर्चा
अजित आगरकर के बाहर होते ही रवींद्र जडेजा ने बीसीसीआई के मुख्य चयनकर्ता पद की पोस्ट पर एक्स पर कमेंट कर अर्जी की प्रक्रिया पूछी।
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अजित आगरकर के बाहर होते ही रवींद्र जडेजा की एक कमेंट ने क्रिकेट के गलियारों में सबका ध्यान खींच लिया है। बीसीसीआई के मुख्य चयनकर्ता पद को लेकर आई पोस्ट पर जडेजा ने एक्स पर कमेंट किया और अर्जी की प्रक्रिया के बारे में पूछा। इसी से लोगों को लगा कि सब कुछ उतना ठीक नहीं था, जितना ऊपर से दिखता था।
जडेजा और आगरकर के बीच कभी खुला मतभेद सामने नहीं आया। फिर भी आगरकर के कार्यकाल में वनडे टीम में जडेजा की जगह को लेकर हमेशा अनिश्चितता बनी रही। 2022 के टी-20 वर्ल्ड कप में करारी हार के बाद अजित आगरकर ने टी-20 टीम में नौजवान खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने की नीति लागू की थी। लेकिन 2024 के टी-20 वर्ल्ड कप से ठीक पहले रोहित शर्मा, विराट कोहली और रवींद्र जडेजा टीम में लौट आए और भारत ने वर्ल्ड कप जीत लिया। खिताब जीतते ही तीनों दिग्गजों ने टी-20 फॉर्मेट से संन्यास ले लिया।
वनडे में जडेजा को बाहर बैठना पड़ा। आगरकर के कार्यकाल में उन्हें 2024 में श्रीलंका और 2025 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज से बाहर रखा गया था। आगरकर हमेशा यही कहते रहे कि जडेजा वनडे टीम का अहम हिस्सा हैं। मगर उनके फैसलों से कभी नहीं दिखा कि वे जडेजा को टीम का हिस्सा मानते हैं। इस बात की खटक जडेजा को भी हमेशा रही है। अब उनकी कमेंट देखकर नहीं लगता कि दोनों के बीच कभी सब ठीक था।
जडेजा का यह दर्द पहले भी सामने आ चुका है। ऑस्ट्रेलिया दौरे से पहले वेस्ट इंडीज के खिलाफ टेस्ट सीरीज के दौरान उनसे वनडे टीम से बाहर रखे जाने के बारे में पूछा गया था। तब वे साफ बोले थे। जडेजा ने कहा था, 'चयन मेरे हाथ में नहीं है। मुझे खेलना जरूर है। आखिर में टीम मैनेजमेंट, सिलेक्शन कमेटी, कोच और कप्तान का अपना नजरिया होता है और इस सीरीज के लिए मुझे न चुनने के पीछे उनके अपने कारण होंगे। उन्होंने मुझसे बात की थी, इसलिए टीम का ऐलान होने पर मुझे हैरानी नहीं हुई।'
जडेजा सोशल मीडिया पर ज्यादा सक्रिय रहने वालों में नहीं गिने जाते। उन्होंने इससे पहले इसी साल फरवरी में रविचंद्रन अश्विन की नेपाल क्रिकेट वाली पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी थी। ऐसे में बीसीसीआई की मुख्य चयनकर्ता वाली पोस्ट पर उनका अचानक दिखना और अर्जी की प्रक्रिया के बारे में पूछना इशारा करता है कि आगरकर के कार्यकाल में उनका तजुर्बा खास अच्छा नहीं रहा।